आक्रामक टूरिस्ट गाइड्स भारत में स्वच्छंद घूमने-फिरने का मज़ा किरकिरा कर देते हैं – 11 अक्टूबर 2015

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मैं पहले ही आपको बता चुका हूँ कि टूरिस्ट सीज़न शुरू हो चुका है और हमारे यहाँ आश्रम में कई मेहमान आ चुके हैं। स्वाभाविक ही वे भी बाहर घूमने जाते हैं लेकिन कभी-कभी उन्हें कई अप्रिय अनुभवों से गुज़रना पड़ता है-विशेष रूप से सामान बेचने वालों, गाइडों और आसपास मौजूद दूसरे भारतीयों के कारण। इसलिए हमने कुछ दर्शनीय स्थानों की अनुशंसा करना बंद कर दिया है। आज ही हमारे दो मेहमानों के साथ यहीं, वृंदावन में ऐसी ही एक घटना हुई!

जर्मनी से आई हुई दो महिलाएँ वृंदावन के कुछ दर्शनीय स्थल देखने निकलीं। वे वृंदावन के शाहजी मंदिर के पास स्थित निधि वन पहुँचीं और जैसे ही अपने इलेक्ट्रिक रिक्शा से उतरीं, उन्हें कुछ धार्मिक टूरिस्ट गाइडों ने घेर लिया, जो उन्हें मंदिर इत्यादि के दर्शन कराना चाहते थे और विशेष रूप से निधि वन के भीतर यहाँ से वहाँ घुमाना-फिराना चाहते थे, जहाँ हिन्दू आस्थावान मानते हैं कि हर रात भगवान कृष्ण नृत्य करते हैं। टूरिस्टों और तीर्थयात्रियों द्वारा अर्पित की जाने वाली दान-दक्षिणा में से घुमाने-फिराने वाले गाइड अच्छा-खासा कमीशन पाते हैं। स्वाभाविक ही, वे गैर-भारतीय टूरिस्टों और भक्तों को वहाँ की सैर कराने के लिए लालायित रहते हैं क्योंकि अक्सर वे दान-दक्षिणा में अच्छी ख़ासी रकम देते हैं।

तो इस तरह हमारी जर्मन मित्रों ने अपने आपको अचानक इतने सारे उत्तेजित पुरुषों के बीच घिरा पाया और सभी चाहते थे कि वे दोनों उनके साथ निधि वन की सैर करें। दोनों परेशान हो गईं और रिक्शावाला किसी तरह उन्हें निधि वन के द्वार तक छोड़कर आया। इस बीच सभी गाइड चिल्ला-चिल्लाकर उनसे उनकी सेवाएँ लेने की गुहार लगाते ही रहे। आखिरकार, हारकर उन महिलाओं ने उनमें से एक गाइड चुन ही लिया और तब जाकर बाकी सारे गाइड पीछे हटे और फिर उस रिक्शावाले पर अपना गुस्सा उतारने लगे, यहाँ तक कि उसके रिक्शे के टायरों को नुकसान पहुँचाने से भी बाज़ नहीं आए!

गाइड ने अपेक्षानुरूप हिन्दू मिथकों की बहुत सी कहानियाँ सुनाईं, कई जगहों पर उन्हें दान-दक्षिणा अर्पित करने पर मजबूर किया और अंत में अपनी सेवाओं के मुआवजे के रूप में तगड़ी रकम ऐंठने की कोशिश करने लगा। उनके बीच लगभग झगड़ा होने की नौबत आ गई, वह बहुत गुस्से में था कि उसके द्वारा अनुचित रूप से मांगी जा रही विशाल राशि वे देना नहीं चाहतीं। किसी तरह उनके बीच सहमति बनी-हालांकि उसने उनसे अच्छी खासी रकम ठग ली थी!

उनके लिए यह एक अच्छा-खासा रोमांचक अनुभव था और अंत में महिलाएँ अच्छे मूड में ही आश्रम वापस आईं-लेकिन उस पल उस अनुभव से गुजरना उनके लिए कतई सुखकर नहीं था और इसलिए वे दोबारा वहाँ जाने की सोच भी नहीं सकतीं। इसके अलावा भी हमारे कई मित्र विभिन्न दर्शनीय स्थलों से इसी तरह दुखी, व्यथित, विचलित होकर लौटे हैं, यहाँ तक कि कई बार भीड़-भाड़ के ऐसे हमलों के चलते उनकी आँखों में आँसू आ गए हैं!

इसीलिए हमने सबसे पहले पास ही स्थित एक दर्शनीय स्थान, बरसाना की अनुशंसा करना बंद कर दिया। यहाँ खूबसूरत मंदिर हैं लेकिन साथ ही बड़ी संख्या में जिद्दी भिखारी, आक्रामक गाइड और पंडे-पुजारी भी हैं! उसके बाद हमने फ़तेहपुर सीकरी जाने की सलाह देना बंद किया, जब कि सालों से ताजमहल देखने जाने वाला हर यात्री इस भुतहा शहर की बेहद सुंदर और अनमोल वास्तुकला देखने अवश्य जाता था। वहाँ के गाइड आपकी टॅक्सी को पार्किंग तक पहुँचने से पहले ही रोक लेते है और तब तक अलग नहीं होते जब तक कि आप उतरकर उनमें से किसी एक गाइड का चुनाव नहीं कर लेते या फिर जब तक कि आप जल्दी से उतरकर गाइडों और तरह-तरह का सामान बेचने वालों की भीड़ के बीच से बचकर प्रवेशद्वार की ओर निकल नहीं जाते!

कोई भी इन स्थानों को शांतिपूर्वक नहीं देख सकता! उन्हें देखने का मज़ा ही किरकिरा हो जाता है, वास्तव में दूसरों को अपने सामने से अलग करना लगातार संघर्ष जैसा महसूस होता है। स्वाभाविक ही, अक्सर इस पर काबू पाया जा सकता है-लेकिन काफी मशक्कत के बाद ही और उसके बाद उस स्थान का पूरा आनंद लेने की ताकत ही नहीं बची होती!

इसीलिए अब हम कुछ जगहों की अनुशंसा नहीं करते-और कुल मिलाकर यह भारतीय टूरिज़्म उद्योग को हानि पहुँचाता है! यह सबके लिए बुरा है: यात्रियों के लिए, क्योंकि वे स्वच्छंद घूम-फिर नहीं पाते, दर्शनीय स्थलों का आनंद नहीं ले पाते और दोबारा वहाँ आने से कतराते हैं; सामान बेचने वालों के लिए, जिनका व्यापार बढ़ सकता था अगर यात्री खुश होकर लौटते और, यहाँ तक कि सामान्य भले व्यक्तियों के लिए भी, जो वहाँ बेहतर माहौल बनाए रखना चाहते हैं या जो विदेशी यात्रियों की सुरक्षा की चिंता करते हैं, उन्हें इन आक्रमणों से बचाए रखना चाहते हैं! इन झूठे पंडे-पुरोहितों, आक्रामक गाइडों और सामान बेचने वालों के विरुद्ध कुछ न कुछ किया जाना बहुत ज़रूरी है जिससे लोग शांति और सुकून के साथ इस देश की पुरातात्विक सम्पदा और दर्शनीय स्थानों का भरपूर आनंद ले सकें!

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