मैं आपको बता चुका हूँ कि सन 2006 में मैं एक वेश्या से मिला था, जिसके साथ हुई चर्चा के बाद वेश्यावृत्ति के बारे में मेरा नज़रिया पूरी तरह बदल गया। इसके अलावा कि वह यह काम एक रोजगार की तरह, जैसा कि कुछ लोग कार्यालयों या कारखानों में करते हैं, स्वेच्छा से कर रही थी, उसने कुछ और विवरण भी दिए, जो मुझे दिलचस्प और विस्मयकारी लगे। इनमें से अधिकांश बातें अपने काम को लेकर उसके रवैये से संबन्धित थीं।
जब मैंने उससे पूछा कि यह सब कैसे होता है, यानी अपने ग्राहकों से मुलाक़ात आदि के बारे में थोड़ा विस्तार से जानना चाहा, तो उसने बताया कि वह हमेशा ग्राहक को अपनी सीमाओं के बारे में स्पष्ट रूप से बता देती है कि वह क्या-क्या करेगी और क्या नहीं करेगी। स्वाभाविक ही, हमेशा कोई न कोई पहली बातचीत तो होती ही है, चर्चा, जिसमें वह जानने की कोशिश करती है कि ग्राहक की इच्छा और अपेक्षाएँ क्या हैं और इसके तुरंत बाद ही उसे अपनी सीमाओं को स्पष्ट कर देना होता है।
उन सीमाओं में से एक थी असुरक्षित यौन संबंध। मुझे यह सुनकर अधिक आश्चर्य नहीं हुआ कि बहुत से पुरुष अधिकांश यौन गतिविधियों में, विशेषकर मुखमैथुन के समय, कंडोम का उपयोग करना पसंद नहीं करते। कुछ ग्राहक मौखिक दबाव डालकर उसके साथ असुरक्षित मुखमैथुन का प्रयास कर चुके थे लेकिन वह जानती थी कि ऐसा करने पर वह कई भयावह बीमारियों से ग्रसित हो सकती है इसलिए वह हमेशा इससे और कई दूसरी विकृत और विचित्र यौन क्रियाओं से दूर ही रही।
जहाँ तक खुद उसकी पसंद का सवाल है, वह उन पुरुषों को पसंद करती थी, जो गले लगाना और अन्य सामान्य ‘संभोग क्रियाओं’ पर ज़ोर देते थे। ऐसे पुरुष जो अपने आपको तनहा पाते थे और जिन्हें सिर्फ प्रेम की ज़रूरत होती थी।
इसी बात पर उसने सबसे अधिक ज़ोर दिया और मुझे उसकी यह बात पसंद आई। उसने बताया कि इस बात से उसे बड़ी संतुष्टि प्राप्त होती है कि भले ही कुछ घंटों के लिए हो, वह किसी को खुश कर पाती है और एक ऐसे व्यक्ति को थोड़ा सा आनंददायक समय बिता पाने का मौका देती है, जिसके पास इस वक़्त ऐसा कोई और जरिया नहीं है।
"यहाँ तक कि मैं बूढ़े लोगों के पास भी चली जाती हूँ!" आगे उसने कहा। "मैं उन्हें कुछ खुशी देती हूँ, वे मुझे थोड़ा सा पैसा देते हैं-यह न्यायपूर्ण सौदा है!" अगर वे बूढ़े उसके पास नहीं आ पाते तो वह खुद उनके घर चली जाती है। अक्सर वे लोग ज़्यादा कुछ नहीं चाहते। कुछ चुंबन और मामूली शारीरिक स्पर्श उनके लिए काफी होता है और इतने से ही वे इतना अच्छा महसूस करने लगते हैं कि वह खुद संतोष और खुशी से भर उठती है।
मैं इस चर्चा को बहुत खुशनुमा, मोहक और दिलचस्प घटना के रूप में याद करता हूँ। मुझे उसका कहा हर शब्द बहुत अच्छा लगा: उसका प्रयास और इच्छा कि वह दूसरों को खुश कर सके, उन्हें प्यार दे सके और थोड़ा सा रोमांचकारी समय उनके साथ बिता सके।
यह महिला एक व्यवसायी थी, वह अपने काम से खुश थी और मन लगाकर अपना काम कर रही थी। मैं इसमें कोई अनुचित बात नहीं देख पाता और वह भी नहीं देखती। आत्मविश्वास के अलावा, उसके व्यवसाय को लें तो वह अपने शरीर को लेकर बहुत सतर्क नज़र आती थी। वह स्वस्थ थी और स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त बने रहना चाहती थी। इसके अलावा, जैसा भी था, अपना शरीर उसे पसंद था-मेरे व्यक्तिगत सत्रों में आने वाली महिलाओं की ओर से यह सकारात्मक बात मैंने क्वचित ही सुनी थी।
उसके साथ हुई बातचीत आनंददायक थी-और बाद में जब भी ‘वेश्यावृत्ति’ पर कोई चर्चा होती थी तो मुझे उसके द्वारा कही गई बहुत सी बातें अक्सर याद आती थीं।
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