स्वामी बालेन्दु का उपयोग करने के लिए यूजर गाइड- 20 अक्टूबर 2013

मैंने 2005 में आस्ट्रेलिया में कुछ सप्ताह बिताए थे और फिर साल के अंत में यूरोप की यात्रा भी की थी। मैं उन जगहों में गया, जहां पहले मैं गर्मी के मौसम में गया था और इस बार मेरे साथ पूरे समय मेरा भाई यशेंदु और एक बांसुरी वादक भी थे। तब तक मैंने अपना गुरु का चोला पूरी तरह उतार फेंका था लेकिन मेरे कुछ पुराने मित्र इस बात को नहीं जानते थे। इसलिए मुझे कई ऐसे अनुभव हुए, जिन्हें सुनकर मेरे एक मित्र ने मज़ाक में कहा कि उसे अब "स्वामी बालेंदु के लिए उपयोग-मार्गदर्शिका" नाम से एक पर्चा छपवाना पड़ेगा!

मैं मानता हूँ कि कुछ लोगों के लिए, विशेषकर उनके लिए, जिनकी आध्यात्मिक क्षेत्र में रुचि है और जो गुरुओं के विषय में जानते हैं, तब थोड़ा भ्रम पैदा करने वाली स्थिति पैदा हो जाती है जब वे पारंपरिक, बिना सिले कपड़ों में एक ऐसे व्यक्ति को देखते हैं, जिसने बहुत समय एक गुरु के रूप में गुज़ारा था मगर- अब वह गुरु नहीं है। तो इस पर्चे का पहला मार्गदर्शक बिन्दु यह हो सकता है:

-लिफाफा देखकर मजमून भाँपने की गलती मत करो। वह गुरु नहीं है-इसलिए उसके साथ गुरु की तरह व्यवहार मत करो।

न करने वाली बातें: उनकी पूजा मत करो, उनके सामने सिर मत झुकाओ, उनके पैर मत पखारो या उनसे दीक्षित होने की अपेक्षा मत रखो।

करने वाली बाते: गले लगाओ, उन्हें अपना मित्र मानो और उनके साथ उसी तरह का व्यवहार करो जैसे आप किसी भी साधारण व्यक्ति के साथ करते हैं।

असल में हुआ यह कि मेरे आयोजक ने मेरे आने से पहले किसी गुरु से पूछकर रखा था कि गुरु का स्वागत कैसे किया जाता है और जैसे ही मैं उसके यहाँ पहुंचा, वे मेरे पैरों पर पानी छिड़ककर और फूल रखकर मेरा स्वागत करने लगे। इसके अलावा उन्होंने अपने लिविंग रूम में एक पूजाघर बना रखा था और ऊपर मेरी फोटो टांग रखी थी। मुझे उनका यह व्यवहार बड़ा अनोखा लगा, विशेषकर यह खयाल आने पर कि वे पश्चिमी लोग थे, जिनकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और नैसर्गिक आचरण और प्रकृति हमसे बहुत भिन्न है।

लेकिन मेरी जीवन-शैली में इसके अलावा भी कई बातें थीं जो लोगों की कल्पना के विपरीत थीं और जब हम लोग इस पर हंस ही रहे थे कि उसने कहा कि मुझे अपने यूजर मैनुअल में उन्हें भी शामिल करना चाहिए:

-वे अगरबत्तियाँ और धूप बत्तियाँ पसंद नहीं करते इसलिए अपने घर को 'पवित्र' करने की ज़हमत मोल न लें, खासकर उनके सोने के कमरे को इससे मुक्त रखें-अन्यथा उनके प्रवेश करते ही अचानक साफ हवा की आवश्यकता पड़ेगी और ठिठुरती रातों में भी खिड़कियाँ खोलनी पड़ेंगी।

अगरबत्तियाँ और धूपबत्तियाँ मुझे कभी अच्छी लगीं। सारे कमरे में फैली उनकी तीखी गंध से मुझे सांस लेने में तकलीफ महसूस होती है। दुर्भाग्य से जिस परिवेश में मैं रहता था और जो काम मैं करता था उनसे बचने का कोई उपाय नहीं था और मौसम कोई भी हो, घर में या अपनी योग-शालाओं में हमेशा मुझे खिड़कियाँ और दरवाजे खुले रखने पड़ते थे।

-उन्हें पर्दे वाला कमरा दें-नहीं तो वे चिपकाने वाला टेप और काले गत्ते लेकर कमरे की सारी खिड़कियों की सजावट कर देंगे।

जी हाँ, मैं और यशेंदु मिलकर यह कर चुके हैं। हमारे मित्र को इसमें कुछ बुरा नहीं लगा मगर उसके पड़ोसियों को डर लगा कि फ्लैट में अब अजीबोगरीब घटनाएँ घटित होने वाली हैं। 🙂

और अंत में:

-उनकी एक मीटर से भी जादा लंबी जटाओं का हिस्सा बाहर हो तो कार का दरवाजा बंद न करें, विशेषकर खराब मौसम में। चलती कार में उन्हें पता नहीं चलता मगर बाल इतने गंदे हो जाते हैं कि उन्हें साफ करना बहुत मुश्किल हो जाता है और समय भी बहुत बर्बाद होता है और उन्हें सुखाने में तो और भी देर लगती है!

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