एक नए साल की शुरुआत होने जा रही है! 28 जून 2015

मेरा जीवन

आज रविवार है और सिर्फ तीन दिन रह गए हैं जब हम स्कूल के नए सत्र की शुरुआत करेंगे! हमेशा की तरह आने वाले कुछ दिन हम नए सत्र की शुरुआत से संबन्धित कामों और उसकी तैयारियों में बुरी तरह व्यस्त होंगे। लेकिन हम बड़ी उत्कंठा से 1 जुलाई का इंतज़ार कर रहे हैं जब न सिर्फ हमारे पुराने छात्र स्कूल लौटेंगे बल्कि 60 नए विद्यार्थी भी पहली बार हमारे स्कूल आएँगे!

मौसम के सबसे गरम दिनों में यानी पिछले लगभग दो माह से स्कूल की छुट्टियाँ थीं। हमेशा से यही होता आया है, मेरे बचपन से लेकर आज तक- हालांकि मुझे पता चला है कि कुछ स्कूलों में छुट्टियों के दिन क्रमशः कम किए गए हैं और बच्चों को अधिक से अधिक समय स्कूल में रहना पड़ता है। हो सकता है कि इसका कारण बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा हो, जिससे बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा प्रदान की जा सके। कुछ भी हो, इतना मैं जानता हूँ कि हमारे बच्चे दो माह बाद पुनः स्कूल आने के लिए अत्यंत आतुर हो रहे होंगे!

पवन, जो दो सप्ताह से कुछ अधिक समय के लिए अपने घर गया था, आज सबेरे अपने छोटे भाई, गुड्डू के साथ आश्रम लौट आया है। गुड्डू पहले भी एक साल यहाँ रह चुका है और अब फिर से यहीं रहेगा। प्रांशु, जो हमारे साथ ही रहता है, आज शाम को आएगा और शायद अपने भाई को भी साथ लेकर आए। वह आ गया तो हमारे परिवार का सबसे नया सदस्य होगा।

इस समय स्कूल की सफाई का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है। शिक्षिकाएँ भी आगे की तैयारियों के लिए स्कूल आ चुकी हैं और रमोना, पूर्णेंदु और यशेंदु ने सभी नए स्कूली बच्चों के घरों का दौरा करने का काम पूर्ण कर लिया है। वे सभी बच्चे पहली बार स्कूल जाने की खुशी में फूले नहीं समा रहे हैं और उनकी व्यग्रता उनके चेहरे से ज़ाहिर होती है।

इन बच्चों में कुछ ऐसे हैं, जो कभी स्कूल नहीं गए, ज़्यादातर लगभग पाँच साल के, लेकिन कुछ बड़े बच्चे भी हैं। उनके मन में यह देखने की तीव्र उत्सुकता है कि आखिर स्कूल कैसा होता होगा: उनके भाई-बहनों, पड़ोसी बच्चों ने बताया तो होता है कि खूब मजा होता है, खूब दोस्त होते हैं, खेल-कूद, गीत-संगीत और नाच-गाना होता है-मगर खुद पहली बार उनका अनुभव प्राप्त करना अलग ही बात होती है! फिर कुछ वे बच्चे होते हैं, जो पहले किसी दूसरे स्कूल में पढ़ते थे और एक अन्य स्कूल को देखने की उत्कण्ठा से भरे हुए हैं, जिसके बारे में उन्होंने सुन रखा है कि वहाँ शिक्षिकाएँ बच्चों की पिटाई नहीं करतीं और जहाँ खूब मौज मस्ती होती है!

और शायद सबसे खुश अपरा है! गर्मियों के लंबे महीनों के बाद, जिसमें उसके मन बहलाव के लिए हम लगभग बीस लोग ही होते थे, अब बहुत सारे बच्चे होंगे, जिनके साथ वह दोपहर का भोजन करेगी और उनके साथ मौज मस्ती कर सकेगी! हमारी छुटकी को अपने आसपास बहुत सारे लोग चाहिए!

मुझे आज भी उन दिनों की याद है, जब हम सब भाई-बहन गर्मी की छुट्टियाँ समाप्त होने का इंतज़ार करते थे! कैसे हम लोग उन दोस्तों से पुनः मिलने को आतुर रहते थे, जो गर्मी की छुट्टियों में भारत के दूसरे हिस्सों में रह रहे अपने रिश्तेदारों से मिलने निकल जाते थे! स्कूली पाबंदियों में साल भर गुज़ारने के बाद स्कूल सत्र की समाप्ति के साथ मिली स्वतंत्रता से हम बोर हो जाते थे!

सन्नाटों वाले गरम महीनों के बाद लगता है जैसे पुनः नए सिरे से जीवन की शुरुआत होने वाली है। अत्यंत प्रफुल्लता महसूस हो रही है!

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