यौन संबंधों को गुप्त रखने वाला वह सबक, जो मैं सीख नहीं पाया- 13 अक्तूबर 2013

मैंने आपको बताया था कि सन 2005 में आस्ट्रेलिया के एक कस्बे में एक महिला ने मेरे यौन जीवन के बारे में प्रश्न किया था और जब मैंने उसे बताया कि तीस साल की उम्र में मैंने पहली बार यौन संबंध स्थापित किया था तो वे मेरे प्रति दयार्द्र हो उठी थी। खैर, मुझे थोड़ी हंसी आई मगर मेरे आयोजक वैसे ही गंभीर बने रहे।

हमारे बीच अच्छी समझ बन गई थी और मुझे उसके और उसकी पत्नी के साथ चर्चा करने में मज़ा आ रहा था। अपना काम समाप्त करने के बाद रोज़ ही हम लोग बैठकर गप्पें मारते रहते थे। फिर एक दिन मुझे उन्होंने एक सलाह दी, जिसे मैं जीवन भर नहीं भूलूँगा। उसके बाद पूरे समय, जब तक वहाँ रहा, मैं उन दोनों के सामने पड़ते ही अटपटा महसूस करता रहा।

जब उनकी मित्र चली गई तो मेरे आयोजक ने, जिनकी आयु 65 और 70 के बीच थी, मेरी तरफ देखा और कहा, "मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ। मैं एक बूढ़ा आदमी हूँ और मुझे जीवन का आपसे कुछ ज़्यादा अनुभव है।" उसके बाद उसने बताया कि उसकी पत्नी को कोई यौन समस्या हुई, जिसकी वजह से वो उसके साथ यौन सम्बन्ध संभव नहीं हो पा रहे थे। उसे ऐसा लगा कि उसका पति होने के कारण अब वह कभी उसके साथ सेक्स नहीं कर पायेगा! उसने मुझे बताया कि "वह भी उसी, ब्रह्मचर्य के उपदेशक, गुरु का शिष्य है" लेकिन पत्नी की इस परेशानी के चलते अन्यत्र भी उसके सेक्स संबंध हैं। और इस छोटे से व्याख्यान का अंत उसने अपनी उसी सलाह से किया, जो उसकी नज़र में बहुत महत्वपूर्ण थी। बड़ी उत्कटता और पूरी संजीदगी के साथ उसने मेरी आँखों में आंखे डालकर कहा: "लेकिन मैं उसे गुप्त रखता हूँ!"

मैं समझ गया कि यह बात उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण है मगर दुर्भाग्य से मैं उसे एक भावशून्य प्रतिक्रिया ही दे पाया- दरअसल मुझे ‘discreet’ शब्द समझ में नहीं आया था! वैसे तो मैं वहाँ अंग्रेज़ी में ही व्याख्यान देता था और अपने आयोजकों से और मुझसे मिलने आने वालों के साथ अंग्रेज़ी में अच्छी तरह संवाद कर लेता था मगर फिर भी शायद मेरा शब्दज्ञान सीमित था और ‘discreet’ शब्द अभी उसमें शामिल नहीं हुआ था! इसलिए मुझे पूछना पड़ा: "discreet शब्द का अर्थ क्या है?"

मुझे अनुमान तो था कि उसका मतलब इस बात से था कि अपने विवाहेतर संबंध को अपनी पत्नी से नहीं कहना चाहिए, बल्कि किसी से नहीं कहना चाहिए! "मैं इस विषय में किसी के सामने बात नहीं करता", उसने कहा। स्वाभाविक ही वह मेरा ध्यान किसी खास दिशा में मोड़ना चाहता था, कोई बात मुझे समझाना चाहता था। मैं अभी भी ‘discreet’ शब्द के व्यावहारिक अर्थ को मस्तिष्क में रजिस्टर और सेव करने का प्रयास कर रहा था और अब भी तुरंत नहीं समझ पाया कि वह कहना क्या चाहता है। आखिर उसे साफ-साफ कहना पड़ा: "देखो, आपने सेक्स किया, ठीक है। मैं भी करता हूँ! मगर मैं उसके बारे में किसी से बात नहीं करता, जब कि आप, कोई उसके बारे में पूछता है तो पूरी कहानी सुना डालते हैं!"

यह बड़ी विचित्र परिस्थिति थी और मैंने सिर हिलाकर सहमति व्यक्त कर दी-हालांकि मैं अब भी सोच रहा था कि इसमें बहुत झोल है: मैं तो खुले दिल से और ईमानदारी के साथ बता रहा था कि मैं क्या हूँ और मैं कोई गुनाह नहीं कर रहा था! मैं नहीं समझता था कि यौन संबंध स्थापित करना कोई गलत या अनैतिक बात थी! लेकिन वह ऐसा ही समझ रहा था! मैं समझ गया कि वह चाहता था कि मैं उसकी मित्र को यह न बताऊँ कि जीवन में मेरा कभी कोई सेक्स संबंध हुआ है और मैं असाधारण शक्तियों से लैस कोई खास व्यक्ति हूँ, जिसने उस खजाने को किसी पर लुटाकर खाली नहीं किया है! उसे विश्वास था कि वह मुझे कोई कीमती सलाह दे रहा है, जिस पर अमल करके मैं भविष्य में दूसरों के सामने अपने आपको बेहतर व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत कर सकता हूँ।

लेकिन उसकी इस सलाह ने सिर्फ इतना किया कि जब भी उसकी पत्नी मेरे सामने पड़ती थी मैं उसके पति के गुप्त रहस्य को जानने के अपराध-बोध के कारण बड़ी असुविधाजनक हालत में पहुँच जाता था। वह मेरी मेजबान थी और इसलिए ऐसा दिन में कई बार होता रहता था! खैर, मैंने इस वाकये से ‘discreet’ शब्द का अर्थ अच्छी तरह समझ लिया और पाया कि मैं अपने यौन जीवन को लेकर जीवन भर ‘discreet’ नहीं रह पाऊँगा…!

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