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दुनिया भर के राजाओं की एक सी रुचियाँ: पैसा, युद्ध और औरतें – 17 जनवरी 2016

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स्वामी बालेंदु अपनी पारिवारिक जयपुर यात्रा के बारे में लिख रहे हैं, जहाँ उन्होंने प्राचीन राजा-महाराजाओं के महलों, किलों और विलासिताओं की जानकारी प्राप्त की। उनकी रोमांचक यात्रा के बारे में यहाँ पढ़ें।

अपरा का चौथा जन्मदिन समारोह – 10 जनवरी 2016

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स्वामी बालेंदु अपरा के चौथे जन्मदिन के समारोह का वर्णन कर रहे हैं, जिसे उसके जन्मदिन यानी कल, 9 जनवरी 2016 के दिन आयोजित किया गया! वह बड़ा विशाल और शानदार समारोह सिद्ध हुआ-सबने बड़े आनंद के साथ खूब मौजमस्ती की!

हमें घनिष्ट रूप से जुड़ना पसंद है – एक कैनेडियन योग दल का आश्रम आगमन – 13 दिसंबर 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सारे आश्रम ने एक कैनेडियन दल के साथ बेहद सुखद और व्यस्त समय गुज़ारा। उनके योग विश्रांति शिविर के अनुभवों के विषय में यहाँ पढ़िए।

जर्मनी के खूबसूरत दौरे से भारत वापसी – 6 दिसंबर 2015

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भारत लौटकर स्वामी बालेंदु पिछले हफ्ते की अपनी पारिवारिक जर्मनी यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें उनकी पत्नी और बेटी भी उनके साथ थीं।

जर्मनी में हमारी मौज-मस्ती – 29 नवंबर 2015

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स्वामी बालेंदु अपनी पत्नी और बेटी के साथ जर्मनी में बिताए दूसरे सप्ताह का विवरण लिख रहे हैं। उनके रोमांचक अनुभवों के बारे में यहाँ पढ़ें!

अपने दूसरे घर, जर्मनी में अपरा से साथ मस्ती – 15 नवम्बर 2015

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स्वामी बालेन्दु रमोना और अपरा के साथ अपनी जर्मनी यात्रा के प्रारम्भिक दिनों के बारे में बता रहे हैं। वे वहाँ क्या-क्या कर रहे हैं, यहाँ पढ़िए!

आजकल हम एक साथ बहुत से कार्यक्रमों की तैयारी में व्यस्त हैं! 8 नवंबर 2015

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि वे एक साथ बहुत से कार्यक्रमों की तैयारी में कितने व्यस्त हैं-एक नया समूह उनके यहाँ आने वाला है, और जल्द ही एक यात्रा पर भी निकलना है!

क्या सकारात्मक नज़रिया आपको फूड पॉयज़निंग से बचा सकता है? 1 नवंबर 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि भारत में कहीं भी बाहर खाते-पीते समय आपको क्यों बहुत सतर्क रहना चाहिए-और इस मामले में आपका सकारात्मक नज़रिया भी आपको बैक्टेरिया-संक्रमण के खतरे से नहीं बचा सकता।

हम इतने नकारात्मक हैं कि हमें हर जगह लिंगभेद और दूसरी बुराइयाँ दिखाई देती हैं – 25 अक्टूबर 2015

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स्वामी बालेंदु अपने फोटो पर आई कुछ नकारात्मक टिप्पणियों के बारे में लिख रहे हैं-टिप्पणियाँ न सिर्फ चर्चा के विषय से कोसों दूर थीं बल्कि उस व्यक्ति की आलोचना कर रही थीं जो वहाँ मौजूद तक नहीं था!

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