पुनः जर्मनी में रहते हुए अब हमें एक सप्ताह हो चुका है लेकिन कैनेरी द्वीपों की यात्रा और वहाँ बिताए दिन भुलाए नहीं भूलते। अभी भी हम वहीं के बारे में सोचते रहते हैं और जब भी मौका मिलता है, अपने मित्रों के साथ वहाँ के अनुभव साझा करना नहीं भूलते-हमने वहाँ क्या-क्या देखा, क्या खरीदा, क्या खाया-पिया आदि आदि, सब कुछ! स्वाभाविक ही इस उजली धूप वाले द्वीप पर उन सभी फलों और सब्जियों का स्वाद लाजवाब होता है जिन्हें सूरज की रोशनी और ऊष्मा की ज़रूरत होती है। लेकिन एक अपवाद है: टमाटर। जी हाँ, यह इतना आश्चर्यजनक है कि मुझे इस पर यह ब्लॉग लिखने की इच्छा हो आई!
जब हम सब्जियों और फलों के बाज़ार गए तो हमें वहाँ एक से एक शानदार केले देखने को मिले और हम जो पीच खरीदकर लाए, उतने मीठे पीच हमने जीवन में कभी नहीं खाए थे! हम रोज़ ही ताज़े संतरे खरीदकर लाते थे और घर में उनका स्वादिष्ट, मीठा रस निकालते थे। सब्जियों के शौकीन हम सभी हैं और द्वीप के स्थानीय किसानों के खेतों से आई हुई उन ताज़ी, हरी सब्जियों को घर में पकाने के इरादे से हम रोज़ ही जी भरके सब्जियाँ खरीदते।
फिर हम टमाटर खोजते क्योंकि अधिकांश सब्जियों को अधिक स्वादिष्ट बनाने में, और भूख बढ़ाने वाले सॉसों में और लेंटिल में उनकी ज़रुरत पड़ती है। यह सुन्दर, लाल रंग की सब्ज़ी, जिसमें अपनी अलग मिठास और खुशबू होती है, दक्षिणी इलाके में स्थित ग्रान कनारिया के चमकते सूरज की ऊष्मा में पककर और भी लज़ीज़ हो जाती है।
लेकिन हमें अच्छे टमाटर नहीं मिल पाए। एक बार भी नहीं। हरे मिलते थे, नारंगी मिल जाते थे, थोड़े पकते हुए आधे लाल मिल जाते थे मगर पूरे पके हुए गाढ़े, लाल टमाटर हमें देखने को भी नहीं मिले कि हम उसके असली स्वाद का अतुलनीय आनंद ले सकें! आखिर हमें उन्ही में से कोई भी एक खरीदना पड़ता, जो जर्मनी में ठण्ड के मौसम में, जब सभी हरी या लाल वस्तुएँ आयात की जाती हैं, मिलने वाले टमाटरों से भी बदतर होते थे! इसका नतीजा हम पहले से जानते थे: उसका छिलका इतना मोटा होता था कि जैसा पकना चाहिए, पकता नहीं था और स्वाद इतना कामचलाऊ होता था कि आपको पता ही नहीं चल पाता था कि खाने में टमाटर भी पड़ा हुआ है।
आखिर इसका कारण क्या था? सारे द्वीप में हम जहाँ जाते, टमाटर के खेत के खेत दिखाई देते। जहाँ भी खेत थे या कोई भी खाली जगह, हमें या तो केले की या टमाटर की खेती दिखाई देती। तो फिर ऐसा क्यों था कि एक से एक बढ़िया केले तो हमें मिल जाते थे मगर टमाटर नहीं?
क्योंकि, जैसा कि कनारिया के हमारे दोस्तों ने बताया, वे अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर दूसरे देशों को निर्यात कर देते हैं!
खैर वैसे है तो यह पागलपन ही! आपके यहाँ का मौसम सबसे शानदार है, आपके यहाँ दुनिया के सबसे बेहतरीन टमाटर पैदा होते हैं और उन सभी को आप जहाज़ में लादकर विदेश भेज देते हैं और स्थानीय लोगों के हिस्से में जो भी बचा-खुचा, थोड़ा-बहुत रह जाता है, उसमें कोई स्वाद नहीं होता!
दुर्भाग्य से यह सिर्फ टमाटर के साथ और वह भी सिर्फ ग्रान कैनेरी में ही हो रहा हो, ऐसा नहीं है; यह एक वैश्विक समस्या है-लेकिन उसके बारे में कल बात करेंगे।
जब तक हम वहाँ रहे, हम ताज़े टमाटरों से दूर ही रहे और या तो बिना टमाटर के खाना पकाते रहे या टमाटर की प्यूरी का इस्तेमाल करते रहे। कम से कम टमाटर का कुछ तो स्वाद मिलता रहा!
Related posts
आध्यात्मिक होने की जगह मैं भौतिकवादी होना क्यों पसंद करूँगा – 29 जनवरी 2015
अगर आप अपने आप से प्यार करते हैं तो अपना काम किसी को भी कम कीमत में न बेचें – 3 सितम्बर 2014
व्यापार में भी सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं है – 2 सितम्बर 2014
