अगर आप अपने आप से प्यार करते हैं तो अपना काम किसी को भी कम कीमत में न बेचें – 3 सितम्बर 2014

कल के ब्लॉग में यह लिखने के बाद कि क्यों आपको अपने दिल का कहा मानना चाहिए न कि पैसे के पीछे भागना चाहिए, मुझे कुछ लोगों के सन्देश प्राप्त हुए हैं, जो बताते हैं कि अगर कुछ लोग अपने दिल का कहा मानने लगें तो उनकी भूखों मरने की नौबत आ जाएगी और वे एक धेला भी कमा नहीं पाएंगे। ऐसा सोचने वालों से मुझे सिर्फ यह कहना है: खुद से प्यार करना सीखें!

जी हाँ, किसी भी व्यवसाय में लगे व्यक्ति को इस प्रश्न का सामना करना ही पड़ता है: अपने काम का कितना हिस्सा मैं दूसरों के लिए करता हूँ और कितना अपने लिए? जितना मैं दूसरों के लिए करता हूँ उसकी कितनी उजरत मुझे लेनी चाहिए? और क्या मुझे यह काम मुफ्त में करना चाहिए?

स्वाभाविक ही काम के कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहाँ कोई इसकी अपेक्षा नहीं करता। फलवाले या सब्ज़ीवाले से कोई मुफ्त फल या सब्जियों की अपेक्षा नहीं करता, न ही किराने वाले से अनाज मुफ्त चाहता है। अगर आप रेल यात्रा कर रहे हैं तो वह मुफ्त नहीं होती, आप टिकिट खरीदते हैं। जब किसी ठोस वस्तु का मामला होता है तो इसका निर्णय आसान होता है। मुश्किल उनके सामने पेश आती है जो कोई वस्तु नहीं बल्कि अपनी सेवाएँ बेचते हैं। और हमेशा कोई न कोई होगा जो आपसे कम से कम पैसों में काम कराना चाहेगा या फिर बिना कुछ दिए, मुफ्त में ही!

किसी योग शिक्षक, मालिश से चिकित्सा करने वाले मसाज थेरापिस्ट या ध्यान शिक्षक से लोग अपेक्षा नहीं करते कि वह मुफ्त में उनके लिए काम करे लेकिन इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के दिल में हमेशा यह प्रश्न तो रहता ही है कि वे अपने काम की कितनी कीमत वसूल करें। और जबकि एक तरफ उन्हें मुँहमांगी रकम अदा करने वाले लोग होंगे तो दूसरी तरफ यह कहने वाले भी होंगे कि वे बहुत महंगे हैं।

एक भला व्यक्ति जो अपने काम से प्रेम करता है, चाहेगा कि वह अपना उत्पाद या सेवा मुफ्त में लोगों को दे दे। यह ठीक है और अच्छी बात है- अगर आप किसी ज़रूरतमंद की इस तरह मदद करते हैं तो यह बहुत अच्छी बात होगी। समस्या तब शुरू होती है जब आप अक्सर ऐसा महसूस करने लगते हैं और वह भी बाहरी दबावों के वशीभूत होकर कि आपको कम पैसे लेने चाहिए या मुफ्त लोगों की सेवा करनी चाहिए। और फिर ऊपर से अगर आपको अपराधबोध होने लगे!

अपने काम की कीमत जानना आवश्यक है। समान व्यवसाय में लगे लोगों से तुलना करके अपनी कीमत तय कीजिए। अपने श्रम को कम कीमत में मत बेचिए और अपने आत्माभिमान के लिए डटकर खड़े होने की हिम्मत जुटाइए! अगर कोई सोचता है कि आपको मुफ्त में काम करना चाहिए, तो उसे सोचने दीजिए। उसका कोई महत्व नहीं है- आप जानते हैं कि आपको भी जीना है, अपने खर्चे चलाने हैं और अपने श्रम और अपनी सेवा की वाजिब कीमत वसूल करने में कोई बुराई नहीं है।

अगर आप अपने आप से प्यार करते हैं तो आप जानते होंगे कि आप अपने श्रम की उचित कीमत ही वसूल कर रहे हैं। अगर आपका दिल साफ़ है तो आप कभी-कभी अपनी सेवा को पैसे के अलावा किसी और चीज़ से अदल-बदल कर सकते हैं- किसी भी ऐसी चीज़ से जो सामने वाला दे सके। बीच-बीच में आप कोई सेवा मुफ्त भी दे सकते हैं मगर किसी भी हालत में आपमें अपराधबोध पैदा नहीं होना चाहिए कि आपने अपने श्रम को मुफ्त दे दिया। अगर आप खुद से प्रेम करते हैं तो आप अपने दिल के कहे अनुसार भी चल सकते हैं और इसके बावजूद अपनी सेवा की कीमत भी मांग सकते हैं।

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