Home > Category: धन

आध्यात्मिक होने की जगह मैं भौतिकवादी होना क्यों पसंद करूँगा – 29 जनवरी 2015

धन

स्वामी बालेंदु इस प्रचलित धारणा के बारे में लिख रहे हैं, जिसके अनुसार माना जाता है कि जितना अधिक आप आध्यात्मिक होंगे उतना ही कम भौतिक वस्तुओं की आपको दरकार होगी। वे इस विचार से असहमत क्यों हैं, यहाँ पढ़िए।

अगर आप अपने आप से प्यार करते हैं तो अपना काम किसी को भी कम कीमत में न बेचें – 3 सितम्बर 2014

धन

स्वामी बालेन्दु उन व्यवसायों की चर्चा कर रहे हैं, जिनमें उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे कम से कम मेहनताने पर या बिना पैसे के कार्य करें। अगर आप ऐसे किसी व्यवसाय में हैं तो आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। क्यों? यहाँ पढ़ें।

व्यापार में भी सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं है – 2 सितम्बर 2014

धन

स्वामी बालेन्दु एक महिला की चर्चा कर रहे हैं, जो लोगों की सेवा करके अपनी आजीविका चलाती थी मगर लोग उससे कहते कि उसे अपने काम से ज़्यादा से ज़्यादा धन कमाना चाहिए: महिला समझ नहीं पाती थी कि वह क्या करे!

वैश्वीकरण के खतरे – जब सारी अच्छी चीज़ें निर्यात कर दी जाती हैं! 10 जुलाई 2014

धन

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे भारत में अच्छी गुणवत्ता वाले सामान, जैसे चावल, चाय, कॉफ़ी या आम मिलना दूभर होता है, जबकि ये सारी वस्तुएँ भारत में खूब पैदा होती हैं। कैसे इस मसले का संबंध वैश्वीकरण से है, यहाँ पढ़िए!

टमाटरों से भरपूर देश में अच्छे टमाटरों का अभाव – 9 जुलाई 2014

धन

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि ग्रान कनारिया द्वीप पर लगातार चमकते सूरज के बावजूद कैसे उन्हें अच्छे, स्वादिष्ट टमाटर प्राप्त करने में दिक्कत पेश आई!