केवल घर की सफाई ही ज़रूरी नहीं बल्कि दिमाग के कूड़े-करकट को भी निकाल फेंकना ज़रूरी है! 8 अक्टूबर 2014

मन

कल मैंने आपको बताया था कि हाल ही में हमने आश्रम के भंडार-गृहों, अलमारियों और रैकों में रखा बहुत सारा कबाड़ साफ़ किया। कुछ टूटा-फूटा पुराना सामान, जिसकी हमें अब ज़रूरत नहीं थी, फेंक दिया, कुछ कबाड़ी को बेचा और कुछ गरीबों में बाँट दिया। एक ओर जिस तरह अनुपयोगी, खराब हो चुके और पुराने भौतिक कचरे से पीछा छुड़ाना लाभप्रद है उसी तरह दिमाग में मौजूद मानसिक कचरा साफ़ करते रहना भी अत्यंत आवश्यक है!

घर में मौजूद भौतिक वस्तुओं के साथ ये होता है कि अक्सर आप यह सोचकर उन्हें इकट्ठा करते जाते हैं, संभालकर रखते हैं कि भविष्य में कभी उस वस्तु का उपयोग हो सकेगा या फिर वह आपके अतीत का हिस्सा है और उसे सहेजकर रखना चाहिए, सिर्फ इसलिए कि बाद में उन्हें देखकर पुरानी स्मृतियाँ ताज़ा हो जाती हैं या संभव है, आगे आने वाली पीढ़ी उसका कुछ उपयोग करेंगी। वास्तविकता यह होती है कि हमारे बाद आने वाले लोगों के लिए उनका कोई महत्व नहीं होता। वे आपकी पुरानी, घिसी-पिटी किताबें नहीं पढ़ते, न ही आपके पुराने विडिओ कैसेट्स पर दृष्टि डालते हैं या ऑडियो कैसेट्स पर आपका पुराना संगीत ही सुनते हैं। उनके लिए जतन से रखा आधे से अधिक सामान उनके किसी काम का नहीं होता और वे उसका उपयोग नहीं करते। खुद आप ही नहीं कर रहे होते, न करने का आपका कोई इरादा होता है! बल्कि वह घर की बहुत सी जगह घेरे रहता है या फिर इधर-उधर बिखरा पड़ा रहता है और आपको अक्सर उसकी सफाई करते रहना पड़ता है।

यही बात दिमाग में जमा बहुत सी चीजों के बारे में भी, जिन्हें आप पिछले काफी समय से सहेजकर रखते रहे हैं, उतनी ही सच है! आप अपने दिमाग में न जाने कितना कबाड़ इकट्ठा करते रहते हैं और मैं आज आपसे गुज़ारिश करना चाहता हूँ कि न सिर्फ आप अपने घर का कूड़ा-करकट साफ़ करें बल्कि अपने दिमाग में इकठ्ठा कबाड़ से भी मुक्ति पाएँ!

एक बार एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि किस तरह वह महत्वपूर्ण बातों को याद रख सकता है। मैंने जवाब दिया कि पहले आपको महत्वहीन बातों को भूलना (दिमाग से निकालना) होगा! उसके पश्चात ही उन बातों के लिए जगह बनेगी, जिन्हें आप याद रखना चाहते हैं। जी हाँ, आप अपनी याददाश्त में बहुत सी गैर जरुरी बातें भरे रहते हैं और मैं तो यह कहूँगा कि उनमें से अधिकांश कडुवी यादें होती हैं।

अक्सर लोग अपनी कटु, दुखद और कष्टप्रद यादों को सीने से लगाए रखते हैं, उनसे अलग होने की कोशिश भी नहीं करते और आदतन उनकी जुगाली करते रहते हैं और वे यादें एक तरह से उनकी आदत बन जाती हैं। काफी अन्तराल के बाद आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते हैं, जिसके साथ आपने बहुत सा अच्छा समय बिताया है लेकिन उसे देखते ही आपको याद आती है तो उसके साथ हुए झगड़े की। अतीत के उस समय को याद करते हुए आप उन सुखद पलों को, उनसे प्राप्त खुशी और शांति को याद करते हुए उस व्यक्ति से खुलकर नहीं मिलते और उन पुराने लज्जाजनक और कटु क्षणों को याद करते हुए अपने में दुबके रहते हैं। आपका दिमाग बार-बार उन्हीं मनहूस और लज्जाजनक पलों की ओर खिंचा चला जाता है और आप सोचते हैं कि सब लोग आज भी आप पर हँस रहे होंगे- जबकि वे सभी उन बातों को कब के भूल चुके होंगे!

इस मानसिक बोझ को दिमाग से निकाल बाहर कीजिए! अपने आप को, अपने दिमाग को और अपनी भावनाओं को तरोताजा और चाक-चौबंद बनाए रखिए और उन पुरानी बातों को भूल जाइए। मेरा दावा है कि आप अब भी उन पुराने मित्रों से जुड़ सकते हैं अगर आप अपनी कुछ पुरानी समस्याओं को पीछे छोड़ दें, जिन्हें आप अपने दिमाग में सालों से लिए फिर रहे हैं!

इन पुरानी कटु बातों या घटनाओं को भूलने के लिए आपको ठीक-ठीक क्या करना चाहिए, विशेष रूप से तब जब आपके न चाहते हुए भी वे बार-बार उभर आती हों?

जब आप पाएँ कि आपका दिमाग उसी दिशा में चला जा रहा है, जो अतीत की कटु और मनहूस यादें हैं और जिनसे आप मुक्त होना चाहते हैं, तो उसे ऐसा करने मत दीजिए। अपने विचारों पर लगाम लगाइए, अपने आपको रोकिए, पुरानी घटनाओं का मंथन मत कीजिए और उन्हें व्यर्थ दोहराना बंद कीजिए! मन को सकारात्मक घटनाओं की ओर मोड़िए, उसे उन पर केन्द्रित कीजिए। अच्छी यादों को दोहराते रहिए और मनहूस यादों पर अटक मत जाइए। आप नोटिस करेंगे कि समय के साथ आप उन घटनाओं को भूलते जा रहे हैं, जिन्हें आप दोहराते नहीं हैं और आप बेहतर महसूस करेंगे!

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