स्वप्न: जानकारियों का अलौकिक स्रोत या आपके अवचेतन में हो रही हलचलों का बिम्ब-04 जून 2013

कल उस हास्यास्पद व्यक्ति के बारे में बताते हुए, जो दावा करती थी कि उसने एलियंस के साथ संभोग किया है, एक बात बताना मैं भूल गया था: उसने यह भी कहा था कि “स्वप्न दरअसल स्वप्न नहीं होते। यह बात बहुत से आध्यात्मिक, धार्मिक और रहस्यवादी लोग भी मानते हैं। आज मैं सपनों के बारे में विभिन्न लोगों के विभिन्न विचारों के आलोक में अपनी बात रखता हूँ।

सपनों के बारे में सबसे पहले कल वाली साइकिक महिला के वर्णन से शुरू करते हैं: स्वप्न देखना यानी बिना आपको डराए, मित्रवत आपको अपने कर्मों की जानकारी देना। उसका विश्वास है कि आपका मस्तिष्क बाहर निकलकर ब्रह्मांड में मौजूद दूसरी आत्माओं या एलिएन्स के साथ अन्तरिक्ष में विचरण करने लगता है जब कि पूरे समय आपका शरीर आराम कर रहा होता है। क्योंकि समान्यतः लोग किसी एलिएन का सामना करने से डरते हैं, मस्तिष्क हमें विश्वास दिलाता है कि यह तो स्वप्न था।

ठीक! मैं मानता हूँ कि मेरी नज़र में सपनों के स्पष्टीकरण का यह कोई गंभीर प्रयास नहीं है। इस विचार के विरुद्ध सबसे आसान तर्क तो यही है कि सपनों में हम हमेशा एलिएन्स को ही नहीं देखते; दूसरी सामान्य वस्तुओं को भी देखते हैं। तो अगर आप ऐसा सपना देखते हैं, जिसमें आप अपने पूर्व प्रेमी को उसकी माँ के साथ व्यस्त बाज़ार में घूमता देखते हैं और अचानक आपको पता चलता है कि आप नंगे हैं तो इस घटना को वास्तविक रूप से हुआ नहीं माना जा सकता!

दूसरे बहुत से लोग कहते हैं कि आत्मा आपके पिछले जन्मों की और भविष्य में होने वाले आपके पुनर्जन्म की सम्पूर्ण जानकारी रखती हैं, इसलिए जब आत्मा के साथ आपका संपर्क हो जाता है, आप सपने देखना शुरू कर देते हैं। कुछ दूसरे कहते हैं कि सपने तब आते हैं जब आपका आत्मा के साथ, जो आपके भूत और भविष्य के बारे में सब कुछ जानती है, सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। वे कहते हैं कि आप अपने पिछले जन्म की जानकारी उससे प्राप्त कर सकते हैं और उस जानकारी का उपयोग अपने वर्तमान को सुधारने में कर सकते हैं। क्योंकि, उनके मुताबिक, समय और अन्तरिक्ष का कोई अस्तित्व नहीं है, आप अपना भविष्य भी देख सकते हैं और जो होने वाला है उसके बारे में नसीहतें भी प्राप्त कर सकते हैं जिससे उनसे बचने में आपको मदद मिल सकती है।

मैं इनमें से किसी बात पर भी विश्वास नहीं करता। मैं नहीं समझता कि हममें से कोई भी भविष्य को जान सकता है, सपनों में भी नहीं, और मैं अब पुनर्जन्म में भी विश्वास नहीं करता, इसलिए मैं नहीं समझता कि आप अपने स्वप्न में पिछले जन्म को देख सकते हैं!

स्वप्नों के बारे में फिर मैं क्या सोचता हूँ? मैं बेहद बोरिंग और मनोचिकित्सकों और निद्रा विशेषज्ञों द्वारा इस बारे में दिये गए स्थापित उत्तरों पर विश्वास करता हूँ कि आपका अवचेतन आपकी निद्रावस्था में भी काम करता रहता है और आपके जागृतवस्था में प्राप्त करोड़ों अनुभवों और अहसासों का विश्लेषण करता रहता है। जब आप एक सेब देखते हैं तब आप सिर्फ सेब नहीं देखते बल्कि उसके बारे में बहुत सारी दूसरी जानकारियाँ भी मस्तिष्क इकट्ठा करता रहता है। सेब लाल है और उस पर थोड़े से पीले धब्बे भी हैं क्योंकि वहाँ सूरज की रोशनी नहीं पहुंची। यह जानकारी आपने बचपन में किताबों में पढ़ी थी; आपको पिताजी ने पढ़कर सुनाया था। सेब गोल होता है, उसकी मीठी, भीनी सुगंध होती है, उसके भीतर काले बीज होते हैं, वगैरह, वगैरह। एक पल में इतना सारा आपके मस्तिष्क में गूंज उठता है। स्वाभाविक ही मस्तिष्क को दिन भर में आपके साथ होने वाली इतनी सारी बातों का विश्लेषण करने में समय लगता है! मैं विश्वास करता हूँ कि जब आप सोए हुए होते हैं तो आपका मस्तिष्क यही काम कर रहा होता है और इन्हीं बातों के बिम्ब आप अपने स्वप्न में देखते हैं।

जागृतावस्था में जब कोई घटना ज़्यादा उत्कट होती है उस समय, जाहिर है, मस्तिष्क ज़्यादा क्रियाशील हो उठता है और उसे विश्लेषित करने में मस्तिष्क को अधिक तेज़ कार्य भी करना पड़ता है और आप स्वप्न ज़्यादा गहनता से देखते हैं। इसका अर्थ यह कतई नहीं हो सकता कि जो भी ऊलजलूल आप सपनों में देखते हैं, यथार्थ हो सकता है- अन्यथा आपको अपने प्रेमी और उसकी माँ के सामने नंगा खड़ा होने के लिए तैयार हो जाना चाहिए!