यथार्थ से कोसों दूर अपने निजी यथार्थ का निर्माण – 17 मार्च 2015

कल मैंने आपको कल्पना और विश्वास की शक्ति के बारे में बताया था कि कैसे आप उसके प्रभाव में अपना एक निजी विश्व निर्मित कर लेते हैं और कैसे आपके आसपास के दूसरे लोग भी ऐसा ही कर रहे होते हैं। इसकी पूरी संभावना होती है कि आपकी यह फंतासी आपके लिए कोई निजी यथार्थ निर्मित कर दे लेकिन उसके साथ एक बड़ा खतरा भी होता है: उस यथार्थ के साथ आप एक सीमा तक ही चल सकते हैं अन्यथा, उस सीमा का अतिक्रमण करने के पश्चात आपको नुकसान पहुँच सकता है, आप बीमार पड़ सकते हैं, यहाँ तक कि आप चारों ओर से मानसिक द्वंद्व में घिर सकते हैं।

दुर्भाग्य से अध्यात्मवादी और धार्मिक दोनों तरह के लोगों के साथ ऐसा होते मैंने कई बार देखा है। वे अपनी एक निजी दुनिया बना लेते हैं, लेकिन ऐसी कल्पनाओं की सहायता से, जो भौतिकी के नैसर्गिक नियमों का पालन नहीं करते। वे वायवी दुनिया में रहते हैं और अक्सर यह नहीं जानते कि उनकी आस्था यथार्थ नहीं है, वह गलत या झूठ सिद्ध हो चुकी है। वे अपनी दुनिया में खो जाते हैं, यहाँ तक कि ऐसी-ऐसी बातों का दावा करते हैं, जिन्हें दूसरे जानते हैं कि वास्तव में वे बातें गलत या झूठ सिद्ध हो चुकी हैं।

यहीं आकर यह खतरनाक हो जाता है। यह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता कि आप आत्मा, किसी ऊर्जा, किसी ईश्वरीय शक्ति या फरिश्तों पर विश्वास रखते हैं। यह आपके लिए अच्छा हो सकता है, आपका विश्वास या आस्था आपमें आत्मविश्वास भर सकती है या आपके अंदर संकल्पशक्ति का संचार कर सकती है। यहाँ तक कि वह कुछ शारीरिक समस्याओं से भी आपको निजात दिला सकती है। आपको इतना ही ध्यान रखना है कि उसे अधिक दूर तक न ले जाएँ। जी हाँ, ध्यान, किसी शक्ति की सजीव कल्पना और सकारात्मकता या प्रार्थनाएँ आपको शारीरिक पीड़ा या सिरदर्द जैसी तकलीफ़ों को बेहतर तरीके से झेलने और सहन करने की शक्ति प्रदान कर सकती हैं लेकिन जब आपकी हड्डी टूट जाती है तब आपके पास किसी डॉक्टर को दिखाने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता।

मैं जानता हूँ कि आजकल ऐसे लोग भी मिल जाते हैं जो ‘आध्यात्मिक शल्यक्रिया’ करते हैं और दावा करते हैं कि इस शल्यक्रिया से शरीर के किसी अंग को काटे बगैर, चाक़ू चलाए बगैर, यहाँ तक कि त्वचा में किसी तरह का चीरा लगाए बगैर वे शल्यक्रिया करते हैं। ये लोग अपने 'मरीज़' को अपनी चमत्कारिक शक्तियों से ठीक करने का विश्वास दिलाने में कामयाब हो जाते हैं परन्तु वास्तव में वे मुर्गी के रक्त का इस्तेमाल कर रहे होते हैं और ऐसा नाटक करते हैं कि मरीज उसे अपना ही रक्त समझता है। वास्तव में यह खतरनाक है क्योंकि वे इलाज के लिए किसी पढ़े-लिखे, पंजीकृत डॉक्टर के पास नहीं जाते!

बहुत से लोग दूसरों से न सिर्फ धोखा खाते हैं बल्कि उन बहुत सी हवाई बातों पर भरोसा भी करने लगते हैं। इस चमकीली फंतासी के अतिरिक्त वे परियों, जिन्नों, फरिश्तों और ईश्वरीय शक्तियों की दुनिया में खो जाते हैं। उनकी दुनिया हैरी पॉटर या लॉर्ड ऑफ़ द रिंग की फंतासियों, कभी पढ़ी या सुनी गई गुह्य किंवदंतियों और प्रवचनों और स्वाभाविक ही, विभिन्न देशों के धार्मिक मिथकों और आख्यानों का मिला-जुला रूप होती है! अपनी दुनिया में उन्हें चीज़े स्याह-सफ़ेद नज़र आती हैं, कुछ सिर्फ अच्छी या भली शक्तियाँ होती हैं तो कुछ बुरी और शरीर से उन बुरी शक्तियों को निकाल बाहर करना लक्ष्य होता है, जिनके कारण आप बीमार पड़े हुए हैं और जो दुनिया भर में फैली बुराइयों की जड़ है।

कुछ लोगों के लिए यह दिमागी बीमारियों का रास्ता सिद्ध होता है। उनकी वायवीय, दुनिया यथार्थ दुनिया से, जिसकी कुछ मूलभूत वास्तविकताएँ हैं, जिनके कुछ भौतिक नियमों, सिद्धांतों और तथ्यों को हम सब मानते हैं और जिनकी हम उपेक्षा नहीं कर सकते, भटककर बहुत दूर निकल गई है! वे हवा में तैर रहे हैं और जिसे हम सब यथार्थ कहते हैं, उससे उनका रत्ती भर संबंध नहीं रह गया है। वे भ्रमित हैं और उन आवाज़ों को सुनते हैं, जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है, उन खतरों को महसूस करते हैं जो कहीं हैं ही नहीं। वे उन चीजों से भयग्रस्त हो जाते हैं जो उनकी कल्पना में बसती हैं, उनकी हवाई दुनिया में मौजूद हैं।

यह शारीरिक और मानसिक रूप से उनके लिए नुकसानदेह है कि वे यथार्थ से दूर अपनी काल्पनिक दुनिया में खोए रहें, अपनी आस्थाओं और अपनी मनगढ़ंत सृष्टि में विचरते रहें और वस्तुगत तथ्यों की उपेक्षा करें। यथार्थ जिसमें हम सब शरीक हैं, वह नहीं, जिसे आपने अपनी कल्पना में रचा है! जब भी आप यथार्थ से अलग किसी दूसरी बात पर विश्वास करते हैं, जब आप निर्णय करते हैं कि वस्तुगत जगत से अलग किसी दूसरी कल्पना पर आस्था रखने लगें तब कृपया इस बात का खयाल रखें। अपने दोनों पैर ज़मीन में मजबूती के साथ जमाकर रखें, वास्तविक दुनिया में निवास करें!

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