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एक-दूसरे के प्रति दिमाग खुला रखना – मैं और मेरी पत्नी किस तरह एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं – 19 मार्च 2015

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स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि दिमाग को कम से कम अपने जीवन के सबसे ख़ास व्यक्ति के लिए खुला रखना कितना महत्वपूर्ण है: अपने जीवन साथी के लिए। उनके अनुभव यहाँ पढ़िए।

अपने दिमाग के दरवाजे दूसरों के लिए खुले छोड़ देने के खतरे – 18 मार्च 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जब आप अपने विचारों को ऐसे लोगों के सामने रखते हैं, जो उनका निर्वाह ज़िम्मेदारी के साथ नहीं करते तो यह कितना खतरनाक हो सकता है।

यथार्थ से कोसों दूर अपने निजी यथार्थ का निर्माण – 17 मार्च 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि वास्तविक संसार के नैसर्गिक नियमों की अनदेखी करते हुए अपनी आस्थाओं और कल्पनाओं के आधार पर अपना एक अलग संसार रच लेना, शारीरिक और मानसिक रूप से आपके लिए कितना घातक हो सकता है।

आप अपना एक निजी विश्व रचते हैं – प्लासिएबो इफैक्ट और खुशी के लिए! 16 मार्च 2015

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स्वामी बालेंदु इस संभावना के बारे में लिख रहे हैं कि आप अपनी चिंतन-प्रक्रिया, कल्पनाओं और विश्वासों से अपने एक निजी विश्व का सृजन करते हैं। इस विषय में उनके विचार यहाँ पढ़ें।

पुरानी परम्पराओं और धार्मिक रूढ़ियों की जकड़न से अपने मस्तिष्क को आज़ाद कीजिए! 9 अक्टूबर 2014

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों धार्मिक विश्वासों, परंपरागत व्यवहारों और सांस्कृतिक मूल्यों को भी कभी-कभी साफ करना ज़रूरी है!

केवल घर की सफाई ही ज़रूरी नहीं बल्कि दिमाग के कूड़े-करकट को भी निकाल फेंकना ज़रूरी है! 8 अक्टूबर 2014

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे लोग अपने दिमाग में कचरा इकट्ठा करते चले जाते हैं। क्यों और कैसे इस कचरे की सफाई की जानी चाहिए, यहाँ पढिए।

सपनों में संदेश ढूँढ़ने की कोशिश मत कीजिए – 05 जून 2013

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों आज देखे जाने वाले सपनों में भविष्य के लिए कोई संदेश ढूंढ़ना व्यर्थ है। अपनी पत्नी द्वारा देखे गए एक स्वप्न का उदाहरण देते हुए वे इसे समझा रहे हैं।

स्वप्न: जानकारियों का अलौकिक स्रोत या आपके अवचेतन में हो रही हलचलों का बिम्ब-04 जून 2013

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स्वामी बालेंदु स्वप्न के विषय में लोगों की विभिन्न मान्यताओं, जैसे कि स्वप्न कहाँ से आते हैं और उनका क्या अर्थ होता है, की चर्चा कर रहे हैं।