ध्यान कोई कला नहीं है लेकिन ध्यान का प्रदर्शन करने वाले कलाकार अवश्य हैं! 12 नवंबर 2013

ध्यान

कल मैंने बताया था कि क्यों अपने मस्तिष्क को पूरी तरह रिक्त कर पाना या कुछ भी न सोचना असंभव है, जबकि लोग इसे ही ध्यान का लक्ष्य मानते हैं। आज मैं कुछ लोगों द्वारा इसी ध्यान की सहायता से प्राप्त उपलब्धियों के बारे में लिखना चाहता हूँ। लेकिन मैं यह भी बताऊंगा कि कैसे ये लोग सिर्फ कलाकार हैं, ध्यान-योगी नहीं।

मुझे विश्वास है आप लोगों ने भी इस तरह के चमत्कार अवश्य देखे होंगे, कम से कम टीवी पर तो अवश्य: एक व्यक्ति लोहे की मोटी राड को अपने हाथों से मोड़ देता है, एक महिला बहुत सी ईंटों को खड़ी हथेली से एक ही वार में चूर-चूर कर देती है या एक आदमी रस्सी बांधकर अपने दांतों से एक ट्रक को खींच लेता है। अति-एकाग्रता की ताकत से ऐसे कई और रेकार्ड-तोड़ करिश्मे किए जाते हैं और ध्यान-योगी गुरु इन करिश्मों के बारे में दावा करते हैं कि यह ध्यान-योग की ताकत से ही किया जा सकता है! इसके पीछे उनका सिद्धान्त यह होता है कि आप अपनी सारी ऊर्जा को एक बिन्दु पर एकाग्र कर लेते हैं, जहां से उसका मनचाहा उपयोग किया जा सकता है और इस शक्ति से अतिमानवीय और अलौकिक कामों को भी अंजाम दिया जा सकता है!

मैं इस बात को नहीं मानता। मैं इन करामातों में किसी आध्यात्मिक या यौगिक शक्ति का हाथ नहीं देखता। यह एक प्रदर्शन है, शायद इन लोगों का धंधा और इसमें कोई बुराई नहीं है। यह, मेरी नज़र में एक तरह की कला है। आप इसका अभ्यास करते हैं और ऐसी उपलब्धि प्राप्त कर लेते हैं जो हर कोई प्राप्त नहीं कर सकता। आप अभ्यास के उस मरहले पर पहुँच चुके हैं जो आपको ऐसा कुछ अनोखा करने की योग्यता प्रदान करता है, जो लोगों को अचंभित करता है।

अब अगर आप कहेंगे कि यह योग के चलते है तो मैं आप से सहमत नहीं हो सकता। मैं यह भी नहीं कहुंगा कि ये लोग ध्यान-योग नहीं सीखते। सीखते होंगे लेकिन सिर्फ ध्यान को ही पूरा श्रेय देकर आप इन मेहनतकशों के अभ्यास और लगन के साथ अन्याय करते हैं और ध्यान-योग को इतना महिमामंडित कर देते हैं, जैसे ऐसे मुश्किल और अभूतपूर्व कारनामे वे कर पा रहे हैं तो सिर्फ ध्यान-योग के बल पर! सिर्फ वही ऐसे कारनामे अंजाम दे सकते हैं, जिन्होंने सालों हिमालय की गुफाओं में ध्यान का अभ्यास किया हो, जो किसी खास परिवार में पैदा हुए हों और जिन्होंने अतींद्रिय शक्तियाँ प्राप्त कर ली हों। जिन्हें बोध हो चुका हो। जिन्हें ज्ञान प्राप्त हो चुका हो। ऐसा प्रचार करके आप लोगों को यह संदेश देते हैं: ये लोग महान लोग हैं और ध्यान-योग की वर्षों की तपस्या के बाद इस ऊंचाई पर पहुंचे हैं और सामान्य लोगों के लिए ऐसे कामों को अंजाम देना यानी ध्यान की इस अवस्था को प्राप्त करना लगभग असंभव है।

जब भी आप लोगों को ऐसा कहते सुनें या इस दिशा में आपको इंगित करने की कोशिश करता हुआ पाएँ तो आप देखेंगे कि वे आपको ध्यान-योग के अपने तरीके की ओर मोड़ना चाहते हैं, जिससे आप उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उनकी सलाह खरीदने के इच्छुक हों। जब भी आप योग के माध्यम से शक्तिशाली या अधिक कार्यक्षम बनने की अभिलाषा व्यक्त करेंगे, आप ऐसे गुरुओं को अपने मार्गदर्शन के साथ उपस्थित पाएंगे। वे आपको अपने इच्छित कामों को अंजाम देने की शक्ति प्रदान करने का दावा करेंगे, यहाँ तक कि अलौकिक शक्तियां उपलब्ध कराने का भी, बशर्ते आप कुछ अतिरिक्त श्रम कर सकें, लगन के साथ प्रयास करें।

लेकिन मैं उनसे सहमत नहीं हो सकता।

ध्यान-योग कोई कला नहीं है, जिससे इच्छित लाभ पाने के लिए या जिसका अभ्यास करने के लिए आपको बहुत श्रम करना पड़े। ध्यान कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जिसे सिर्फ कुछ चुने हुए लोग ही कर सकते हों। ध्यान सबके लिए है और जबकि वह आपके मस्तिष्क को एकाग्र करने में सहायक हो सकता है, वह ऐसी चीज़ नहीं है जिसका सड़क पर या स्टेज पर किसी शो में प्रदर्शन किया जाए।

कल आपको विस्तार के साथ बताऊंगा कि मैं स्वयं ध्यान के बारे में क्या सोचता हूँ।

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