ध्यान कैसे करें-एक ऐसी चीज़ का मार्गदर्शक (गाइड) जिसके लिए मार्गदर्शन की ज़रूरत ही नहीं है- 14 नवंबर 2013

ध्यान

कल मैंने कहा था कि सभी व्यक्ति ध्यान कर सकते हैं। आज मैं उसी बात को ज़रा विस्तार देते हुए ध्यान के संबंध में कुछ हिदायतें और सलाहें देना चाहता हूँ। बात अनोखी लगती है, न? लेकिन मैं मानता हूँ कि विचारशून्यता ध्यान करने का सही लक्ष्य नहीं है और फिर ध्यान आप इसलिए नहीं करते कि आप किसी असंभव लक्ष्य को प्राप्त कर सकें। लेकिन संभव है, कुछ लोग ऐसे भी हों, जो सोच रहे होंगे कि "किसी क्रिया में पूरी तरह उपस्थित" होने का अर्थ क्या है और उसे कैसे हासिल किया जा सकता है।

मेरे विचार में विचारशून्यता प्राप्त करना असंभव है इसलिए उस स्थिति को प्राप्त करने का प्रयास ही व्यर्थ है। लेकिन किसी खास वक़्त पर "अपने काम में पूरी तरह उपस्थित" रहने के लिए आपको आसपास के सारे शोर को अपने कानों से दूर रखना होगा। आपके भीतर प्रवेश करने वाली चीजों को कम से कमतर रखने का प्रयास करना होगा और इसका अभ्यास करना होगा कि आपके मस्तिष्क को अधिकांश बातों का विश्लेषण करने की आवश्यकता ही न पड़े। अपने मस्तिष्क को सिर्फ एक काम पर एकाग्र करने का प्रयास करें। सभी विचार उसी एक काम के विषय में हों। अब आप इन विचारों के विषय में लगभग अनभिज्ञ रहेंगे क्योंकि वे आपके काम के साथ इस तरह घुलमिल जाएंगे कि आप उस काम पर बेहतर तरीके से एकाग्र हो पाएंगे और सहज ही आपकी रचनात्मकता बढ़ जाएगी तथा थकावट भी नहीं होगी।

क्या आपको इसमें कोई दिक्कत महसूस हो रही है? अगर हो रही है तो आश्चर्य नहीं है क्योंकि जैसा मैं बता रहा हूँ, अधिकांश लोग अपने व्यस्त दैनिक जीवन में उससे बिलकुल विपरीत कर रहे होते हैं। उनके दिमाग में हर वक्त एक साथ कई काम घूमते रहते हैं! विभिन्न विषयों पर कई माध्यमों से आने वाली जानकारियों को ग्रहण करना महत्वपूर्ण होता है, इन सभी जानकारियों को एक साथ विश्लेषित कर पाने की ऊंची कीमत है और जितनी कुशलता से विभिन्न जगहों से आती हुई इन जानकारियों को आपका मस्तिष्क ग्रहण और विश्लेषित कर पाता है उतना ही आपको प्रतिभाशाली माना जाता है। लेकिन, दरअसल ऐसी परिस्थिति में ही आपको "किसी क्रिया में पूरी तरह उपस्थित" हो पाने की इस योग्यता की आवशयकता पड़ती है! अगर आप समझते हैं कि आपको इसके अभ्यास के लिए कुछ व्यायामों की आवश्यकता है तो मैं नीचे कुछ व्यायाम बता रहा हूँ, जिन्हें अपने सेमीनारों और कार्यशालाओं के जरिये मैंने दुनिया भर में सफलतापूर्वक आजमाया है:

एक पेन और कागज लें और एक अलार्म क्लॉक को तीन मिनट के लिए सेट कर दें। अब उन तीन मिनटों में जो भी विचार आपके मन में आ रहे हैं, उन्हें संक्षिप्त में (keywords में) नोट करते जाएँ। इस बात का विचार बिल्कुल न करें कितने विचार आने चाहिए और कागज पर पूरे-पूरे वाक्य लिखने की ज़रूरत नहीं है, उनके पहले शब्द या अक्षर भी पर्याप्त होंगे, जिनसे आप बाद में उन विचारों को याद कर सकेंगे। तीन मिनट बाद रुक जाएँ।

इस लिस्ट पर नज़र दौड़ाने पर आप पाएंगे कि शायद आपके मस्तिष्क में एक साथ बहुत ज़्यादा विचार आते हैं! अधिकतर बिल्कुल गैरज़रूरी होते हैं और आपकी लिस्ट ऐसी नज़र आती होगी: पार्टनर (जीवन-साथी), बच्चे, बढ़िया सप्ताहांत, टमाटर सौस के धब्बे, काम, बर्तन धोने का साबुन, पिछड़ गई योजनाएँ, धोने वाले कपड़ों का अंबार, पड़ोसी की बिल्ली…. और मच्छर!…

इनमें से उन्हें काट दें जो बिल्कुल गैरज़रूरी विचार हैं और सिर्फ दस महत्वपूर्ण विषयों को विचार करने के लिए रखें। इसी खेल को फिर दोहराएँ और अब सिर्फ इन्हीं दस विचारों पर अपने ध्यान को केन्द्रित करने की कोशिश करें-मस्तिष्क पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें कि वे इधर-उधर भटकने न पाए। क्या कुछ बात बनी? अब फिर से कम महत्वपूर्ण पाँच विषयों को बाहर करें और बचे हुए पाँच पर ध्यान केन्द्रित करने का प्रयास करें। इसी प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ जब तक आपके पास सोचने के लिए सिर्फ एक विषय ही न रह जाए! तब आप "अपने काम में पूरी तरह उपस्थित" होंगे!

स्वाभाविक ही यह व्यायाम आप शांतिपूर्वक एक स्थान पर बैठकर करेंगे, ध्यान के लिए जिसकी अनिवार्यता मैंने पहले ही खारिज कर दी है। लेकिन एक बार इस तरह एकाग्र होकर, ध्यान भंग करने वाले विचारों को दूर रखने का अभ्यास हो जाने पर आप यही चीज़ खाना बनाते हुए या टहलते हुए या मित्र के साथ बात करते हुए भी कर सकते हैं। पुस्तक पढ़ते समय बरतन धोने के साबुन का विचार मन में न आने दें! फिर साबुन खरीदते समय उस पुस्तक का विचार न करें! यह सुनिश्चित करें कि जब आप पढ़ें तो पूरी सजगता के साथ पढ़ें-तब आप पुस्तक ज़्यादा आनंद उठा पाएंगे! और जब ख़रीदारी करें तो पूरी सजगता के साथ ख़रीदारी करें-इससे आप भूलेंगे नहीं कि आपको क्या-क्या चीज़ें खरीदनी है और आपको बार-बार बाज़ार नहीं जाना पड़ेगा! वह आनंददायक होगा क्योंकि आप "उस क्रिया में पूरी तरह उपस्थित" होंगे!

कोशिश कीजिए, आप नोटिस करेंगे कि इस उपाय से सफलता मिलती है। ध्यान करने का यह तरीका समय का बेहतर उपयोग करने में आपकी मदद करता है, आप उस पल को महसूस कर सकेंगे और देखेंगे कि काम कोई भी हो, आप उसमें बहुत एकाग्रता के साथ प्रवेश कर पा रहे हैं!

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