आपकी सगाई की पार्टी में आपका स्वागत है! – 27 अप्रैल 2012

विवाह

तयशुदा विवाहों का विषय बाहर से आने वाले उन लोगों के लिए खासा रुचिकर होता है जो हमारे देश और हमारी संस्कृति के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी हासिल करना चाहते हैं। इसीलिए अक्सर भोजन के दौरान यह विषय चर्चा में होता है। ऐसे ही एक बार बात हो रही थी और किसी ने यह किस्सा सुनाया जो, मैं समझता हूँ, आपके साथ साझा करने योग्य है।

हमारे यहाँ एक मेहमान आईं जो दिल्ली में अपने एक मित्र से मिलने भारत आईं थीं। उसकी एक मुंबई की मित्र थी जिसके साथ उसने न्यूयॉर्क में पढ़ाई की थी। जब वे पढ़ रहे थे तब वह लड़की छुट्टियों में अपने अभिभावकों से मिलने आई। मुंबई हवाईअड्डे पर आशानुरूप उसके परिवार के लोग उसे लेने आए थे। लेकिन घर जाने की जगह वे लोग सीधे एक विशाल समारोह स्थल पर पहुंचे। वे लड़की के लिए खूबसूरत उल्लासयुक्त वस्त्र लेकर आए थे और उन्होंने लड़की से कपड़े बदलकर उसे पहनने के लिए कहा। जब उसने पूछा कि मामला क्या है और हम कहाँ आए हैं तो उसे स्तंभित करने वाला जवाब मिला कि वे उसकी सगाई के समारोह में आए हैं!

आप कल्पना कर सकते हैं कि वह कितना हैरान-परेशान हुई होगी। लेकिन वह साहसी लड़की थी और उसने सबके सामने घोषणा कर दी कि वह एक अजनबी के साथ किसी भी हालत में विवाह नहीं कर सकती भले ही उसके माँ-बाप ने उसे पसंद किया हो। उसने टॅक्सी पकड़ी और पहली फ्लाइट से न्यूयॉर्क वापस रवाना हो गई।

स्पष्ट है कि उसके माँ-बाप बुरी तरह लज्जित हुए और उसके निर्णय पर बहुत खफा। कुछ दिन लड़की के साथ उनके संबंध खराब रहे मगर फिर धीरे-धीरे सब ठीक हो गया। उस समय लड़की की उम्र 30 साल थी और उसके अभिभावक यह आशा छोड़ चुके थे कि वह कभी अपने लिए कोई योग्य साथी ढूंढ पाएगी।

मगर अंततः उसे एक सुयोग्य वर मिला और जब उसने अपने माँ-बाप को बताया तो वे यह सुनकर बेहद खुश हुए। उन्होंने दिल्ली में विवाह का आयोजन किया और हमारी मित्र समारोह से पहले कुछ समय विश्रांति के लिए हमारे आश्रम आई थी।

हमें यह किस्सा बहुत अच्छा लगा क्योंकि यह बताता है कि एक युवा इतना साहस दिखा सकता है कि अपनी पुरानी रूढ़ियों को तोड़ सके। उसके अभिभावकों को पहले थोड़ा दुख होगा लेकिन वे भी धीरे-धीरे समझ जाएंगे कि 20 साल से ऊपर की एक युवा महिला की अपनी इच्छाएँ होती हैं, सपने होते हैं और यह भी कि वह स्वयं अपना साथी चुनने में सक्षम होती है।

लेकिन यह भी सोचें कि अधिकतर लड़कियां ऐसी होती हैं जो ऐसा साहस नहीं दिखा पातीं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि अभिभावकों ने कोशिश की मगर यह दुखद तो है।

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