दूसरे देशों से आए विदेशियों के लिए आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) के बारे में जानना बहुत रुचिकर होता है और रमोना और मैं उसी के बारे में बात कर रहे थे। यह उनके लिए मनोरंजक होता है क्योंकि वह इतना अलग, पुरातन और अजीब सा है। तो हम लोग बात कर रहे थे कि अभिभावक कैसे अपनी लड़कियों के लिए जीवन साथी की तलाश करते हैं। कितने सवाल लड़के के अभिभावकों से पूछे जाते हैं और कितने और कैसे कैसे सवाल लड़की के अभिभावकों से? और यह भी कि पता नहीं कितने और बिंदुओं पर आकर यह विवाह या तो उलझ सकता है या फिर सब बातों पर सहमति बन जाए तो विवाह तय भी हो सकता है।
बातों बातों में रमोना ने कहा कि ये सब तो मवेशी बाज़ार जैसा लगता है। और वह ठीक कह रही है। किसी लड़के का पता चलते ही अभिभावक उस संभावित जोड़े के माता-पिता से बात करते हैं। कभी कभी लड़के के अभिभावक लड़की के घर जाते हैं। फिर वे उसकी हर तरह से जांच परख करते हैं, वह कैसी दिखती है, उसका रंग कैसा है, कितनी ऊंची है, उसमें किसी तरह की खामी तो नहीं है। अगर वे लड़की में कोई खामी नहीं देख पाते तो वे अपने लड़के के लिए उसे चुन लेते हैं। मगर कल्पना करें कि अगर लड़की काली हुई? या अगर उसके वस्त्र उन्हें नहीं भाए या उसकी चाल ठीक नहीं है तो फिर? फिर यह ऐसा हो जाता है जैसे वे कोई जानवर खरीदने निकले हों और उसमें खामियाँ हैं इसलिए वे उसे नहीं खरीदेंगे। अब विवाह नहीं हो सकता।
वे गहराई तक नहीं देख पाते! एक घंटे की मुलाकात में वे उसके बारे में कितना जान सकते हैं? उसके मन की थाह तो वे बिल्कुल नहीं पा सकते। जीवन साथी तलाश करने का यह बहुत बेहूदा तरीका है। मैंने इसके बारे में कई बार लिखा है और यह बड़ा दुखद है।
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