अभी-अभी शादी और तुरंत उदासी! 30 साल से शादीशुदा, फिर भी हैं गमजदा!-25 अप्रैल 2013

विवाह

रमोना और मुझे वृंदावन में रहते हुए काफी समय हो गया और इस बीच हमने कोई लंबी यात्रा नहीं की है। शायद किशोरावस्था के बाद से बिना यात्रा किए यह सबसे लंबा अंतराल है-अगर आप मेरे गुफा में बिताए गए समय के अंतराल को छोड़ दें! इस बीच मुझे अपने पुराने मित्रों से संपर्क का और भारत में कई नए मित्र बनाने का मौका मिला। जहां यह बड़ा सुखद है वहीं यह बात मुझे उदासी से भर देती है कि एक भी व्यक्ति मुझे ऐसा नहीं मिला जो अपने रिश्ते से प्रसन्न हो।

मैं युवाओं से, बुज़ुर्गों से मिला और उन लोगों से मिला जो उम्र के लिहाज से इन दोनों के बीच में आते हैं। आम तौर पर लोग जानते हैं कि प्रेम और आपसी संबंध ऐसे विषय हैं जिनके बारे में मैं अक्सर लिखता रहता हूँ इसलिए वे भी अपने व्यक्तिगत अनुभव मुझसे साझा करके प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। मैं कह सकता हूँ कि वह चर्चा आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) के बारे में कोई अच्छी छाप नहीं छोडती!

मेरे कुछ मित्र हैं जिनका विवाह हुए अभी एक या दो साल ही हुए हैं, जिनकी वैवाहिक ज़िंदगी अभी ताज़ा और जवान है मगर जो अभी से यह शक ज़ाहिर करते हैं कि विवाह कोई अच्छा विचार है, जैसा कि विवाह से पहले वे सोचा करते थे। समाज में अपनी नई स्थिति, यह सच्चाई कि अब वे शादीशुदा हैं और यह भी कि अब वे कानूनी रूप से और सामाजिक स्वीकृति के साथ यौन संबंध स्थापित कर सकते हैं, इन सब बातों की उत्तेजना थोड़े समय तक उन पर तारी रही फिर रोज़मर्रा का जीवन उन पर असर दिखाने लगा। अपने साथी के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए उन्हें अपनी कुछ स्वतंत्रताएँ खोनी पड़ीं। शायद वजहें थीं, संयुक्त परिवार की समस्याएं, परिवार के सदस्यों के बीच के आपसी विवाद और तनाव या खुद दोनों के बीच की आपसी लड़ाइयाँ। एक खास तरह की दिनचर्या शुरू हो गई और उन्होंने महसूस किया कि दूसरा उतना परिपूर्ण और निर्दोष नहीं है जितना वह अपने सपनों में देखा करते थे।

कुछ दूसरे मित्र हैं जो विवाह के मामले में कुछ साल वरिष्ठ हैं, स्कूल जाने वाले या किशोर वय के बच्चों के अभिभावक हैं। इन्होंने अपने रोज़मर्रा के ऐसे मामलों के साथ भी तालमेल बैठा लिया है जिनकी कोई संगति नहीं है। वे जानते हैं कि वे दोनों बिल्कुल भिन्न प्रकृति वाले लोग हैं लेकिन उन्होंने इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया है और इसके चारों ओर उनका जीवन सरकता रहता है, यह कोशिश करते हुए कि उनकी भिड़ंत न हो, यानी वे साथ में कोई काम न करें। अपने कर्तव्यों का उन्हें भान है, उनके परिवार की और समाज की उनसे क्या अपेक्षाएँ हैं यह वे अच्छी तरह जानते हैं और कोशिश करते हैं कि उन अपेक्षाओं पर वे खरा उतरें। लेकिन इतना ही। वे अपने बच्चों से बहुत अधिक प्रेम करते हैं, लेकिन एक दूसरे के लिए उनके दिल में सिर्फ यह सच्चाई है कि उन्हें साथ रहना है, बस, इससे ज़्यादा उनके बीच कुछ नहीं होता। अगर किसी कारणवश दोनों के बीच झगड़े की नौबत आ ही जाती है तो छोटी से छोटी अप्रिय बात का ज़िक्र करते हुए एक दूसरे पर दोष मढ़ा जाता है! ये लोग पूरी तरह एक दूसरे से विरक्त और निराश हो चुके हैं और विवाहित होने और समझदार बच्चों के माता-पिता होने के कारण इसी तरह घिसटते रहने और गाहे-बगाहे एक दूसरे को कोसते रहने के अलावा उनके जीवन में कोई सार नहीं रह गया है!

मेरे कुछ मित्र ऐसे भी हैं जिनके बच्चे अब बालिग और बाकायदा गृहस्थ हो चुके हैं। जल्द ही ये लोग दादा या दादी बन जाएंगे मगर आज भी उन्हें अपने जीवन साथी से सुख-शांति नहीं मिल पाई है। जब मैंने अपने ऐसे एक मित्र से पूछा कि आप अपनी पत्नी को लेकर क्यों नहीं आए तो उन्होंने कहा, ‘मैंने इस औरत के साथ विवाह के 30 साल गुजारे हैं और अब मुझे अपने लिए कुछ समय चाहिए! अपने बच्चों को सफलता पूर्वक बड़ा करने के बाद अब वे फिर से स्वतंत्र हो गए हैं कि जो अच्छा लगे कर सकें और अपनी पत्नी के साथ होना इसमें शामिल नहीं है! वे एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं और थोड़ा प्रयास करने पर एक दूसरे का साथ उन्हें रास भी आ सकता है। मगर नहीं! अधिकतर वे अपनी जीवन भर की आदतों से बाज़ नहीं आते, जब तब दूसरे को आहत करने वाले जुमले उछालते रहते हैं और अपनी कटुता को परवान चढ़ने का कोई अवसर नहीं छोडते।

यह देखकर बड़ा दुख होता है। ये सब लोग अपनी समस्याओं को सार्वजनिक होने से बचाने का अथक प्रयास करते हैं और उनके परिचितों को यही लगता है कि उनमें बड़ा प्रेम है और दोनों एक-दूजे के लिए ही बने हैं। मगर जो लोग उनके नजदीकी हैं वे उनके बीच के तनाव को महसूस कर सकते हैं और कुछ और गहराई में जाने पर उन्हें पता चल जाता है कि सब कुछ उतना सुंदर नहीं है जितना वे दोनों ज़ाहिर करना चाहते हैं।

इस समस्या पर इतने सोच-विचार के बाद इसे मैं यहीं छोड़ता हूँ। कल मैं इसके कारणों और समाधान पर कुछ विचार प्रकट करूंगा।

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