भारत का उच्च वर्ग – प्रतिष्ठा खोने के डर ने तलाक रोका – 3 मई 2013

विवाह

पिछले दो दिनों में मैंने निम्न वर्ग और मध्यम वर्ग के दंपतियों की हालत का वर्णन किया जो वैवाहिक समस्याओं के बावजूद विवाह में बने रहने के लिए मजबूर होते हैं। मैंने उन कारणों का विश्लेषण किया जिनके चलते सुखी होने का झूठा दिखावा करते हुए विवाह को बनाए रखना उनके लिए ज़रूरी होता है, भले ही रोज़ घर में लड़ाइयाँ होती रहें। मैं समझता हूँ कि पाठक पढ़ना चाहते होंगे कि ऐसी ही परिस्थिति में उच्च वर्ग की प्रतिक्रिया भी समान ही क्यों होती है-आखिर उनके पास तो दौलत होती है कि तलाक का सामना आसानी के साथ कर सकें। मैं आज यही स्पष्ट करने की कोशिश करूंगा कि क्यों वे भी अलग होना ठीक नहीं समझते और तलाक को टालने में ही अपनी भलाई देखते हैं।

आप कल्पना कर सकते हैं कि जब निम्न वर्ग कर्ज़ लेकर और मध्य वर्ग जीवन भर की पूंजी को दांव पर लगाते हुए अपने बच्चों के विवाह के आयोजन और दहेज देने में खर्च कर डालते हैं तो उच्च वर्ग विवाह पर कितना धन खर्च करता होगा! उनके लिए धन की कोई समस्या नहीं होती और वे बड़े से बड़े 5 सितारा होटलों में समारोहों का आयोजन करते हैं जहां अनगिनत खाने-पीने की वस्तुएं, महंगे से महंगे मनोरंजन के कार्यक्रम, महिला बैरे और विदेशी नाचने-गाने वलियाँ, दुल्हा और दुल्हन के लिए ढेर सारे आभूषण और स्वाभाविक ही दहेज की विशाल राशि पर खर्च किया जाता है! लाखों-करोड़ों रुपए फूँक दिये जाते हैं, प्रतिष्ठित मेहमानों की लंबी सूची होती है और वह आडंबर का विशाल समारोह बन जाता है!

यह वर्ग दौलत का फूहड़ प्रदर्शन करता है। विवाह के हर कार्यक्रम और समारोह में यही किया जाता है और विवाह के पेशेवर आयोजक नियुक्त किए जाते हैं जो नई-नई महंगी युक्तियाँ प्रयुक्त करते हैं जिससे विवाह को ज़्यादा से ज़्यादा उत्तेजक बनाया जा सके और जो पिछले सभी विवाहों को मात करे! उनके विवाह फिजूलखर्ची और आडंबर से भरे होते हैं और एक से एक बढ़कर प्रतिष्ठित व्यक्तियों से आप वहाँ मिल सकते हैं। ढ़ोल-मजीरों और तुरहीनाद से इस विवाह की घोषणा की जाती है!

दुल्हन का स्वागत उसके सास-ससुर के विशाल महलनुमा बंगले में किया जाता है। वहाँ पर्याप्त जगह होती है, उन्हें मध्य वर्ग की तरह 24 घंटे परिवार के साथ एक ही कमरे में दिन गुजारने की समस्या नहीं होती। लेकिन प्रेम के स्थान पर दंभ और अहं हो तो दुनिया की तमाम दौलत भी तनाव और समस्याओं को पैदा होने से नहीं रोक सकती!

खुशी और उत्सव के इतने बड़े आडंबर के बाद वे असफलता कैसे स्वीकार करें? समाज के सामने यह कैसा लगेगा? वे मुंह दिखने के काबिल नहीं रह जाएंगे! वे इतने लोगों को जानते हैं, सब उन्हें लेकर बातें करेंगे, चुहलबाजियाँ करेंगे! नहीं-वे यह खतरा नहीं उठा सकते! इसलिए वे अपने व्यक्तिगत जीवन पर पर्दा डालने की और आसपास के लोगों को एक दूसरा ही रूप दिखाने की कोशिश करते हैं। बंद दरवाजों के पीछे से आने वाली आहटों को सुन पाने वाले उनके कर्मचारियों के अलावा उनकी समस्याओं को कोई नहीं जान सकेगा।

इसके अलावा यह सार्वभौमिक सच्चाई-यह सभी वर्गों के लिए समान रूप से लागू होती है-कि तलाक़शुदा व्यक्ति के लिए दूसरा साथी खोज पाना बहुत मुश्किल होता है। हो सकता है कि वे अपने जैसा कोई तलाक़शुदा व्यक्ति खोज लें मगर आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) के बाज़ार में कोई भी तलाक़शुदा व्यक्ति को अपना लड़का या लड़की देना पसंद नहीं करता। लड़कियों को तो टूटा-फूटा समान ही समझा जाता है और पुरुषों को? पता नहीं वह कैसा है? हो सकता है पीकर पत्नी को मारता-पीटता हो…ज़रूर कोई बहुत बुरा आदमी होगा अन्यथा क्यों उसका पहला विवाह टूटता?

कैच 22 वाली परिस्थिति बन जाती है: अगर आप विवाह में बने रहते हैं तो आप जीवन भर दुखी रहेंगे क्योंकि आपकी अपेक्षाओं का वैवाहिक जीवन आपको मिलने वाला नहीं है। अगर तलाक लेते हैं तो आपको दूसरी बार उपयुक्त साथी मिल ही जाए यह ज़रूरी नहीं। क्यों? क्योंकि हर कोई यही सोचता है कि आपमें ज़रूर कोई न कोई ऐसी खराबी होगी कि तलाक तक की नौबत आ गई। किस बुराई का चुनाव किया जाए?

आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) के बारे में मैंने जो भी लिखा है, अपने अनुभवों के आधार पर लिखा है, उन्हें मैंने अपने आसपास घटते देखा है और अपने खुद के सोच-विचार के बाद प्रस्तुत किया है। निस्संदेह, यह व्यक्ति-व्यक्ति की बात होती है और कई आयोजित विवाह होते हैं जो पूरी तरह सफल भी होते हैं क्योंकि इत्तफाक से दंपतियों के मन और विचारों में तालमेल बैठ गया। लेकिन समस्याग्रस्त विवाहों की संख्या बहुत ज़्यादा होती है और इसीलिए मैंने ऐसे विवाहों के असफल होने के कारणों को रेखांकित करने की कोशिश की है।

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