तलाक विकल्प नहीं है, तब भी नहीं जब पति और पत्नी सिर्फ पराई स्त्री या पराए मर्द के साथ सेक्स सम्बन्ध रखते हों! 6 अप्रैल 2015

पिछले सप्ताह सेक्स पर लिखते हुए मैं लगातार बताता रहा हूँ कि सेक्स को लेकर दम्पतियों के बीच ज़्यादा से ज़्यादा खुलापन होना चाहिए। दुर्भाग्य से पिछले हफ्ते ही एक उदाहरण मेरे सामने आया कि कैसे लोग सेक्स को लेकर कुछ ज़्यादा ही खुले होते हैं: वे आपस में एक दूसरे को ही धोखा दे रहे हैं! यहाँ आकर पुनः हमारा सामना भारत की जटिल मगर चिरपरिचित समस्या, अरेंज्ड मैरेज (प्रायोजित विवाह) से होता है।

आजकल मैं देखता हूँ कि बड़ी संख्या में पुरुष अपनी पत्नियों के साथ और महिलाएँ अपने पतियों के साथ धोखा करते हैं! यह एक तथ्य है। हमारे आसपास ही इतने सारे मामले देखने में आते हैं कि मुझे इसके उदाहरण ढूँढ़ने कहीं दूर जाने की ज़रूरत नहीं है। पिछले हफ्ते हमें ऐसे ही एक दंपति के बारे में पता चला है।

पुरुष और महिला, दोनों ही हमारे आश्रम के कर्मचारी रहे हैं और अब किसी और आश्रम में काम करते हैं। यह पुरुष लंबे समय से अपनी पत्नी के साथ धोखा करता आया था। पहले भी हमने सुना था और हम जानते थे कि घर में इसी कारण वे आपस में लड़ते-झगड़ते रहते हैं लेकिन इस विषय में हमने उनसे पूछताछ नहीं की थी क्योंकि कोई भी 'सामान्यतया' दूसरों के साथ ऐसी बातें करना पसंद नहीं करता-लेकिन सिर्फ 'सामान्यतया'।

इस शब्द पर मैं ज़ोर दे रहा हूँ क्योंकि अब यह बात छिपाना संभव नहीं रह गया है। जिस आश्रम में वे काम कर रहे थे, उस आश्रम और उसका झगड़ा अब सड़क पर आ गया है क्योंकि वह आश्रम के कुछ धनाढ्य मेहमानों के साथ भी सेक्स करने लगा था। जैसी कि आप कल्पना कर रहे होंगे यह बात किसी को भी नागवार गुज़रेगी और निश्चित ही अब वे वहाँ के रोजगार से हाथ धो बैठेंगे।

स्वाभाविक ही इस विवाद से उनके घर में भी कोहराम मच गया, बीबी यह कहकर लड़ने-झगड़ने लगी कि क्यों वह अपने जननांग को काबू में नहीं रख पाता। वह उस आश्रम का काम छोड़ने की ज़िद कर रही है क्योंकि वहाँ पति को सुहुलियत है कि वहां वह दूसरी औरतों के साथ यौन संबंध रख सके!

लेकिन उसकी बात सुनकर वह बेशर्मी से हँसने लगा। यह उसके लिए कोई धमकी नहीं थी, जैसा कि उसने पत्नी से कहा भी। जो भी उसे समझाने जाता या इस विषय में बात करता उसे भी वह हँसकर टाल देता! वह बेधड़क कहता, हम कहीं भी चले जाएँ, मेरे लिए औरतों की कोई कमी नहीं है!

यहाँ मैं एक मज़ेदार खुलासा करना चाहता हूँ: सिर्फ वही अपनी पत्नी को धोखा नहीं दे रहा है! पत्नी भी उसे धोखा दे रही है!

उनके यहाँ और भी कई समस्याएँ हैं, जिनमें पत्नी के साथ घरेलू हिंसा से लेकर पति का जुआ खेलना और खासा रुपया उसमें बरबाद करना भी शामिल है। लेकिन आज मैं उनकी व्यक्तिगत समस्याओं पर लिखना नहीं चाहता- मैं आपका ध्यान सेक्स के कारण होने वाली तबाही की ओर खींचना चाहता हूँ: दरअसल वे आपस में प्यार ही नहीं करते। उनके आपस में यौन संबंध नहीं हैं। साथ रहकर वे कतई खुश नहीं हैं। वे साथ रहते हैं तो सिर्फ एक कारण से: क्योंकि वे शादीशुदा हैं। वे शादीशुदा क्यों हैं? क्योंकि उनके अभिभावकों ने आपस में उनकी शादी करवा दी।

और अब उन्हें इस शादी को ज़िंदगी भर ढोना है-लड़ते-झगड़ते, आपस में मार-पीट करते, एक-दूसरे के साथ बेईमानी करते हुए। इसके कारण वे नौकरी छोड़ने की बात करते हैं, कहीं और जाकर रहने की बात करते हैं लेकिन एक बार भी अलग होने की, तलाक लेने की बात नहीं करते, बल्कि सोचते तक नहीं! क्योंकि बाहरी व्यक्ति के लिए सबकुछ ठीकठाक दिखना चाहिए!

इस मामले में बाहरी व्यक्ति कोई भी वह व्यक्ति हो सकता है, जिससे वे कभी मिले तक न हों क्योंकि उन्हें जानने वाले तो अब सभी जानते कि उनके घर की क्या हालत है, उनके आपसी संबंध कैसे हैं!

मैं एक बार और दोहराना चाहता हूँ: यह बहुत असाधारण या अनोखी परिस्थिति नहीं है! ऐसे न जाने कितने मामले सामने आते रहते हैं और मैं समझता हूँ कि इस समस्या की जड़ में अरेंज्ड मैरेज यानी प्रायोजित विवाह और सेक्स को लेकर भारतीय समाज में व्याप्त कई तरह की वर्जनाएँ हैं।

Related posts

अपने अरेंज्ड मैरेज के विषय में वर और वधु कैसा अनुभव करते हैं? 2 दिसंबर 2013

अपने अरेंज्ड मैरेज के विषय में वर और वधु कैसा अनुभव करते हैं? 2 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु अरेंज्ड विवाहों के अनभ्यस्त (विदेशी) लोगों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले एक और सवाल का उत्तर दे रहे ...
भारतीय विवाह समारोहों में अक्सर पूछा जाने वाला सवाल: क्या विवाह करने वाले एक दूसरे को नहीं जानते? 28 नवंबर 2013

भारतीय विवाह समारोहों में अक्सर पूछा जाने वाला सवाल: क्या विवाह करने वाले एक दूसरे को नहीं जानते? 28 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु पश्चिमी लोगों की इस उत्सुकता के विषय में बता रहे हैं कि जिस विवाह समारोह में वे शामिल ...
परी कथाओं जैसे भारतीय विवाह परन्तु वर और वधू की मिट्टी पलीद - 27 नवंबर 2013

परी कथाओं जैसे भारतीय विवाह परन्तु वर और वधू की मिट्टी पलीद – 27 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु पश्चिमी लोगों द्वारा भारतीय विवाहों के संदर्भ में पूछे जाने वाले कुछ और प्रश्नों के, खासकर वर और ...
एक पश्चिमी व्यक्ति की नज़र में भारतीय विवाह-समारोह - 26 नवंबर 2013

एक पश्चिमी व्यक्ति की नज़र में भारतीय विवाह-समारोह – 26 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु जी की पत्नी जिस तरह एक आधुनिक भारतीय विवाह को देखती हैं, बालेंदु जी की कलम के माध्यम ...
भारतीय मेहमाननवाज़ी यह बात सुनिश्चित करती है कि विदेशी भी उनके विवाह-समारोह में शरीक हो सकें- 25 नवंबर 2013

भारतीय मेहमाननवाज़ी यह बात सुनिश्चित करती है कि विदेशी भी उनके विवाह-समारोह में शरीक हो सकें- 25 नवंबर 2013

स्वामी बालेंदु वर्णन कर रहे हैं कि कैसे आश्रम में आने वाले विदेशी मेहमान हमारे परिवार के साथ भारतीय विवाह-समारोहों ...
विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकृष्ट करते हैं! फिर अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह पर इतना आग्रह क्यों? 22 अक्टूबर 2013

विपरीत ध्रुव एक दूसरे को आकृष्ट करते हैं! फिर अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह पर इतना आग्रह क्यों? 22 अक्टूबर 2013

स्वामी बालेंदु यह प्रश्न उठा रहे हैं कि भारतीय अपनी ही जाति या उपजाति में विवाह तय करने पर इतना ...
पश्चिम ने किसे दोष दिया जब उनके बच्चों ने अरेंज्ड मैरेज का विरोध किया? - 9 मई 2013

पश्चिम ने किसे दोष दिया जब उनके बच्चों ने अरेंज्ड मैरेज का विरोध किया? – 9 मई 2013

स्वामी बालेंदु उन रूढ़िवादी भारतीयों को बता रहे हैं कि आयोजित विवाह (अरेंज्ड मैरेज) सिर्फ भारत की बपौती नहीं है, ...
आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) में स्वीकृति और अस्वीकृति का अनैतिक खेल-8 मार्च, 2013

आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) में स्वीकृति और अस्वीकृति का अनैतिक खेल-8 मार्च, 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जब परिवार बच्चों के लिए वर या वधू की तलाश करने निकलता है तो ...
भारत में तलाक इतना मुश्किल क्यों है और पश्चिम में इतना आसान क्यों है! - 7 मई 2013

भारत में तलाक इतना मुश्किल क्यों है और पश्चिम में इतना आसान क्यों है! – 7 मई 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों भारत में बावजूद समस्याओं के अधिकांश लोग तलाक लेते हुए झिझकते हैं जब ...
विवाहित दंपति खुशी के मुखौटे के पीछे अपनी समस्याओं को छिपाते हैं - 6 मई 2013

विवाहित दंपति खुशी के मुखौटे के पीछे अपनी समस्याओं को छिपाते हैं – 6 मई 2013

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे भारत में और पश्चिम में भी लोग सुखी होने का ढोंग करते हैं ...

Leave a Reply