क्या आप बड़े दहेज के लायक हैं? साथी तलाश करने के लिए एजेंट नियुक्त करें!-26 अप्रैल 2012

विवाह

मैंने कल ज़िक्र किया था कि विवाह की सारी व्यवस्था धन के अभाव में तहस-नहस हो सकती है। तयशुदा विवाहों में आर्थिक पहलू बहुत महत्वपूर्ण होता है और सबसे बड़ा सवाल यह होता है और हमेशा बना रहता है कि लड़की कितना दहेज लेकर आएगी, उसके परिवार वाले कितना धन जुटा पाएंगे। आम तौर पर वे ही सारा विवाह का खर्च उठाते हैं-और जब पैसा इतना महत्वपूर्ण है तो सारा आयोजन ही पैसे का दिखावा बनकर रह जाता है।

मैंने पिछली डायरी में लिखा था कि दहेज के विरुद्ध कानून है मगर आज भी यह एक सामाजिक मान्यता प्राप्त अपराध है। कोई भी इस सच्चाई से इंकार नहीं कर सकता कि यह अपराध पूरे भारत में हर दिन, हर जगह हो रहा है। यह जाति प्रथा की तरह है-उसके विरुद्ध कानून है फिर भी वह मौजूद है। और संभव है कि पुराने जमाने में कुछ घरेलू वस्तुएं देने की परंपरा रही हो मगर आज यह लगभग एक वाणिज्यिक उद्यम (कमर्शियल एंटरप्राइज़) बन चुका है।

उपयुक्त जीवन साथी खोजने की जद्दोजहद के बीच एक नए उद्यम ने जन्म लिया है। कई ‘मैरेज ब्यूरो’ खुल गए हैं और इंटरनेट पर कई जोड़ियाँ मिलाऊ ‘ऑनलाइन वैबसाइट’ भी उपलब्ध हैं जो यह सेवा प्रदान करते हुए अच्छा खासा धंधा कर रहे हैं। बहुत प्रयास करने के बाद भी जब अभिभावक अपने बच्चों के लिए उपयुक्त वर या वधू नहीं खोज पाते, या खोजने की दिक्कतों से बचना चाहते हैं तो कुछ फीस देकर इन ‘मैरेज ब्यूरो’ में अपने बच्चों का नाम पंजीकृत कराते हैं।

फिर प्रस्तावित उम्मीदवार का प्रोफ़ाइल बनाया जाता है जिसमे बहुत सारे विवरण दिये जाते हैं। बच्चे की उम्र, शिक्षा, व्यवसाय या नौकरी का विवरण, आमदनी या मासिक वेतन, गोरा, सांवला है या काला, धर्म, जाति और उपजाति आदि सभी प्रकार की सम्बद्ध जानकारियाँ दी जाती हैं। लड़के के परिवार को अब लड़के की कीमत प्रस्तावित करनी होती है और बताना होता है कि दहेज कितना अपेक्षित है। अगर लड़का डॉक्टर है तो परिवार 50 लाख रुपए तक की अपेक्षा कर सकता है। इसी तरह लड़के की पढ़ाई का खर्च वगैरह जोड़-जाड़कर कीमत तय होती है, जैसे एक इंजीनीयर की कीमत 40 लाख तक हो सकती है।

लड़की वाले भी इसी तरह के विवरण लड़की के प्रोफ़ाइल में देते हैं, अंतर सिर्फ यह होता है कि धन की अपेक्षा के स्थान पर उसमें अपने खर्च के बजट का विवरण दिया जाता है, जैसे कितना दहेज दे सकते हैं, उनके पास इंजीनीयर वर के उपयुक्त खर्च करने के पर्याप्त साधन हैं या नहीं, आदि आदि। तब ‘मैरेज ब्यूरो’ का एजेंट लड़की के आंकड़ों से लड़के के आंकड़ों का मिलान करके दोनों परिवारों को कुछ विकल्प भी प्रस्तावित करता है।

यह दामाद खरीदने के अच्छे-खासे आयोजन जैसा होता है। जैसे आप दुकान में जाकर सेल्समैन से कहते हैं, "ज़रा 1000 से 1500 तक का लाल रंग का गरम शाल दिखाना।’ दुकानदार आपको कुछ शाल लाकर दिखाता है, कुछ ज़रा सस्ते और कुछ ज़्यादा बेलबूटेदार और बेहतर किस्म के, ज़्यादा कीमती भी। आप उनमें से चुन सकते हैं और आप जानते हैं कि अगर आप कुछ ज़्यादा खर्च कर सकें तो आपका जाड़ा कुछ अधिक आराम से गुज़र सकता है। क्या आपकी हैसियत है वह महंगा वाला खरीदने की?

लड़की का बाप जानता है कि, उदाहरण के लिए, उसकी एक लड़की है और यह दिन जीवन में सिर्फ एक ही बार आना है। वह यह भी जानता है कि अगर वह अभी कुछ ज़्यादा दे देता है तो उसकी बेटी को एक ऐसा पति मिल सकता है जो अच्छा-खासा कमाता है। यह, स्वाभाविक ही अधिक सुरक्षा और बेटी के लिए बेहतर जीवन का सौदा हो सकता है। तो वह इस खर्च को एक निवेश की तरह लेता है जो उसकी बेटी को लगातार पर्याप्त पुनर्भुगतान (रिटर्न) सुनिश्चित कर सकता है। कई परिवार कर्ज़ लेकर या अपनी जायदाद बेचकर भी यह करते हैं और आशा करते हैं कि इससे उनकी बेटी का भावी जीवन सुरक्षित और सुखमय हो सकेगा।

एक बार जोड़ी तय हो गई तो फिर दोनों पार्टियां आपस में मिलते-जुलते हैं और अधिक तफसील से सारी बातें तय की जाती हैं। दहेज का कितना हिस्सा नगद अदा किया जाएगा, और कितना सामान इत्यादि देकर। लड़के वाले कभी कार की तो कभी मोटर साइकल की इच्छा प्रकट करते हैं, या सोने-चाँदी की, ज़ेवरों की और तयशुदा दहेज के अनुसार उनकी इच्छाएँ पूरी की जाती हैं।

एक बार सारी सौदेबाज़ी पक्की हो गई तो फिर एजेंट कुल खर्च का कुछ प्रतिशत, जो पहले से तय होता है,, अपना कमीशन लेता है। सब कुछ लड़के के ‘बाज़ार भाव’ पर निर्भर करता है। कभी-कभी तो पिता या दादा की विरासत का भी मूल्य सारे हिसाब-किताब में जोड़ लिया जाता है।

एजेंट की मदद लेना काफी व्यावहारिक प्रतीत होता है लेकिन स्पष्ट है कि वह भी विवाहोपरांत दंपति की खुशी की जमानत नहीं है। दुर्भाग्य से कई बखेड़े भी खड़े हो जाते हैं। दहेज देने या लेने में ज़रा सी बेईमानी, या उसका आभास भी, लड़की की मौत तक का कारण बन सकता है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जो किसी भी तरह से उचित नहीं कही जा सकती और अगर लोग इससे पैसा भी बनाने लगें तो यह किसी तरह दंपति के सुखमय जीवन के लिए मददगार साबित नहीं हो सकता।

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