अभी हाल ही में मैंने एक छोटी सी वीडियो क्लिप देखी, शायद कोई विज्ञापन, जिसमें एक महिला आईने के सामने खड़ी है और अपने पति से पूछती है: तुम्हारे विचार में मेरे शरीर का कौन सा हिस्सा सबसे अधिक सेक्सी है? पति जवाब देता है: मैं तुम्हारे शरीर के हर हिस्से से प्यार करता हूँ, तुम तो हर तरह से सुन्दर हो! पत्नी निराशा और झुंझलाहट के साथ पति की ओर देखते हुए कहती है: यह तो मैं जानती हूँ कि तुम मुझे प्यार करते हो- लेकिन क्या मैं सेक्सी भी हूँ?
स्वाभाविक ही यह क्लिप आपको हँसाने के लिए थी और वैवाहिक जीवन में सामान्य रूप से होने वाली इस चर्चा ने वह काम बखूबी अंजाम दिया लेकिन उसने 'सेक्सी' और 'सुन्दर' शब्दों के सामान्य अर्थों के परे जाकर मुझे सोचने को मजबूर कर दिया- विशेष रूप से 'प्रेम' के सन्दर्भ में।
क्या किसी पुरुष का किसी अनजान महिला को 'सेक्सी' कहना सामान्य बात नहीं है? अभिनेत्रियाँ, मॉडल्स, यहाँ तक कि पड़ोसी महिलाओं को भी, जिनके साथ उनकी कभी बातचीत तक नहीं हुई है? दूसरी ओर महिलाएँ भी अभिनेताओं को प्रशंसा की नज़रों से देखती हैं, फ़िल्में देखती हैं कि वे अपने पसंदीदा कलाकारों की सेक्सी मांसपेशियों का नज़ारा कर सकें और फिर, उस दुकान से ही सामान खरीती हैं, जहाँ सामान बेचने बैठा सेल्समैन उन्हें सेक्सी लगता है। लेकिन आप दम्पतियों या साथ रहने वाले जोड़ों में यह मुश्किल से ही देख पाएँगे कि दोनों में से कोई भी एक दूसरे को 'सेक्सी' कह रहा हो- खासकर दूसरों के सामने। आप 'सुन्दर' कह सकते हैं, 'सुडौल या रमणीय या सुरुचिसंपन्न' कह सकते हैं मगर 'सेक्सी' शब्द का प्रयोग करके आप लोगों पर अपने प्रियजन की अच्छी छाप नहीं छोड़ते! यहाँ तक कि ऐसा करने पर लोग आपको छिछोरा या फूहड़ भी समझ सकते हैं!
ऐसा क्यों है? ऐसा क्यों है कि प्रेम को आप सुन्दर और रोमांटिक तो मानते हैं मगर 'सेक्सी' नहीं?
मेरे विचार में इसका कारण मानव शरीर को देखने के हमारे नज़रिए में निहित है। क्योंकि सेक्सुअलिटी (यौनिकता) को हम खुले मन से स्वीकार ही नहीं करते, क्योंकि हम खुद अपने ही शरीर से उस तरह प्यार नहीं करते जैसा अपने और दूसरों के शरीर से भी करना चाहिए।
क्या 'सेक्स' का प्रेम से कोई सम्बन्ध ही नहीं है? वास्तविकता यह है कि प्रेम दुनिया की सबसे ज़्यादा 'सेक्सी' नेमत है!
'सेक्सी' शब्द के प्रयोग को मैं सिर्फ शारीरिक अंगों के लिए ही महदूद नहीं रख सकता और यही, मेरे विचार से, मुख्य समस्या है: मेरे विचार से प्रेम खुद ही 'सेक्सी' होता है, आकर्षक होना भी 'सेक्सी' होना है और बहुत सी खूबसूरत चीजें 'सेक्सी' ही होती हैं और उनका शारीरिक अंगों से कोई लेना-देना नहीं होता लेकिन यह सब सिर्फ उस महिला के सन्दर्भ में, जिसे मैं प्रेम करता हूँ।
इस तरह मैं समझता हूँ कि प्रेम ‘सेक्सी’ होता है।
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