ग्रान कनारिया में मेरे पहले व्याख्यान के दौरान लोगों ने सिर्फ इतना ही नहीं पूछा कि सेक्स के बारे में मैं क्या सोचता हूँ बल्कि यह प्रश्न भी किया:
प्रेम क्या है?
कमरे में ख़ामोशी छा गई और मैंने छोटे-छोटे कुछ वाक्यों में उत्तर दिया:
जब आप किसी की परवाह करते हैं तो वह प्रेम है।
जब आप किसी को खुश करके खुद भी खुश होते हैं।
जब आप कुछ देकर खुश होते हैं- क्योंकि कुछ प्राप्त करके तो आप खुश होते ही हैं।
जब आपको ऐसा महसूस हो कि आपका दिल ख़ुशी से छलछला रहा है तो समझिए कि यही प्रेम है!
प्रश्नकर्ता के लिए इतना उत्तर पर्याप्त था मगर फिर एक और व्यक्ति था, जो कुछ अधिक स्पष्टता और विस्तार से जानना चाहता था और उसका प्रश्न था: इसे किस तरह जाँचा-परखा जा सकता है कि आपके बीच मौजूद प्रेम वास्तव में सच्चा प्रेम है?
मैंने जवाब दिया कि आपको इसकी कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। प्रेम ऐसी चीज नहीं है, जिसकी आप परीक्षा कर सकते हैं। प्रेम कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जिसे आप बारीकी से जांच-परखकर पा सकेंगे। इस विषय पर आपको इस तरह सोचना भी नहीं चाहिए! जी नहीं, प्रेम सच्चा है या नहीं, इस पर ज़्यादा परेशान होने की जगह सिर्फ उसका आनंद उठाना चाहिए!
दरअसल मैं विश्वास करता हूँ कि प्रेम हमेशा सच होता है। सिर्फ हर पल इस एहसास की जांच-पड़ताल करने का इरादा छोड़ दें तो वह लगातार विकसित होता चला जाएगा। अपनी भावनाओं, इच्छाओं और अपेक्षाओं के प्रति लगातार ईमानदार बने रहें!
ईमानदारी के साथ सिर्फ उसका अनुभव लेते हुए ज़िंदगी गुजारें।
आनंदित रहें और प्रेम में मगन रहें!
Related posts
प्यार का कोई विलोम नहीं है – 7 सितंबर 2015
क्या आप उस उदात्त प्रेम और शारीरिक अंतरंगता को कई लोगों के साथ साझा कर सकते हैं? 29 अक्टूबर 2014
प्रेम हमें सुंदर तो लगता है मगर सेक्सी क्यों नहीं लगता? 28 अक्टूबर 2014
प्रेम मुझे दुनिया का सबसे प्रसन्न व्यक्ति बनाता है – 27 अक्टूबर 2014
साथ समय गुज़ारना प्यार की गारंटी नहीं है – 19 अगस्त 2014
प्रेम के साथ जीवन गुजारें या भोग-विलास में – 16 जुलाई 2013
अनगढ़ प्रेम – 25 जून 2013
