साथ समय गुज़ारना प्यार की गारंटी नहीं है – 19 अगस्त 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

अभी-अभी भारत लौटा हूँ तो स्वाभाविक ही मुझे जर्मनी और यहाँ, भारत के बीच मौजूद सांस्कृतिक भिन्नता का एहसास बड़ी शिद्दत के साथ हो रहा है। लेकिन साथ ही कई समानताएँ भी दोनों के बीच हैं, भले ही वे आसानी से नज़र नहीं आतीं। यह कहना युक्तियुक्त होगा कि हम सब मनुष्य हैं और हमारी भावनाएँ और संवेदनाएँ एक दूसरे से बहुत अलग नहीं हैं। आज अपने ब्लॉग में मैं एक बार फिर प्रेम पर ही चर्चा करना चाहता हूँ।

शायद आप जानते होंगे कि भारत में अधिकाँश विवाह आयोजित विवाह (अरेंज्ड मैरेज) ही होते हैं, जिन्हें अधिकतर उनके अभिभावक तय करते हैं। अक्सर दूल्हा और दुल्हन पहली बार एक-दूसरे को विवाह के दिन ही देख पाते हैं हालाँकि आजकल विवाह से पहले कम से कम एक बार दोनों का मिलना आधुनिकता की श्रेणी में आता है और ख़ुशी की बात है कि यह चलन तेज़ी के साथ बढ़ रहा है।

इसके पीछे एक विचार यह भी है कि अगर दोनों एक साथ कुछ समय गुज़ार लेंगे तो दोनों के बीच प्रेम सम्बन्ध पनपने लगेगा।

क्या दो अजनबियों का एक बार मिल लेना इस बात को संभव बना सकता है? मैं नहीं समझता।

सभी अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हुए प्रेम का अनुभव करना चाहते हैं। चाहते हैं वे प्रेम दें और बदले में उन्हें प्रेम प्राप्त हो। लेकिन दुर्भाग्य से प्रेम हर विवाह का हिस्सा नहीं बन पाता, कई बार बहुत समय बीत जाने के बाद भी। फिर भी मैंने आयोजित विवाहों में भी समय के साथ प्रेम को उपजते देखा है और कई प्रकरणों में समय के साथ उसे प्रगाढ़ होते भी देखा है। मेरे लिए मेरे माता-पिता आपसी प्रेम के सबसे बड़े उदाहरण हैं और हमेशा बने रहेंगे क्योंकि 50 साल के लम्बे अन्तराल के बाद भी वे सदा एक दूसरे के साथ प्रगाढ़ प्रेम के सूत्र में बंधे रहे। लेकिन मेरे सामने ऐसे भी कई उदाहरण हैं, जहाँ ऐसा संभव नहीं हो पाया। जहाँ कभी भी प्रेम नहीं उपज पाया, हालाँकि जीवन भर वे आसपास के लोगों से सुनते रहे कि समय के साथ जीवन में प्रेम की उत्पत्ति अवश्य होगी।

जहाँ तक भारत और पश्चिम के बीच समानता दर्शाने की बात है, मैंने इसे पश्चिम में भी होते देखा है हालाँकि वहाँ अक्सर नहीं देखा। एक उदाहरण लें: दो व्यक्तियों के बीच सेक्स सम्बन्ध स्थापित हो गए। वह एक रात का सम्बन्ध होता है या हो सकता है कि दोस्तों ने साथ बैठकर कुछ ज़्यादा शराब पी ली और बस किसी कमज़ोर पल में यह हो गया। और नतीजा लड़की के गर्भधारण के रूप में सामने आया। उन्होंने निर्णय किया कि साथ रहा जाए और बच्चे को जन्म दिया जाए। बच्चे की खातिर, नैतिकता की वजह से या असुरक्षा की वजह से कि पता नहीं उन्हें इससे बेहतर कोई दूसरा जीवन साथी मिल पाएगा या नहीं। कोई भी कारण रहा हो लेकिन वह प्रेम नहीं था क्योंकि उन्होंने बाद में कभी उस दिन वाली अंतरंगता को दोहराने की योजना नहीं बनाई!

वे आशा करते रहे कि समय के साथ प्रेम विकसित होगा। होता, अगर वे कुछ ज़्यादा वक़्त साथ गुजारते। तीस साल या उससे भी अधिक समय बीत गया लेकिन उन्हें लगता है कि उन्होंने वास्तव में कभी भी प्यार का अनुभव नहीं किया। ऐसी कहानियाँ सुनकर दुःख होता है मगर वे सच्ची कहानियाँ हैं। ऐसा ही भारत में भी होता है: उनका विवाह आयोजित किया गया, उन्होंने सोचा उनका पति या उनकी पत्नी सिर्फ प्यार की खातिर ही उनके जीवन में आए हैं और समय के साथ उनका प्यार परवान चढ़ेगा लेकिन बीस साल का समय गुजरने के बाद भी उनके जीवन में प्यार का अंकुरण तक नहीं हो पाया। वे लड़ते-झगड़ते हैं, वे एक दूसरे के सान्निध्य में चिंतित और विचलित रहते हैं और उनके बीच ज़रा भी तालमेल नहीं है, प्यार की तो बात ही छोड़िए।

तो, यह आवश्यक नहीं कि समय गुजरने के साथ अनिवार्य रूप से प्रेम का विकास हो ही जाए।

लगाव? हाँ, वह हो जाता है। दोनों को एक-दूसरे की आदत पड़ जाती है, आपस में व्यवहार ठीक होता है लेकिन दोनों सिर्फ यह सोचते हैं कि दूसरे के बगैर रहना असुविधाजनक होगा। लेकिन यह आपके दिल को चोट नहीं पहुँचाता। और प्रेम भी पैदा नहीं हो पाता, तीस साल का लंबा अर्सा गुज़र जाने के बाद भी।

या तीस सेकंड में प्रेम का बीज अंकुरित हो जाता है!

प्रेम बड़ा रहस्यमय है-उसकी भविष्यवाणी करना असंभव है!

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