Category: प्रेम
प्यार का कोई विलोम नहीं है – 7 सितंबर 2015
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि ऐसी कोई भावना नहीं है, जिसका प्रेम के साथ ... Read More
क्या आप उस उदात्त प्रेम और शारीरिक अंतरंगता को कई लोगों के साथ साझा कर सकते हैं? 29 अक्टूबर 2014
स्वामी बालेंदु इस प्रश्न पर विचार कर रहे हैं कि क्या आप कई साथियों के ... Read More
प्रेम हमें सुंदर तो लगता है मगर सेक्सी क्यों नहीं लगता? 28 अक्टूबर 2014
स्वामी बालेंदु ‘सेक्सी’ शब्द के बारे अपने विचार लिखते हुए बता रहे हैं कि वे ... Read More
प्रेम मुझे दुनिया का सबसे प्रसन्न व्यक्ति बनाता है – 27 अक्टूबर 2014
स्वामी बालेंदु खुद अपने जीवन के प्रेमानुभाव पर एक बेहद व्यक्तिगत नोट लिख रहे हैं। ... Read More
साथ समय गुज़ारना प्यार की गारंटी नहीं है – 19 अगस्त 2014
स्वामी बालेन्दु नहीं मानते कि साथ में पर्याप्त समय गुज़ारना दो व्यक्तियों के प्रेम में ... Read More
मेरे विचार में प्रेम क्या है? 19 जून 2014
स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि जब ग्रान कनारिया में भाषण के दौरान उनसे पूछा ... Read More
प्रेम के साथ जीवन गुजारें या भोग-विलास में – 16 जुलाई 2013
आप क्या चाहते हैं: प्रेम या ऐश ओ आराम? यह प्रश्न करते हुए स्वामी बालेंदु ... Read More
अनगढ़ प्रेम – 25 जून 2013
स्वामी बालेंदु प्रेम के बारे में और उसकी सीमाओं और उसकी स्वतन्त्रता के विषय में ... Read More
मैं नहीं मानता कि ईश्वर से प्रेम करना तो पवित्र है और अपने परिवार से प्रेम करना आसक्ति-14 फरवरी 2013
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि विश्वास में परिवर्तन के साथ प्रेम के बारे में ... Read More
