भारतीय स्त्रियों का पारंपरिक पहनावा – 12 अगस्त 2010

भारतीय संस्कृति

कल मैंने ज़िक्र किया था कि आप किसी भी देश में हों इस बात का आपको ध्यान रखना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं। वह तो ठीक है मगर मैं पुनः उसी बिन्दु पर आना चाहता हूँ कि विभिन्न संस्कृतियों के बारे में आपको जानना चाहिए और उनका आदर करना चाहिए। जब आप किसी ऐसे देश की यात्रा कर रहे हों जो बहुत दूर हो और जिसकी संस्कृति आपकी संस्कृति से भिन्न हो, तो आप आम तौर पर यात्रा के लिए और आने वाले अलग तरह के अनुभवों के लिए अपने आपको तैयार करते हैं। कम से कम आप उसके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश करते हैं, हालांकि किसी संस्कृति को ठीक तरह से जानना तभी संभव होता है जब आप उसके भीतर धँसकर उसका अनुभव प्राप्त करते हैं।

अगर आप एक महिला हैं और भारत आ रही हैं तो आपको सलाह मिलेगी कि आप ऐसे कपड़े ले जाएँ जो आपके कंधे और घुटने ढँक सकें। एक सामान्य भारतीय महिला के वस्त्र कैसे दिखाई देते हैं, इस बारे में बताते हुए मैं अपने विषय की शुरुआत करना चाहता हूँ।

बहुत से दूसरे देशों की महिलाओं की तरह भारत की महिलाएं सिर से पाँव तक ढँकी नहीं रहतीं और वे सिर्फ काले वस्त्र ही नहीं पहनती हैं। अगर आपने भारतीय महिलाओं के चित्र देखे हैं तो आपने गौर किया होगा कि वे कितने रंगीन वस्त्र पहनती हैं। आप सैकड़ों तरह के भड़कीले रंगीन वस्त्र खरीद सकती हैं।

भारतीय महिलाएं आम तौर पर पारंपरिक साड़ियाँ और पंजाबी सूट पहनती हैं। सूट, जिसे सलवार-कमीज़ भी कहा जाता है, ढीली-ढाली पतलून जैसा होता है जो ऊपर से एक तरह के लंबे शर्ट से ढंका होता है। स्कार्फ जैसा एक दुपट्टा भी होता है जिसे कंधों पर डाला जाता है। इस तरह आपके हाथ ही स्वतंत्र होते हैं, वह भी अगर आपने छोटे हाथ की कमीज़ पहनी है। इसके अलावा अपनी छाती ढंकने के लिए दुपट्टा होता है।

साड़ी दरअसल एक पाँच मीटर लंबा कपड़ा होता है। इसे पहनने के लिए आपको दो और वस्त्रों की ज़रूरत होती है:एक पेटीकोट और एक चोली, जिसे छोटा ब्लाउज़ भी कहा जा सकता है। पेटीकोट के ऊपर और शरीर के चारों तरफ लपेटकर इसे बहुत सफाई के साथ कमर पर बांधा जाता है। उसका एक हिस्सा ऊपर चोली को ढँकता हुआ पीछे लटकता रहता है जिसे पल्लू कहते हैं। इस तरह इसे पहनने से पीठ और पेट खुले हो सकते हैं मगर आप इन्हें भी अपनी मर्ज़ी के अनुसार ढँक सकती हैं।

आप देख सकती हैं कि आम तौर पर कंधे और पैर ढंके होते हैं। जिसे विदेशों में ‘सेक्सी’ कहा जाता है भारत में उसका रूप यही है। शहरों में औरतों के पहनावे में बदलाव आ रहा है और बहुत सी युवा महिलाएं पश्चिमी ढंग के सादे वस्त्र पहनने लगी हैं लेकिन वे भी बड़े आयोजनों में पहनने के लिए इन्हीं साड़ियों का उपयोग करती हैं जिन्हें अच्छी तरह पहनना वे जानती हैं।

और किस तरह पश्चिमी महिलाएं अपने वस्त्रों के चलते सामान्य भारतीयों की रुचि का केंद्र बन जाती हैं इसके बारे में कल मैं आपको बताऊँगा। आज इतना और सूचित करना चाहता हूँ कि आज का भोजन हमारी मित्र, जो इस साल पहले भी आश्रम में आ चुकी हैं, श्रीमती ड्याना वोज़िलुते द्वारा प्रायोजित किया गया है। उनके जन्मदिन पर हम उन्हें प्रेम और शुभकामनाएँ भेंट करते हैं।

Leave a Comment