जब परिवार वाले अस्पृश्यता पर अमल करें तब उनके प्रति आप सहिष्णु नहीं रह सकते – 24 दिसंबर 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

कल मैंने एक ऐसी स्थिति का वर्णन किया था, जिससे बहुत से भारतीय नौजवानों को दो-चार होना पड़ता है: वे स्वयं प्रगतिशील हैं और आधुनिक विचार रखते हैं जबकि उनके परिवार वाले अभी भी उन्हीं दकियानूसी परंपराओं और आडम्बरों का पालन करते हैं, जिन्हें वे नौजवान अब बिलकुल पसंद नहीं करते। वे इस परिस्थिति पर शर्मिंदा होते हैं और मित्रों और अपने परिवार वालों के बीच किसी भी संपर्क को टालने की कोशिश करते हैं। कल मैंने यह भी कहा था कि आपको इतना संवेदनशील और सहिष्णु होना चाहिए कि दोनों के बीच शांति और सद्भावपूर्ण मिलाप का कोई रास्ता निकल सके। लेकिन कुछ ऐसी स्थितियाँ हो सकती हैं जहाँ मैं भी समझता हूँ कि यह संभव नहीं है। परिस्थितियाँ, जहाँ मैं कतई सहिष्णु नहीं हो सकता और दूसरों से भी यही कहूँगा कि इन मामलों में अपने विचारों पर ज़रा सा भी डगमगाए बगैर, दृढ़ता के साथ अड़े रहें!

इस तरह की समस्याएँ सिर्फ युवकों तक ही सीमित नहीं है, हर उम्र के लोग इस तरह की मुश्किलों में पड़ सकते हैं। अगर आपका परिवार और आपके प्रियकर बहुत परंपरावादी हैं जबकि आप उन दक़ियानूसी और मूर्खतापूर्ण परम्पराओं के सख्त विरोधी हैं तब किसी भी उम्र में ऐसी समस्याओं का सामना हो सकता है: जैसे जातिप्रथा के अंतर्गत आज भी जारी छूआछूत।

अगर आपके मित्र निचली जातियों से आते हैं और आपका परिवार आज भी उन्हें अछूत मानता है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि आपस में मिलने पर उनके बीच भारी समस्याएँ पेश आएँगी। परिवार वाले अपने उन दोस्तों को घर लाने का समर्थन नहीं करेगे। वे उन्हें अलग गिलासों में पानी देंगे और जब आपके दोस्त चले जाएँगे तब उन सभी वस्तुओं को अग्नि में पवित्र करेंगे जिन्हें उन्होंने छुआ होगा। उनसे मिलने पर वे उनसे हाथ नहीं मिलाएँगे- वैसे यह ठीक ही होगा क्योंकि यह अभिवादन या स्वागत का भारतीय तरीका नहीं है- लेकिन वे भूल से भी उन्हें छूने से बचेंगे।

इससे आपको कितना बुरा लगेगा! इससे बुरी बात यह कि आपके मित्र को कितना बुरा लगेगा!

या अगर आपके परिवार के लोग सोचते हैं कि जो लड़कियाँ जींस या-उससे बढ़कर, स्कर्ट-पहनती हैं वे अश्लील या चरित्रहीन होती हैं जबकि ऐसी कई लड़कियाँ आपकी मित्र हैं तो आपको अपने परिवार वालों से नैतिकता के पाठ पढ़ने पड़ सकते हैं। हो सकता है कि आपकी माता-पिता आपसे कहें कि ‘ऐसे लोगों’ के साथ मत रहा करो! वे मानते हैं कि ऐसे लोगों का साथ आपके लिए नुकसानदेह है-लेकिन आप क्या सोचते हैं?

या हो सकता है, आपके माता-पिता अपनी जाति में आपका विवाह करना चाहते हों और इसके लिए दहेज़ लेना या देना चाहते हों, जिसके आप सख्त खिलाफ हों! क्या आप इसे भी अपने साथ की जा रही ज़्यादती नहीं मानेंगे?

ये ऐसे ही मामले हैं और ऐसे बहुत से दूसरे उदाहरण भी दिए जा सकते हैं। जब आप जानते हैं कि आपका परिवार ऐसी दकियानूसी परंपराओं में यकीन रखता है और उनके संस्कारों में पुरानी घृणित आदतों का बोलबाला है जो आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं तो आपको दृढ़ता के साथ अपने विचारों पर अडिग रहना चाहिए। आप क्या स्वीकार कर सकते हैं इसकी एक सीमा है और उसके भीतर ही आप बिना पाखंड और दोगलेपन के जीवन गुज़ार सकते हैं!

मैं जानता हूँ कि इसके क्या परिणाम हो सकते हैं: या तो वे आपकी बात मान लेंगे या फिर आपके और आपके परिवार के बीच दूरियाँ पैदा हो जाएँगी। इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है-क्योंकि हमें संवेदनशील और सहिष्णु तो होना चाहिए मगर साथ ही हमें अपने जीवन की लगाम ऐसे व्यक्तियों के हाथ में नहीं सौंपनी चाहिए, जिनके जीवन मूल्य आपके विचारों से मेल नहीं खाते या जो दक़ियानूसी और हानिकारक परम्पराओं का अनुपालन करते हैं!