बलात्कारी पंच – पंचायतें जहां बलात्कार अपराध नहीं बल्कि प्रेम की सज़ा है – 27 जनवरी 2014

भारतीय संस्कृति

पिछले सप्ताह से मैं भारत में महिलाओं के विरुद्ध होने वाली यौन प्रताड़नाओं और बलात्कारों के विषय में लगातार लिखता रहा हूँ और देखिये, इसी बीच बंगाल में एक और वीभत्स हादसा पेश आ गया। कलकत्ता से सिर्फ 180 किलोमीटर दूर एक गाँव में एक महिला पर सामूहिक बलात्कार किया गया। और इस बार यह बिना सोचे-समझे या दुर्भाग्यवश चंगुल में फंसी किसी महिला के साथ नहीं हुआ है बल्कि यह काफी सोच-विचार करने के बाद, महिला पर आरोप मढ़कर, पंचायत द्वारा सज़ा दिलवाकर किया गया सामूहिक बलात्कार है। वाकई यह एक सामान्य बलात्कार नहीं है। बलात्कारियों में सज़ा मुकर्रर करने वाले जज, पंच-सरपंच आदि सभी शामिल थे।

20 वर्षीय एक लड़की का एक पुरुष के साथ प्रेम हो जाता है। उनकी नज़र में पड़ोस के गाँव का वह पुरुष बुरा व्यक्ति था और उसके साथ गाँव की लड़की का प्रेम समाज को स्वीकार नहीं था। एक बार गाँव वालों को वे दोनों एक साथ दिखाई दे गए और वे उन दोनों को घसीटते हुए गाँव ले आए और तुरत-फुरत पंचायत (ग्राम अदालत) बिठा दी गई।

लड़की के परिवार को आदेश दिया गया कि वे 50000 रुपए अदा करें जो इतनी बड़ी रकम थी कि वे अदा नहीं कर सकते थे और यह बात पंचायत भी जानती थी। जब परिवार वालों ने कहा कि उनके पास इतनी रकम नहीं है तो पंचायत ने लड़की के विरुद्ध यह भयंकर फैसला सुनाया, जिसमें गाँव के कुछ पुरुषों से कहा गया कि वे उस लड़की पर बलात्कार करके उसे उपयुक्त सज़ा दें।

अब उसे याद नहीं है कि कितने लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया लेकिन उनकी संख्या कम से कम तेरह थी। इनमें से कई तो ऐसे थे, जिन्हें वह चाचा और भाई कहा करती थी और जिनके साथ उसके संबंध परिवार के सदस्यों जैसे आत्मीय थे। बलात्कार के बाद लड़की के बुरी तरह ज़ख्मी होने और रक्तरंजित होने के बावजूद परिवार वालों को घंटों उसे अस्पताल ले जाने से रोका गया। आखिर जब वे उसे अस्पताल ले जा सके तभी पुलिस में रपट भी लिखाई जा सकी।

पुलिस ने तेरह लोगों को इस आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया है, जिनमें वह पंच भी शामिल हैं जिन्होंने यह ‘सज़ा’ सुनाई थी। फिर भी वे गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते रहे और पुलिस को अतिरिक्त पुलिस बुलवानी पड़ी तब जाकर संदिग्ध अपराधियों को गिरफ्तार किया जा सका।

हाल में पढ़ने में आया, इस तरह स्तब्ध कर देने वाला यह सबसे भयानक अपराध है। इसलिए नहीं कि दूसरे ऐसे अपराध कम गंभीर हैं बल्कि इसलिए कि यह आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति द्वारा शारीरिक और मानसिक उत्तेजना में तत्क्षण किया जाने वाला अपराध नहीं था। इस मामले में अपराध करने वाले समझ रहे थे कि वे न्याय कर रहे हैं, वे सोच रहे थे कि उस लड़की के साथ बलात्कार किया जाना आवश्यक है!

महिलाओं के विरुद्ध भारत में होने वाले कुल अपराधों में पश्चिम बंगाल का हिस्सा सबसे बड़ा है। सुदूर गावों में बुज़ुर्गों द्वारा अपने कानून बना लिए जाते हैं और उनके आधार पर अपराधों की सजाएँ सुनाई जाती हैं। इन्हें ग्राम पंचायत कहा जाता है और ऐसी घटनाओं से आप समझ सकते हैं कि वे महिलाओं के बारे में क्या विचार रखते हैं, उस समाज में महिलाओं की स्थिति क्या है और उनकी तुलना में ज़ुल्म करने वाले पुरुष कितने शक्तिशाली हैं।

ऐसी घटनाएँ आपके मन में क्षोभ, जुगुप्सा ही पैदा करती हैं और आप सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं कि आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, ऐसे समाज मौजूद हैं, जहां बलात्कार को पीड़िता की ही गलती के कारण होने वाला अपराध माना जाता है, जैसे मानसिक रूप से बीमार पुरुष का कोई अपराध ही न हो!

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