बच्चे का खिलौना छीन लेने का खेल बिल्कुल मज़ाकिया नहीं है! 21 अप्रैल 2014

भारतीय संस्कृति

पिछले सप्ताह मैंने आपको बताया था कि कैसे एक दुकान में एक अजनबी ने मेरी बेटी की धैर्य-सीमा का उलंघन किया और कैसे एक मित्र ने अपरा को इतना चिढ़ा दिया कि वह तुरंत वहाँ से चल देने की ज़िद करने लगी। लेकिन ऐसी सबसे बुरी घटना तब घटी, जब हम लोग लखनऊ के एक होटल में नाश्ता कर रहे थे। आज उसी घटना के बारे में आपको बताना चाहता हूँ।

भारत में छुट्टियों के काफी लंबे अंतराल के बाद रमोना, अपरा और मैं एक लंबे सप्ताहांत पर लखनऊ गए थे। हम एक पाँच सितारा होटल में रुके थे, जोकि मेरे और मेरी पत्नी के लिए बड़ा अच्छा था क्योंकि हम दोनों ही आराम-पसंद हैं और खाने के भी शौकीन हैं। ऐसे होटल में आप आश्वस्त रहते हैं कि कमरे साफ-सुथरे होंगे और वहाँ अच्छे प्रशिक्षित कर्मचारी भी होंगे। प्रशिक्षित सिर्फ इस बात के लिए ही नहीं कि भिन्न मूल के दंपति को देखकर फुसफुसाएं नहीं बल्कि इसलिए भी कि ऐसे दंपति के बच्चे से भी संयत व्यवहार करें। लेकिन जब हम पहले ही दिन सबेरे होटल के रेस्तराँ में नाश्ता करने पहुंचे तो हमारी यह धारणा छिन्न-भिन्न हो गई।

अपरा वहाँ पहुँचते ही छुट्टियों के मूड में आ गई थी और नए शहर का पूरा लुत्फ उठा रही थी और जब कि हम लोग उसे आसपास की हर चीज़ दिखा रहे थे, वह अपना टेडी-बीयर लेकर वहाँ आ गई थी और उसे भी वहाँ की नई-नई चीज़ें दिखा रही थी। अपरा मेरी गोद में थी और जब हमने रेस्तराँ में प्रवेश किया, इन होटलों के चलन के मुताबिक, वहाँ के एक कर्मचारी ने आगे बढ़कर हमारा स्वागत किया। उसने हमें ‘गुड-मॉर्निंग’ कहा और अपरा की ओर देखकर लंबी मुस्कान फेंकी। फिर उसकी नज़र टेडी-बीयर पर पड़ी और उसने सुखद आश्चर्य का प्रदर्शन करते हुए, एक खास अंदाज़ में, जो सिर्फ और सिर्फ बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, अपरा से कहा: हाय, कितना क्यूट लग रहा है, तुम्हारा टेडी-बीयर! मैं ले लूँ? मैं उसे प्यार से अपने पास रखूंगी!’

उसने सिर्फ कहा नहीं, टेडी-बीयर की तरफ हाथ बढ़ाया, अपने हाथ में लिया और, आप विश्वास नहीं करेंगे, उसे अपनी तरफ खींचने लगी! अपरा ही नहीं, हम लोग भी आश्चर्यचकित रह गए। स्वाभाविक ही, अपरा ने अपने प्यारे टेडी-बीयर को कसकर जकड़ लिया और अपने शरीर से चिपटा लिया। कुछ पल वह महिला भी टेडी-बीयर को अपनी ओर खींचने का खेल खेलती रही, जैसे अपरा के हाथ से छीन ही लेगी और फिर हारकर उसने अपनी पकड़ ढीली की और उसे छोड़ दिया।

इतना सब एक मिनट के भीतर हुआ होगा या शायद उतना भी नहीं। उस महिला के अभिवादन का जवाब देने के बाद मैं खाली टेबल देख रहा था कि हम लोग कहाँ बैठ सकते हैं और इसलिए पल भर के लिए तो मैं समझ ही नहीं पाया था कि यह महिला वास्तव में टेडी-बीयर खींच रही है। जब मुझे पता चला, मैं इतना आहत और उत्तेजित हो चुका था कि तुरंत कुछ कह नहीं पाया। पीछे आ रही रमोना के साथ भी यही हुआ होगा।

जिस तरह वह महिला उस दो साल की बच्ची के हाथ से, जो अपने टेडी-बीयर को जकड़कर अपनी छाती से लगाए हुए थी, उसे छीनने की कोशिश कर रही थी या छीनने का खेल कर रही थी, उससे हम भौंचक रह गए थे और जैसे ही उसने टेडी-बीयर छोड़ा, हम उसके बेशर्म व्यवहार पर हक्के-बक्के आगे बढ़ गए! आखिर, आप क्या सोचकर ऐसा करते हैं? मेरी बच्ची के हाथ से उसका खिलौना छीनना, वह भी मेरी आँखों के सामने?

फिर, निश्चित ही, आप चुरा नहीं रही थीं। आप उसे लेकर नहीं जाने वाली थीं। अगर वह रोने लगती तो आप बेहद दुखी हो जातीं, माफी मांगतीं। अपरा भी बस, रोने ही वाली थी, क्या आपने नहीं देखा? आप सिर्फ उसके साथ मज़ाक कर रही थीं। आप उसे थोड़ा चिढ़ाना चाहती थीं।

मैं नहीं समझता कि यह कोई मज़ाक की बात है। मेरी पत्नी भी नहीं समझती और मेरी बेटी तो बिल्कुल नहीं!

स्वाभाविक ही, भारत में पाँच सितारा होटलों के कर्मचारियों के प्रशिक्षण में इस बात की पूरी उपेक्षा की गई है कि अपने ग्राहकों के बच्चों के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए! या संभव है, और मुझे लगता है कि यही होगा कि वह कोई प्रशिक्षु रही होगी क्योंकि बच्चों को चिढ़ाने की आदत भारतीय संस्कृति में इतनी रूढ़ है कि पाँच सितारा होटल का प्रशिक्षण भी उसे लोगों के व्यवहार से अलग नहीं कर सकता। अपने ग्राहकों की भावनाओं के प्रति वे चाहे जितने संवेदनशील क्यों न हों, उनके बच्चों की भावनाओं के प्रति उदासीन ही बने रहते हैं!

मेरी बेटी के चेहरे से अपनी उँगलियाँ दूर रखें, प्लीज़ और उसके खिलौनों को भी तब तक न छुएँ जब तक कि वह खुद अपनी मर्ज़ी से आपको न दे दे।

कल मैं इस घटना पर हमारी और अपरा की प्रतिक्रिया के बारे में आपको बताऊंगा।

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