दहेज कानूनों का दुरुपयोग – समाज में परिवर्तन ज़रूरी – 31 मार्च 2011

कल मैंने उन महिलाओं की बुरी हालत के बारे में लिखा था जो ऐसे परिवारों में विवाहित हैं जिनका उद्देश्य सिर्फ ऊंचा दहेज प्राप्त करना है। आपमें से कुछ ने ठीक ही पूछा था कि क्या इन महिलाओं के पास ऐसा कोई तरीका, कोई जरिया नहीं है जिसकी बिना पर ये न्यायालय में जाकर न्याय की गुहार लगा सकें। है, दहेज के विरुद्ध कानून तो है, मगर दुर्भाग्य से उनका भी दुरुपयोग किया जा रहा है।

और दहेज के विरुद्ध यह कानून सन 1961 में ही पास कर दिया गया था। क्या यह शोचनीय नहीं है कि 50 साल का इतना लंबा समय गुज़र जाने के बाद भी भारतीय समाज से दहेज के दानव का खात्मा नहीं किया जा सका है? इस कानून में कई परिवर्तन भी हुए हैं और शुरू में सरकार ने उन्हें कुछ अधिक सख्त भी बनाया था। विवाह के पहले सात वर्ष तक महिला को परिवार के विरुद्ध पुलिस में रपट लिखाने का अधिकार प्राप्त है। मैं हर उस महिला की सराहना करता हूँ जो अपने पति और उसके परिवार द्वारा प्रताड़ित होने पर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पुलिस के पास शिकायत करती हैं। ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां लड़कियां अपने दूल्हे द्वारा अतिरिक्त दहेज की मांग करने पर या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर पुलिस के पास गई हैं और उन्हें कटघरे में खड़ा करने में सफल हुई हैं। फिर तो दुल्हा और उसका सारा परिवार पुलिस की जांच के दायरे में आ जाता है और उनके सामने जेल जाने का खतरा भी मंडराने लगता है। ऐसे प्रकरणों को देखकर अच्छा लगता है कि किस तरह कानून समाज के लिए कुछ बेहतर कर सकता है।

इसका दूसरा पक्ष यह है कि कई बार इस कानून का दुरुपयोग भी किया जाता है। सिर्फ दूल्हे का परिवार ही लालची नहीं होता दुल्हन के परिवार वाले भी कई बार पैसे के लालच में आपराधिक कृत्य कर सकते हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं जहां लड़की ने लड़के और लड़के के परिवार के खिलाफ पुलिस में झूठी शिकायत कर दी कि वे उससे दहेज में रुपये की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाही शुरू की और लड़के के सारे परिवार वालों को न्याय प्राप्त करने के लिए न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्हें लड़की के परिवार वालों से न्यायालय के बाहर समझौता करने के लिए लड़की के परिवार को रुपया देना भी देना पड़ सकता था या जेल भी हो सकती थी। नियम यह है कि अगर कोई लड़की यह बयान देती है कि वह अब तक हजारों रुपये दहेज के रूप में लड़के या उसके परिवार वालों को दे चुकी है तो फिर उसे सच माना जाता है और यह सिद्ध करने की ज़िम्मेदारी लड़के की होती है कि लड़की झूठ बोल रही है और उसने लड़के को रुपये नहीं दिये। दुल्हन और उसके परिवार वाले अक्सर दूल्हे और उसके परिवार को पुलिस में रपट लिखने की धमकी देकर इस तरह ब्लैकमेल करते देखे गए हैं। जेल जाने के डर से लड़के वाले अक्सर लड़की वालों को भुगतान कर देते हैं और यह सिलसिला भविष्य में भी चलता रहता है।

कानून के ऐसे दुरुपयोग के कारण सरकार को इस नियम की सख्ती को कुछ कम करना पड़ा। यह कैसी विडंबना है कि जो कानून आपकी मदद के लिए बनाया गया था उसे आप दूसरों को परेशान करने के लिए प्रयोग करने लगे।

मेरे परिवार को भी एक ऐसा ही अनुभव हो चुका है। मेरे भाई का पारंपरिक तरीके से आयोजित विवाह हुआ था। उस वक़्त हमारे परिवार ने एक गरीब परिवार की लड़की को चुना जिससे उसे बेहतर जिंदगी नसीब हो सके । उनके पास बिल्कुल पैसा नहीं था, दहेज की बात तो दूर की है। हमारी दहेज लेने की कोई इच्छा भी नहीं थी, बल्कि हमारे परिवार ने विवाह के समय दोनों परिवारों का खर्च उठाया, लड़की के वस्त्र आदि सब कुछ। लेकिन विवाह चल नहीं सका। लड़की और उसके परिवार का व्यवहार हमारे साथ ठीक नहीं था। वे बहुत से जेवर जिसमें से विवाह में मिले उपहार थे और बहुत सारे पुश्तैनी जेवरात भी थे, चुराकर भाग गए। मेरे भाई ने उस लड़की के विरुद्ध तलाक का प्रकरण लगा दिया और उन्होंने हमारे खिलाफ दहेज का। कहना न होगा कि हमें इस प्रकरण से कितना दुख पहुंचा।

मैं फिर दोहराऊँगा: हमें आयोजित विवाह की इस पूरी व्यवस्था को ही समाप्त करना होगा जो समाज में बीमारी की तरह फैली हुई है और जो लोगों को बहुत तकलीफ पहुंचाती है। यह लोगों में लालच पैदा करती है और एक ऐसे आयोजन को जो प्रेम से लबरेज होना चाहिए, एक साधारण व्यापार में तब्दील कर देती है।

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