पश्चिम में भारतीय परंपराएँ – 13 फरवरी 2008

शहर:
वीसबाडेन
देश:
जर्मनी

25 साल की एक महिला आज मेरे पास आई। उसने मुझे बहुत प्रसन्न मन से बताया कि 10 साल से उसके किसी के साथ संबंध हैं और अब वह गर्भवती है। इस बात को देखना, सुनना और महसूस करना कितना सुंदर है! यहाँ मैं इतने दीर्घजीवी संबंध क्वचित ही देख पाता हूँ, विशेषकर इतनी कम उम्र में। ऐसा प्रेम देखकर मुझे बड़ी खुशी होती है और मैंने उन तीनों को अपनी शुभकामनाएँ दीं।

दरअसल अधिकतर लोग अपने अंदर कुछ कमी सी पाते हैं और यही कारण है कि, जैसा कि मैंने कल भी स्पष्ट किया था, वे किसी रूढ़िबद्ध नियम पर चलना ठीक समझते हैं। यहाँ पश्चिम में लोग सुरक्षा और प्रेम की खोज में लगे हुए हैं। वे किसी तृष्णा के पीछे भाग रहे हैं। कई तरह के उपचारों, परंपराओं और दार्शनिक विचारों के बीच एक तरह का भ्रम फैला हुआ है जिनमें से कुछ का उद्गम भारत से होता है। कई ऐसी बातें हैं जिन्हें गलत ढंग से समझा गया है बल्कि जैसा कि मैं पिछले कुछ दिनों से कहता रहा हूँ, एक तरह से उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। लेकिन मुझे लगता है कि चीज़ें तब गलत दिशा में जाने लगीं जब भारत से पश्चिम आए हुए लोगों ने अपने मतलब के लिए भारत की प्राचीन और अलौकिक परंपराओं को तोड़-मरोड़कर पेश करना शुरू कर दिया।

भारत एक महान, संस्कृति सम्पन्न, आध्यात्मिक राष्ट्र है। मैं इन गुरुओं से कहना चाहता हूँ कि ऐसा गलत व्यापार न करें। बिना आलोचना किए या उन्हें भ्रमित किए लोगों को हमारी संस्कृति को समझने की अंतर्दृष्टि प्रदान करें। यह आपकी और भारत की प्रतिष्ठा पर दाग लगाने वाला काम है। अपनी संस्कृति की रक्षा करें। आध्यात्मिकता और योग के नाम पर कुछ भी ऊलजलूल चीज़ें यहाँ बेची जा रही हैं। नाम और लेबल भारत से आयातित होता है। यह हमारे महान देश और संस्कृति का दोषपूर्ण नज़रिया पेश करता है। अगर कोई किसी खोज में है, किसी चीज़ की उसे लालसा है या आपसे कुछ अपेक्षा करता है तो इसका उपयोग पैसा बनाने में न करें। उसे सही रास्ता दिखाएँ, उसे सलाह दें अगर वह मांगता है, ईमानदार बनें और सिर्फ प्रेम का प्रसार करें। यह बहुत अच्छा होगा यदि आप इस तरह किसी की मदद कर सकें जिससे उसे लंबे समय तक खुशी और शांति प्राप्त हो सके।