यदि भारतीय पुरुष चाहते हैं कि उन्हें एक संभावित बलात्कारी न समझा जाए तो उन्हें क्या परिवर्तन लाने होंगे! 28 जनवरी 2014

भारतीय संस्कृति

मैं पिछले सप्ताह पश्चिमी महिलाओं के विरुद्ध होने वाले यौन उत्पीड़न के विषय में लिखता रहा हूँ। इस दौरान मैंने बताया कि भारतीय महिलाओं को भी अपने दैनिक जीवन में, रोज़ ही ऐसे उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, मैंने तर्क और उदाहरण देकर यह भी स्पष्ट किया कि कैसे महिलाओं के वस्त्र उनके विरुद्ध होने वाले उत्पीड़न या बलात्कार के कारण नहीं हैं और अंत में इस समस्या के मूल कारणों की पड़ताल करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में व्याप्त सेक्स वर्जनाएँ ही इस समस्या के जड़-मूल में स्थित हैं। मैं आज भारतीय पुरुषों को संबोधित करते हुए एक अपील लिखना चाहता हूँ क्योंकि समाज में बदलाव आवश्यक है!

और क्या परिवर्तन की शुरुआत खुद अपने आपसे करना व्यावहारिक नहीं होगा?

जब मैं भारत में होने वाले बलात्कारों के बारे में लिखता हूँ तो अक्सर इस तरह की प्रतिक्रियाएँ प्राप्त होती हैं: लेकिन सिर्फ अपराधी ही तो बलात्कारी होते हैं, सामान्य लोग इन अपराधों में लिप्त नहीं होते! मैं मानता हूँ कि अपराधी प्रवृत्ति वाला कोई व्यक्ति ही ऐसा घृणित अपराध कर सकता है मगर दूसरी तरफ आप किसी भी भारतीय महिला से पूछें तो वह यही बताएगी कि जीवन में कम से कम एक बार उसके साथ यौन उत्पीड़न हुआ है। यह बात क्या प्रदर्शित करती है? या तो देश के अधिकांश पुरुष अपराधी हैं या फिर महिलाओं के प्रति ऐसे अशिष्ट व्यवहार को अधिकांश पुरुष बहुत सामान्य मानते हैं, महिलाओं के प्रति असभ्यता और निरादर उनकी मूल प्रवृत्तियों में शामिल हो गया है। स्त्रियॉं के प्रति यौन प्रताड़ना हमारी संस्कृति में रूढ़ है और उसी तरह हम दैनिक जीवन में उनके साथ व्यवहार करते हैं।

एक बात स्पष्ट है: जब तक भारत की सड़कों पर स्त्रियॉं का यौन उत्पीड़न जारी है तब तक एक सामान्य भारतीय पुरुष के रूप में आप इस बात के लिए अभिशप्त हैं कि आपको महिलाओं द्वारा एक संभावित खतरे के रूप में देखा जाए, चाहे वे महिलाएं विदेशी हों या भारतीय।

आशा करता हूँ कि मेरे ब्लॉग पढ़ने के बाद आप किसी महिला के साथ बलात्कार नहीं करेंगे। मैं यह भी आशा करता हूँ कि आप उनमें से नहीं हैं जो महिलाओं को छूने का कोई मौका नहीं गँवाते, जो सरे-राह उन पर फब्तियाँ कसते हैं छीटाकशी करते हैं या वे असहज हो जाएँ इतना घूर-घूरकर उनकी तरफ देखते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इस विषय में आप क्या विचार रखते हैं? मित्रों के साथ चर्चाओं में आप महिलाओं के विषय में किस तरह बात करते हैं? अपने परिवार और आस-पड़ोस की महिलाओं के प्रति आपका रवैया क्या है? महिलाओं के विषय में सामान्य रूप से आप क्या महसूस करते हैं? पत्नी के साथ आपका बर्ताव कैसा है? अपने बच्चों को आप इस विषय में क्या सिखाते हैं? कहीं अपनी बेटी और अपने बेटे के साथ आपके व्यवहार में अंतर तो नहीं है?

सामान्य रूप से भारतीय संस्कृति, पूर्वाग्रह और मनोवृत्तियां भारतीय पुरुषों में महिलाओं के प्रति सम्मान की कमी के लिए उत्तरदायी हैं। स्त्रियों को देवियों के रूप में मंदिरों में पूजा जाता है लेकिन घर में सबसे निचली पायदान पर उनकी उपस्थिति होती है, उनका दमन किया जाता है और उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता, घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनका दखल वर्जित होता है: यानी कुल मिलाकर उन्हें सम्मानजनक रूप से बराबरी के अधिकार प्राप्त नहीं हैं। आपको अपने जीवन में परिवर्तन लाकर इस परिस्थिति के खिलाफ हरसंभव कार्यवाही करनी चाहिए।

मेहरबानी करके अपने लड़कों को महिलाओं का आदर करना सिखाएँ, कि वे उन्हें अपने समान मानें और उनके साथ बराबरी का व्यवहार करें। अपने व्यवहार से यह बात साबित करें और अपने मित्रों के लिए भी उदाहरण बनें। अपनी पत्नी, बेटियों, बहनों और महिला मित्रों को ठीक वही सम्मान दें, जो आप अपने पुरुष संबंधियों को देते हैं। सबसे मुख्य बात यह कि उन्हें खुद से प्रेम और खुद का आदर करना सिखाएँ। उन्हें यह न सिखाएँ कि वे क्या पहनें और क्या नहीं। अगर वे पढ़ना या नौकरी करना चाहें तो अपने स्वप्न पूरे करने की न सिर्फ उन्हें छूट दें बल्कि उनकी मदद करें कि वे उन्हें पूरा कर सकें। अपनी बेटियों को अपना जीवनसाथी चुनने की पूरी छूट दें, एक ऐसा व्यक्ति चुनने की, जो उसे प्रेम करता हो। उन्हें शक्ति और समर्थन प्रदान करें।

अपने यौन जीवन का पूरा लुत्फ उठाएँ। अपनी यौनिकता का दमन न करें बल्कि अपनी पत्नी के साथ अपनी और उसकी कामनाओं और स्वैर कल्पनाओं (fantasies) पर चर्चा करें। उन्हें अधिक से अधिक पूरा करने का प्रयास करें। एक दूसरे के लिए पर्याप्त समय निकालें, अपने प्यार का प्रदर्शन करें और प्यार की अति करके उसे अचंभित कर दें। अपने सम्मान युक्त प्रेम-सम्बन्ध को ऐसा बनाए कि आपके बच्चों और दोस्तों के सामने वह एक दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत हो सके, उन्हें पता चले कि एक महिला का सम्मान किस तरह किया जाना चाहिए।

देश की सड़कों पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले यौन दुराचार को आप महज अपराधियों का काम कह कर अनदेखा नहीं कर सकते। इसका नतीजा आपके लिए ही बुरा होगा। जी हाँ, सिर्फ देश की प्रतिष्ठा के लिए ही नहीं, न ही सिर्फ पर्यटन उद्योग के लिए क्योंकि फिर विदेशी महिलाएं पर्यटन के लिए किसी दूसरे देश को वरीयता देंगी, बल्कि आपके लिए भी। जी हाँ, यह आपके लिए बुरी बात होगी क्योंकि इन महिलाओं द्वारा आपको एक संभावित बलात्कारी के रूप में देखा जाएगा, भले ही आप वैसे न हों। क्या आप चाहते हैं कि आपको एक बलात्कारी के रूप में देखा जाए?

जब तक आप अपने समाज को पूरी तरह बदलते नहीं तब तक आप भी महिलाओं की नज़र में एक संभावित खतरा हैं।

इसलिए इस सामाजिक परिवर्तन के लिए पूरी शक्ति के साथ काम करें।

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