विदेशियों के मन में भारत की बद से बद्तर होती जा रही खराब छवि – 20 जनवरी 2014

पिछले सप्ताह हमें एक डैनिश महिला पर्यटक के साथ हुए सामूहिक बलात्कार का समाचार प्राप्त हुआ। दुर्भाग्य से उस रात वह अपने होटल का रास्ता भूल गई थी और भटक गई थी। यह जानकारी स्तब्ध कर देने वाली थी। बदकिस्मती से यह पहला ऐसा वाकया नहीं है बल्कि पिछले कुछ महीनों में हुए बलात्कार और सेक्स उत्पीड़न के अनेकानेक हादसों में से एक है!

कुछ लोग कहते हैं कि उस महिला ने, जो देर रात एक संग्रहालय देखकर वापस लौट रही थी, पुरुषों के समूह से सहायता का निवेदन करके गलती की। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि उसी रास्ते से चलकर उसे वापस चले जाना चाहिए था। कुछ लोग यह भी कहेंगे कि उसे रास्ता भूलना ही नहीं चाहिए था या उस इलाके के होटल में नहीं ठहरना चाहिए था।

लेकिन सच बात यह है कि किसी भी स्थिति में बलात्कार को पीड़िता का दोष नहीं कहा जा सकता। ऐसे अपराध तो होने ही नहीं चाहिए। किसी से सहायता मांगते हुए डरना क्यों पड़े! सड़क पर आप निर्भय होकर चल सकें, चाहे रात हो या दिन, अकेले या किसी के साथ, महिला हों या पुरुष और कहीं के भी नागरिक हों। भारत से बाहर मेरे लिए भी यही जायज़ बात है। ऐसी घटनाएँ होनी ही नहीं चाहिए।

दुर्भाग्य से इन हादसों की बेरोकटोक पुनरावृत्ति होती चली जा रही है और इसके चलते भारतीय मेहमान-नवाज़ी की प्रतिष्ठा लगातार दागदार हो रही है। परिणामस्वरूप हम अपने मेहमानों से अक्सर यह सुनने के लिए मजबूर हैं कि विदेशी महिलाएं भारत भ्रमण करने से डरती हैं। नीचे मैं एक ईमेल प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मुझे हाल ही में एक महिला से प्राप्त हुआ है:

"….मैं चाहती हूँ कि आप मुझे भारत में सफर के दौरान आने वाले संभावित खतरों के विषय में उचित सलाह दें, क्योंकि मैं पहली बार भारत की यात्रा कर रही हूँ और समाचारपत्रों में पढ़ती रही हूँ कि अपनी रूढ़िग्रस्त संस्कृति के चलते भारतीय पुरुष यौन पिपासा से पीड़ित पाए जाते हैं; जैसे पिछले दिनों एक बस में एक लड़की के साथ बलात्कार हो गया था, आदि आदि…। इसलिए मैं जानना चाहती हूँ कि पीछा किए जाने या लूटे जाने का खतरा उठाए बिना बस या ट्रेन में सफर करना या सड़क पर पैदल चलना सुरक्षित है या नहीं। सलाह के लिए अग्रिम धन्यवाद और आप सभी को शुभकामनाएँ। आपकी, ****।"

नोट करें कि यह पहला मौका नहीं है जब हमें ऐसा ईमेल प्राप्त हुआ है! यह अब एक सामान्य बात होती जा रही है और जब वे महिलाएं यहाँ आती हैं तब भी सुरक्षा के बारे में उनके अनेक सवाल होते हैं: सुरक्षित रहने के लिए उन्हें कैसा व्यवहार करना चाहिए, कैसे कपड़े पहनने चाहिए, आदि आदि! मैं उनकी आशंका समझ सकता हूँ क्योंकि अब महिलाओं के साथ यौन दुराचार भारत के यथार्थ का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

मैं जब यहाँ, भारत में, अपनी यूरोपियन पत्नी और दूसरी गोरी महिलाओं सहित कुछ मित्रों के साथ बाहर निकलता हूँ तो देखता हूँ कि भीड़ किस तरह उनकी ओर आँख फाड़कर देखती है! यह उचित नहीं लगता, उनके पास से गुजरती इन महिलाओं के प्रति पुरुषों की नज़रों में कोई सम्मान नहीं होता! अपने मित्रों के साथ सड़क पर चलते हुए होने वाला यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है और जब मुझे यह बुरा लग रहा है तो सोचिए कि उन महिलाओं को वह कितना बुरा लगता होगा! वे ऐसी निगाहों के प्रति पहले से सचेत रहती हैं-फिर उस भीड़ का क्या, जहां पता नहीं किसका हाथ उनके नितंबों को सहलाकर चला गया? अंधेरी सड़क पर घर जाते वक़्त-ऐसी हालत में थोड़ा-बहुत डर लगना स्वाभाविक ही है!

लेकिन इस सबके बावजूद मैं यही कहना चाहूँगा कि भारत ज़रूर आइये। अगले कुछ दिन मैं आपको इस समस्या की जड़ों से रूबरू कराना चाहूँगा। इसके अलावा मैं भारतीय पुरुषों को संबोधित करते हुए एक अपील लिखना चाहूँगा और अंत में उन सभी गैर-भारतीय गोरी महिला पर्यटकों के लिए भारत भ्रमण से संबन्धित कुछ टिप्स देना चाहूँगा। ये टिप्स आजकल पत्र-पत्रिकाओं से प्राप्त होने वाली सामान्य सलाहों से कुछ अलग होंगी क्योंकि वे मेरे और मेरी जर्मन पत्नी के प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित हैं। इस विषय में आगे पढ़ने के लिए अगले कुछ दिन मेरे ब्लोगों को अवश्य देखते रहें।

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