अगर आप अपनी पत्नी के साथ बलात्कार नहीं करते तो आप भारत के सिर्फ 25% लोगों में से एक हैं – 10 जून 2015

कल मैंने आपको बताया था कि कपड़ों को लेकर हुई चर्चा के कारण कैसे मुझे मित्रता में दूरी महसूस होने लगी। इस विषय पर हमारे बीच गहरी मतभिन्नता थी क्योंकि उसकी नज़र में महिलाओं के वस्त्रों की वजह से बलात्कार होते हैं। चर्चा आगे भी चलती रही थी और आज मैं उसके शेष हिस्से के बारे में आपको बताना चाहता हूँ।

मैं जानता हूँ कि वास्तव में बहुत से लोग हैं, जो मानते हैं कि किसी स्त्री के साथ कोई भी यौन दुराचार वास्तव में उसी की वजह से होता है, कम से कम एक विशेष सीमा तक। और इन लोगों के लिए गलत कपड़े पहनना उसकी मुख्य गलती होती है। लेकिन क्या आप तब भी यही समझते हैं कि जब दो साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार होता है तो इसलिए कि वह अपने चाचा के सामने नंग-धड़ंग घूमती रहती थी? क्या आपकी नज़र में वाक़ई यह उसका दोष है?

राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आँकड़े दर्शाते हैं कि 93% बलात्कार पीड़िता के परिचित व्यक्तियों द्वारा ही किए जाते हैं। यह एक तथ्य है। और ऐसे लोग भी हैं, जो इस पर विश्वास नहीं करते।

अधिकतर ये लोग पीड़िता के चाचा, पिता, भाई या परिवार के परिचित मित्र होते हैं! यह कहना आवश्यक है कि उनकी जगह चाचियाँ, बहनें और परिवार की दूसरी महिलाएँ भी हो सकती हैं क्योंकि यौन दुर्व्यवहार सिर्फ पुरुषों तक ही महदूद नहीं है। बच्चों से वयस्क कहते हैं कि यह बात किसी को न बताएँ अन्यथा कोई भी उनसे प्यार नहीं करेगा। बड़ी उम्र की महिलाएँ भी बलात्कार का शिकार होती हैं और शर्मिंदगी के एहसास में डूब जाती हैं, स्वयं को अपराधी समझती हैं, किसी के सामने स्वीकार नहीं करतीं, शायद डरती हैं कि उल्टे उसी पर दोष मढ़ दिया जाएगा!

लेकिन ऐसे लोग भी समाज में हैं जो कहते हैं कि ये आँकड़े झूठे हैं-हालाँकि दुनिया भर में ऐसे आँकड़े बहुतायत से पाए जाते हैं! मेरा मित्र इन्हीं लोगों में से एक है! दरअसल उसने कहा भी- 'मैं इतने परिवारों को जानता हूँ और उनमें से किसी भी परिवार में बलात्कार नहीं हुआ है!'

वे आपको क्यों बताएँगे? और शायद वे खुद भी न जानते हों क्योंकि आप जैसे लोगों के चलते पीड़िता अपने आप से इस कदर शर्मिंदा होती है कि अपने साथ हुए दुर्व्यवहार को अपनी ही गलती समझती है!

एक और आँकड़ा है-इस बार संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से-जिसे भारत सरकार तक झूठा मानती है: भारत में 75% शादीशुदा महिलाएँ अपने पतियों द्वारा बलात्कार का शिकार होती हैं।

इस पर मेरे मित्र का जवाब था कि यह आँकड़ा सरासर गलत है। तर्क: 'मैंने अपनी पत्नी के साथ कभी बलात्कार नहीं किया!'

मैं एक मिनट के लिए स्तब्ध रह गया और मेरी ज़बान से बोल नहीं फूटे! मैं तो इस तरह से सोच भी नहीं था! आप इस तरह का उत्तर क्योंकर देंगे? स्वाभाविक ही आप अपनी पत्नी के साथ बलात्कार नहीं करते, मैंने भी यह नहीं सोचा था- लेकिन इससे आप सिर्फ उन 25% लोगों में शुमार होते हैं, जो ऐसा नहीं करते! और इसका अर्थ यह नहीं है कि ऐसा करने वाला और कोई हो ही नहीं सकता!

लेकिन समस्या यह है कि परंपरागत और धार्मिक लोग, जिन्हें विश्वास है कि हमारी पुरातनकाल से चली आ रही भारतीय संस्कृति में हर बात अच्छी ही अच्छी है, वह इतनी महान है कि उसे जस का तस, जैसी वह शुरू से थी, बचाकर और संभालकर रखना ज़रूरी है, भले ही यथार्थ की रोशनी में आपको अपनी आँखों पर पट्टी ही क्यों न बांधनी पड़े! वे अपने आप से झूठ बोलते हैं और कहते हैं कि यह तो उनके धर्म और संस्कृति में हो ही नहीं सकता और इसलिए यह होता ही नहीं है, उनका अस्तित्व ही नहीं है!

यह मेरे लिए अत्यंत आश्चर्यजनक था कि मेरा मित्र भी इन आँकड़ों पर विश्वास नहीं करता- लेकिन फिर मैं जानता हूँ कि बहुत से दूसरे लोग भी इसी तरह सोचते हैं। मस्तिष्क के साथ होने वाले इस छल-कपट के बारे में कल मैं कुछ और विस्तार से लिखूंगा।

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