नमस्कार कहकर अभिवादन करना और ऋणात्मक ऊर्जाएँ – 11 मार्च 2010

भारतीय संस्कृति

मैं धार्मिक नौटंकी के बारे में पहले भी बहुत कुछ कह चुका हूँ मगर आज मैंने इंटरनेट पर कुछ बातें ऐसी देखीं जो एक बार फिर मेरे विचारों की सत्यता की पुष्टि करते हैं। नमस्कार क्यों और कैसे किया जाए, इस विषय पर वह एक साक्षात्कार या प्रश्नोत्तरी जैसा कुछ था। हाथों को मिलाकर नमस्कार करने की मुद्रा सिर्फ आपसी अभिवादन तक ही सीमित नहीं है, वह मंदिर में ईश्वर या देवताओं को नमन करने का भी एक तरीका है। जिस प्रश्न ने मेरा ध्यान आकृष्ट किया वह इस तरह है:

नमस्कार करते समय पुरुषों से अपने सिरों को ढंकने की अपेक्षा नहीं की जाती जबकि स्त्रियों को सिर ढंकने की सलाह दी जाती है?

जो मुख्य विचार उस साक्षात्कार में सामने आया था वह यह था कि ईश्वर को इस तरह अभिवादन (नमन)करने से एक ईश्वरीय शक्ति सिर के रास्ते प्रवेश करती है। फिर स्त्रियों को इस तरह अपना सिर क्यों ढंकना चाहिए? मैंने आज तक ऐसी कोई बात नहीं सुनी, पहले कभी पढ़ा नहीं। दिये गए उत्तर का सारांश इस प्रकार है:

कुंडलिनी जागृत करने की क्षमता पुरुषों में स्त्रियों की अपेक्षा अधिक होती है। इसलिए वे उन ऋणात्मक शक्तियों के प्रभाव से बहुत हद तक मुक्त रहते हैं। इसके विपरीत स्त्रियाँ इन कष्टप्रद शक्तियों की तुलना में कमजोर और असुरक्षित होती हैं और उनसे प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए उन्हें नमस्कार करते वक्त साड़ी के पल्लू से सिर को ढँककर रखने की सलाह दी जाती है।

क्या लाजवाब उत्तर है! क्या मुझे इस बारे में कुछ भी कहने की ज़रूरत है? जी हाँ, है। उनके लिए जो मेरी यह डायरी पहली बार पढ़ रहे हैं जिससे वे जान सकें कि मैं कौन हूँ और किन बातों पर यकीन रखता हूँ। ईश्वर के लिए कोई मुझे बताए कि क्यों स्त्रियाँ ज़्यादा कमजोर और असुरक्षित होंगी और सबसे बड़ी बात, कौन सी ऐसी शक्ति है जो साड़ी को बेध नहीं पाएगी? बिल्कुल नहीं! नमस्कार करना एक तरह का अभिवादन है, दूसरी संस्कृतियों में प्रचलित अभिवादनों जैसा एक रिवाज। पश्चिमी देशों में हाथ मिलना एक सामान्य बात हो गई, कुछ दूसरे देशों में गालों पर चुंबन लेने की प्रथा विकसित हो गई। और यहाँ भारत में सिर झुकाकर वक्ष पर हाथ जोड़ने की प्रथा अमल में आई। मैं स्त्रियों और पुरुषों के बीच किसी भी तरह के भेदभाव का विरोध करता हूँ। एक-दूसरे का और ईश्वर का प्रेम के साथ अभिवादन कीजिये। यही एकमात्र महत्वपूर्ण बात है।

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