पिछले दिनों दहेज के बारे में मैं काफी लिख चुका हूं। हाल ही में किसी ने हमें एक ईमेल भेजा और ये सवाल पूछे : "मैंने कई महान प्रोजेक्ट के बारे में पढ़ा है जो भारत में लड़कियों की मदद करते हैं। आप लड़कियों के लिए कुछ और क्यों नहीं करते? ऐसे कई धर्मार्थ संगठन हैं जो गरीब परिवारों की लड़कियों के लिए दहेज जुटाने में मदद करते हैं। और अगर आप ज्यादा प्रचार करेंगे, जो 'कन्या बचाओ' का संदेश देता हो तो मैं आश्वस्त हूं कि कई और लोग मदद करेंगे।"
हालांकि मुझे भरोसा है कि जिसने भी ये ईमेल भेजा था उनका मतलब भारत में लड़कियों की भलाई से था। लेकिन मैं इस सलाह पर अमल कभी नहीं करूंगा। मैं जानता हूं कि ऐसे कई परोपकारी संगठन हैं जो लड़कियों के लिए धन जमा करते हैं ताकि वे दहेज देने के योग्य हो सकें। ज्यादातर दानी लोग जो दान देते हैं, वे सही मायने में मदद करना चाहते हैं, लेकिन मैं सोचता हूं कि वे इस बात को लेकर जागरूक नहीं हैं कि वे जिस काम के लिए मदद दे रहे हैं उसका नतीजा क्या होगा? मैं ऐसे प्रोजेक्ट्स को कभी पसंद नहीं करता, और इसकी वजह सिर्फ ये है कि वे अप्रत्यक्ष रूप से पूरी तरह से एक गलत सिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं।
मैं जानता हूं कि ऐसी कई संस्थाएं हैं (जिनमें से कुछ शिक्षा को भी प्रोत्साहन देते हैं) जो हर साल अपनी छात्राओं के दहेज के लिए धन जमा करते हैं ताकि जब वह वयस्क हो जाए और शादी के लिए तैयार हो तो दहेज के लिए अच्छी रकम उसके पास हो। उनका तर्क होता है कि ऐसे कई परिवार हैं जो अपनी बेटी की शादी में दहेज नहीं दे सकते जिसकी वजह से उनकी लड़की की शादी के लिए कामयाब लड़के नहीं मिल पाते। वे कहते हैं कि ऐसी लड़कियों को उनके भविष्य के परिवार में सम्मान नहीं मिलता और यहां तक कि कभी-कभी तो पति भी नहीं मिलता। लेकिन क्या आप इस परम्परा का समर्थन नहीं कर रहे? यह गलत है कि इन लड़कियों को दहेज देना पड़े। इनमें से किसी एक को दहेज देकर आप बाकी पूरे समाज को महसूस करा रहे हैं कि देखिए ऐसे होना चाहिए। ऐसे में अगली पीढ़ी भी दहेज देने के लिए आपसे मदद मांगेगी।
इसकी जगह आपको उन लड़कियों को अच्छी स्कूली शिक्षा दिलाने में सहायता करनी चाहिए ताकि वे खुद धन कमा सकें, आत्मनिर्भर बन सकें और जब चाहें शादी कर सकें, तब नहीं जब उनके माता-पिता चाहें कि अब इसकी देखभाल पति करे। अच्छी शिक्षा के साथ एक लड़की के पास कहीं ज्यादा बेहतर भविष्य की संभावनाएं होती हैं बनिस्पत अच्छे दहेज के। और कोई भी उससे उसकी शिक्षा नहीं छीन सकता। इससे सहज रूप से ही समाज की सोच पूरी तरह से बदलेगी लेकिन शिक्षा ही पहला कदम है। इसीलिए कृपया ऐसे प्रोजेक्ट्स और संगठनों का सहयोग करें जो लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करते हैं बजाए उन संगठनों के जो उनके दहेज के लिए धन जमा करते हैं। जिसकी वजह से यह परम्परा कई और वर्षों तक जिंदा रह सकती है।
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