जब मैं, रमोना और यशेंदु कल की डायरी के विषय के बारे में चर्चा कर रहे थे तो हम लोग हँसे बगैर नहीं रह सके क्योंकि स्वाभाविक ही हम भारत और पश्चिमी देशों में समान परिस्थितियों में लोगों के व्यवहार की तुलना किए बगैर नहीं रह सके। जब भी हमारे यहाँ पश्चिमी मेहमान आते हैं तो वे हमेशा अपने बारे में लोगों की उत्सुकता और अत्यधिक रुचि से दो-चार होते हैं।
मुझे पता है, यह उन्हें एक तरह के सांस्कृतिक आघात की तरह लगता होगा। भारत में शिष्टाचार के लिहाज से इसे अच्छा नहीं माना जाता कि आप पास बैठे व्यक्ति में या अपने पड़ोसी में कोई दिलचस्पी न लें और अपनी उत्सुकता को छिपाए रखें जब कि भीतर ही भीतर आप उनके बारे में जानने के लिए करीब-करीब मरे जा रहे हों, कि वह कहाँ का है, क्या करता है आदि आदि। तो आप एक पश्चिमी व्यक्ति हैं-स्वाभाविक ही अपने रंग के कारण पहचान लिए जाते हैं-और आप कस्बे में घूमने निकले हैं। आप गौर करते हैं कि लोग मुड़-मुड़कर आपकी तरफ देख रहे हैं। कार की खिड़की से सिर निकालकर मुस्कुरा रहे हैं, हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं। बच्चे कूदते-फाँदते आपके पीछे लग जाते हैं, कोशिश करते हैं आपसे बात करने की, हेलो, हेलो! आपका नाम क्या है? दुकानदार आपको देखकर आपका ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं कि आप उनसे कुछ खरीद लें और रिक्शावाला, जो चाहता है कि कोई पैसे वाली विदेशी सवारी मिल जाए, बार-बार आपसे गुहार लगता है कि आप उसके रिक्शा में बैठ जाएँ। अचानक भीड़ इकट्ठा हो जाती है, एक तरह की परेड जैसी, और आप भी उसमें शामिल हो जाते हैं। मगर यह क्या? अचानक गाता-बजता, हुल्लड़ मचाता एक छोटा सा ट्रक पास से गुज़रता है और लोग आपकी तरफ देखकर इशारे करते हैं। वे पल भर के लिए रुकते हैं, आपकी तरफ देखकर मुसकुराते हैं, बस, और कुछ नहीं।!
मैं मानता हूँ कि बहुत बार एक विदेशी होना भारत में आपको थका सकता है क्योंकि कोई भी आपमें अपनी दिलचस्पी को छुपाएगा नहीं। लेकिन मैं महसूस करता हूँ कि यह एक ईमानदारी की बात है, भोलापन है। आखिर दूसरों के प्रति यह दोस्ताना दिलचस्पी ही है जो पश्चिमी घुमक्कड़ों को भारत की तरफ आकर्षित करती है। वे महसूस कर सकते हैं कि यहाँ लोग उनका स्वागत करते हैं, कभी-कभी कुछ ज़्यादा ही, मगर आम तौर पर वे उसका आनंद उठाते हैं। आखिर कौन इस छोटे से, मासूम सवाल का जवाब देना नहीं चाहेगा कि आप कहाँ के रहने वाले है, जबकि पूछने वाले के होठों पर मुस्कान और आँखों में बेपनाह उत्सुकता झलक रही है!
Related posts
क्यों भारतीय युवा अपने माता-पिता से झूठ बोलते हुए ज़रा सा भी नहीं झिझकते? 18 जनवरी 2016
भारत में महिलाओं के जीवनों में तब्दीली आ रही है लेकिन वहाँ नहीं, जहाँ कि सबसे अधिक ज़रूरत है – 14 जनवरी 2016
क्या आप भी सोचते हैं कि ‘शादी से पहले सेक्स नहीं’ – 13 जनवरी 2016
महिलाओं पर बच्चा पैदा करने के दबाव के भयंकर परिणाम – 12 जन 2016
आपके विवाह के बाद जब आपकी सास आपकी माहवारी का हिसाब रखने लगती है – 11 जनवरी 2016
भारतीय क्यों सोचते हैं कि बच्चों को अपने अभिभावकों से डरना चाहिए? 8 दिसंबर 2015
चिल्लाएँ नहीं – बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें! 10 नवम्बर 2015
सेक्स, सेक्स और सेक्स – पश्चिम के विषय में भारत का विकृत नजरिया – 2 सितंबर 2015

