क्या आप आपनी परंपराओं को बचाए रखने के लिए अपने बच्चों की आहुती देने के लिए तैयार हैं?-15 मई 2013

भारतीय संस्कृति

आज मैं आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) के बारे में अपनी आखिरी डायरी लिख रहा हूँ। कम से कम कुछ दिनों तक तो इस बारे में नहीं लिखूँगा। मैं आयोजित विवाहों के बारे में कई दिनों से लिख रहा हूँ जिसमें मैंने बहुत संयम और तर्क के साथ समझाने की कोशिश की है कि क्यों मैं उसे सही विचार नहीं मानता। मैंने अपने तर्कों को काफी विस्तार से प्रस्तुत किया है और प्रेम विवाह के विरोधियों के तर्कों का जवाब भी दिया है। विवाह के बारे में लगभग सभी बिंदुओं को छूते हुए मैंने उन पर अपनी राय व्यक्त कर दी है। लेकिन कुछ लोगों पर मैं बिना क्षुब्ध हुए अपनी राय नहीं रख पाया, मेरे लिए ऐसा करना संभव ही नहीं था, वे हैं अपनी ‘महान संस्कृति’ के कट्टरपंथी रखवाले जो अनगिनत बच्चों की मौत का कारण बनते हैं। ये वे लोग हैं जो अपने ही बच्चों के अपनी मर्ज़ी से विवाह करने पर, उनके विवाह को अस्वीकार कर देते हैं क्योंकि वे परिवार द्वारा आयोजित विवाह करने से इंकार करते हैं।

एक दिन भी नहीं गुज़रता जब मैं किसी ऐसी घटना के बारे में नहीं पढ़ता। मैं सिर्फ ऑनर किलिंग के बारे में नहीं कह रहा हूँ, जो कि अपने आप में क्रूरतम अपराध हैं, बल्कि मैं बात कर रहा हूँ उन युवा दंपतियों की जो अपनी जान ले लेते हैं, जो आत्महत्याएँ करते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उनके परिवार वाले किसी भी हालत में उनके जीवन-साथी को स्वीकार नहीं करेंगे। वे अपने परिवार को दुखी और परेशान करने से बेहतर समझते हैं कि प्रेम में एक साथ जीवन का परित्याग कर दें। वे अपने अभिभावकों से प्रेम करते हैं, अपने परिवार को चाहते हैं लेकिन उन्हें एक प्रेमी भी मिला है जिससे जुदा होकर जीने की कल्पना भी वे नहीं कर सकते। वे अपने प्रेमी और परिवार दोनों के साथ रहना चाहते हैं। वे सबके साथ रहना चाहते हैं जिनसे वे प्रेम करते हैं।

इसलिए वे एक-दूसरे का हाथ पकड़कर ट्रेन के सामने कूद जाते हैं। अपने कमरे में एक साथ फांसी लगा लेते हैं। एक दूसरे को गोली मार देते हैं या जहर खा लेते हैं। देखिये किस तरह यह बेहूदा विचार, यह जिद्दी मानसिकता और यह घृणास्पद रवैया दो मासूम युवा जीवनों के अंत का कारण बनता है।

इन डायरियों को लिखने के दौरान किसी ने मुझसे पूछा: ‘आखिर आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) से आपको इतनी शिकायत क्यों है? लाखों लोग इसी तरह विवाह कर रहे हैं!’ मैं बताता हूँ कि इनसे मुझे क्या समस्या है: यह व्यवस्था इन युवा प्रेमियों की हत्या कर रही है! यह न सिर्फ उनके सपनों का खात्मा करती है बल्कि वह उन्हें निराशा और हताशा के ऐसे अवसाद में ढकेल देती है जहां स्वयं अपने हाथों से अपने जीवनों का अंत कर लेने के सिवा उन्हें कोई चारा नहीं दिखाई देता!

मैं मानता हूँ कि लाखों लोग आयोजित विवाह करते हुए भी रह रहे हैं लेकिन उनके पास इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है, इसे आप नहीं देखते? आपकी महान संस्कृति जिसे आप उसके ‘मूल स्वरूप’ में बनाए रखने के लिए क्या कुछ नहीं करते, दो प्रेमियों को अपनी जाति के बाहर विवाह करने तक की इजाज़त नहीं देती!

जब आप अपनी संस्कृति के ‘मूल स्वरूप’ की बात करते हैं तब आपका असली मतलब क्या होता है? आपके दादा-दादी के विवाह किस तरह आयोजित (अरेंज) किए गए थे और आप भी उनके अभिभावकों की तरह क्यों नहीं करते? दस साल की उम्र में अपने बच्चों के विवाह कीजिए ना, क्यों नहीं करते? आप वैसा नहीं करते क्योंकि संस्कृति, समय और परंपराएँ इस बीच बदल गई है! वैसा करना अब आपके लिए संभव ही नहीं रहा। तो ध्यान रखें कि आप अपने बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध आपके द्वारा उनके लिए चुने गए लड़के या लड़की से विवाह करने के लिए धमका नहीं सकते, बाध्य नहीं कर सकते! अन्यथा यही होगा कि कि वे अपने जीवन का खात्मा भी कर सकते हैं जो आपके जीवन और आपकी अंतरात्मा पर हमेशा के लिए बोझ बना रहेगा।

आप अपने बच्चों से प्रेम करते हैं। वे भी आपसे प्रेम करते हैं लेकिन आप समझते हैं कि क्योंकि वे आपके द्वारा तय किए गए लड़के या लड़की से विवाह नहीं करना चाहते, वे आपसे प्रेम नहीं करते। वे एक ऐसे ‘शरीर’ के साथ अपना सारा जीवन नहीं गुजारना चाहते जिसे आपने घंटे भर में उनके लिए चुन लिया है, क्योंकि इतनी देर में आप उसका शरीर ही तो देख पाते हैं। किसी के साथ गुजरे अपने अनुभव से, उसके साथ विकसित हुए जज़्बातों के आधार पर और साथ बिताए पलों में अंकुरित प्रेम के आदान-प्रदान की उत्कटता पर विचार करने के बाद अपने बारे में वे खुद निर्णय करना चाहते हैं।

क्या आपको यह समझाने के लिए कि वह किसी लड़के से प्रेम करती है आपकी बेटी को ट्रेन के नीचे आकर जान देने की आवश्यकता पड़नी चाहिए? क्या आपके लड़के को अपने आपको आग में झोंक देना चाहिए सिर्फ इसलिए कि आपको यह पता चल सके कि वह जैसे आपको चाहता है वैसे ही किसी लड़की से भी प्रेम करता है? सिर्फ इसलिए कि यह ज़ाहिर हो सके कि बेटा आपको कितना चाहता था कि आपका दिल दुखाने और आपकी आज्ञा का उल्लंघन करने से ज़्यादा उसने मौत को गले लगाना पसंद किया? यह कि प्रेम बहुत अधिक ताकतवर होता है? मूर्खता छोड़ें, जीवन बचाएं, आंसुओं को व्यर्थ ज़ाया ना होने दें और अपने बच्चों को अपने दिल का कहा मानने की इजाज़त दें!

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