अकेले भारत भ्रमण पर आई पश्चिमी महिलाओं के लिए कुछ सुझाव: भाग 2 – 30 जनवरी 2014

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कल मैंने अकेले भारत-भ्रमण पर निकली पश्चिमी महिलाओं के लिए कुछ सुझाव प्रस्तुत किए थे। क्योंकि इस विषय में मेरे पास बहुत कुछ कहने को है इसलिए इस दूसरे हिस्से में कुछ और सुझाव प्रस्तुत हैं:

5- अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दें, इससे आप दर्शा सकेंगी कि आप आसान लक्ष्य नहीं हैं।

दुर्भाग्य से अगर आप किसी मुश्किल परिस्थिति में पड़ जाएँ, जैसे कोई पुरुष आपसे कुछ ज़्यादा ही नजदीकी बनाना चाहे, तो साफ-साफ शब्दों में अपनी सीमाओं को उसके सामने ज़ाहिर करने में देर न करें। अपनी अप्रसन्नता व्यक्त करने से डरें नहीं और जैसे, अगर आप किसी बस में उसके साथ वाली सीट पर बैठी हैं तो उसे बता दें कि उसका पैर आपके पैरों को छूए, यह आपको गवारा नहीं है। ऊंचे स्वर में कहें, जिससे आसपास बैठे हुए सहयात्री भी सुनें। अगर आप किसी कतार में खड़ी हैं और आपके पीछे खड़ा व्यक्ति आपको गलत तरीके से छूने की कोशिश कर रहा है तो पीछे मुड़कर ऊंचे स्वर में उससे यह कहने में संकोच न करे कि ज़्यादा हाथ न चलाए, उन्हें वहीं रखें, जहां उन्हें होना चाहिए।

आसपास के माहौल के गहरे संपर्क में रहें, आवश्यक लगे तो चिल्लाएँ, अपना गुस्सा ज़ाहिर करें और इस तरह सबके सामने यह अच्छी तरह स्पष्ट कर दें कि वह कोई और हरकत करने की हिम्मत न करे। उस क्षण अपना सारा आत्मविश्वास बटोरकर उस पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि न सिर्फ वह व्यक्ति आपके साथ आगे और कुछ गड़बड़ी करने से डरेगा बल्कि आसपास के अधिकांश लोग भी आपके समर्थन में खड़े होंगे।

6- यहाँ आने से पहले पूरा कार्यक्रम तय कर लें, और जहां-जहां आप भ्रमण करने वाली हैं, वहाँ की पूरी जानकारी ले लें और संभव हो तो कोई गाइड ले लें।

यह सुझाव कल दिये गए सुझाव नंबर 2 से जुड़ा हुआ है। भारत में कहीं भी यूंही खड़े होना उचित नहीं है, जबकि आपको पता न हो कि आपको जाना कहाँ है। एयरपोर्ट में कदम रखते ही इस बात का ध्यान रखें और फिर देश में भ्रमण करते वक़्त भी। पहले से अपना पक्का कार्यक्रम अच्छी तरह तय कर लें और इस बात की पूरी जानकारी रखें कि जहां आपको जाना है, वहाँ कैसे पहुंचना है। फिर आपको ऐसी जगहों पर पूछना नहीं पड़ेगा, जिनके बारे में आप अनभिज्ञ हैं। इसके अलावा किसी अजनबी से यूंही जानकारी लेने की कोशिश करना और जैसे, अगर वह कहे कि “चलिए, आपको अपने एक दोस्त के होटल लिए चलता हूँ” तो उस पर भरोसा करना बिल्कुल उचित नहीं है।

अगर आप भारत के बारे में हर जगह उपलब्ध सूचनाओं, खबरों और जानकारियों की अति से परेशान हो गई हैं, अगर आपको लग रहा है कि कितना भी पढ़ लें, कितना भी जान लें, भारत में अकेले घूमना आपके लिए मुश्किल होगा तो किसी पर्यटन-एजेंसी से संपर्क करें, किसी समूह में ही यात्रा करें या व्यक्तिगत गाइड कर लें। यह सेवा हमारे यहाँ आश्रम में भी उपलब्ध है। अगर आप अकेले या समूह के साथ, कोई यात्रा पैकेज या विश्रांति सत्र (कार्यशाला) हमारे यहाँ बुक करते हैं तो आपको बहुत सी चीजों की चिंता करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। यह यात्रा आपके होटल से, जिसे हम खुद किसी सुरक्षित जगह पर बुक करते हैं, शुरू होती है। उसके पहले विमानतल से हमारा विश्वासपात्र ड्राइवर आपको लेकर आएगा। फिर जब पूरी यात्रा के दौरान आप मेरे भाइयों में से किसी एक के साथ, उसके मार्गदर्शन में घूमेंगी-फिरेंगी तो आपको एक तरह की सुरक्षा का एहसास होगा।

जी हाँ, यह आत्म-विज्ञापन है (भाइयों, यह मेरा ब्लॉग है, यहाँ नहीं करूंगा तो कहाँ करूंगा? 🙂 )-लेकिन मैं सचमुच मानता हूँ कि उन महिलाओं के लिए, जो सुरक्षा के एहसास के साथ इस महान देश का और उसकी संस्कृति का आनंद उठाना चाहती हैं, यह बहुत व्यावहारिक सलाह है। भारत के विषय में जहां एक तरफ हर तरफ से बुरे समाचार मिल रहे हैं-और इससे इंकार नहीं कि वे बुरे हैं भी, तो दूसरी तरफ यहाँ अनेकानेक ऐसी महत्वपूर्ण और असाधारण चीज़ें देखने के लिए मौजूद हैं और शानदार लोग हैं, जिनसे मिलकर उन्हें सदा-सदा के लिए दोस्त बना लेने का मन करता है। तो अगर यहाँ आने का आपका मन है तो अवश्य आएँ।

मुझे लगता है कि यह विषय कुछ पंक्तियों से अधिक की चर्चा की मांग करता है। इसकी विस्तृत विवेचना आवश्यक है और जब कि आज और कल मैंने भारत-भ्रमण पर आई पश्चिमी महिलाओं को संबोधित करते हुए अपने कुछ विचार रखे, मेरे पास आपके लिए एक और सूची है, जिस पर मैं अगले सप्ताह चर्चा करूंगा: अगर आप एक गैर-भारतीय महिला हैं और अपनी ज़िम्मेदारी पर भारत-भ्रमण पर आई हैं तो आपको क्या नहीं करना चाहिए।

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