महिलाओं के कपड़े बलात्कार या यौन उत्पीडन का कारण नहीं हैं! 22 जनवरी 2014

परसों के ब्लॉग में यह लिखने पर कि जब भारतीय पुरुष मेरी पश्चिमी पत्नी और पश्चिमी महिला मित्रों की तरफ राह चलते आंखे फाड़-फाड़कर देखते हैं तो वे लोग असहज हो उठते हैं, मुझे एक अप्रत्याशित टिप्पणी प्राप्त हुई है:किसी ने यह कहा है कि ऐसा उनके कपड़ों के चलते होता है! अब इस बात को एक बार और स्पष्ट कर दूँ कि यौन उत्पीड़न और बलात्कार में महिलाओं के कपड़ों का कोई योगदान नहीं होता!

उसने लिखा, और स्वाभाविक ही वह पुरुष ही होगा, कि भारत में रहते हुए विदेशी महिलाओं को भारतीय वस्त्र पहनने चाहिए, साड़ी जैसे वस्त्रों से ‘महिलाओं की तरह अपने आपको ढँककर रखना चाहिए’; तब आपकी तरफ कोई ध्यान नहीं देगा लेकिन ‘अगर आप पश्चिमी महिला की तरह वस्त्र पहनेंगे तो लोगों की निगाहों से बच नहीं सकते!’

जहां तक मेरी पत्नी का और उसे घूरती निगाहों का प्रश्न है तो बता दूँ कि वह कभी भी ऐसे (अंगप्रदर्शक) वस्त्र नहीं पहनती लेकिन वह पंजाबी सूट (शलवार-कमीज़), साड़ी या जींस-टीशर्ट में भी बाहर निकले तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता: उसका रंग सफ़ेद है, वह महिला है, घूरने के लिए इतना ही भारतीय पुरुषों के लिए काफी होता है। और फिर वह कुछ भी पहने, किसी के इस तरह घूरने को उचित नहीं ठहराया जा सकता। एक और बात, और यह बात मैं उसके विशेष अनुरोध पर लिख रहा हूँ: वह यह कि साड़ी उस तरह पूरे शरीर को नहीं ढँकती जिस तरह जींस और टीशर्ट जैसे पश्चिमी वस्त्र ढँकते हैं! साड़ी में तो पेट और पीठ का बड़ा हिस्सा खुला ही रह जाता है यानी अगर वह साड़ी पहने तो उसके बदन का ज़्यादा हिस्सा दिखाई देता है!

दरअसल मैं तो समझता था कि हम इस विवाद से आगे निकल आए हैं कि महिलाओं को उनके वस्त्रों के कारण प्रताड़ित होना पड़ता है! लेकिन नहीं। स्पष्ट ही आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं, जो यह समझते हैं कि महिलाओं पर बलात्कार इसलिए होता है कि वह स्कर्ट पहनती है, क्योंकि वह अपने कंधे ढँककर नहीं रखती, क्योंकि वह ऊंचा पैंट पहनती है। संक्षेप में कहें तो यह विचार बेहद मूर्खतापूर्ण है।

महिलाएं कुछ भी पहनें उन्हें प्रताड़ित होना पड़ता है, चाहे वह कहीं की भी हो। अगर पहनावा ही इसके मूल में होता तो फिर साड़ी पहनकर घूमने वाली महिलाओं को भी वैसी ही गलत निगाहों और फब्तियों का सामना क्योंकर करना पड़ता है? कल ही मैंने कहा था कि भारतीय महिलाओं को इस तरह की प्रताड़ना ज़्यादा झेलनी पड़ती है। इसके अलावा उन्हें समाज की मदद भी कम मिल पाती है और उन घटनाओं पर कार्यवाही भी कम ही हो पाती है!

जो लोग आज भी सोशल मीडिया में ऐसी बकवास बातें लिख रहे हैं उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या आप लोगों ने ‘यह आपका दोष है (It’s your fault)’ शीर्षक वीडियो देखा है जो इस समय नेट पर बहुत ज़्यादा देखा जा रहा है और जो यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को ही दोषी ठहराने के इस रवैये का मज़ाक बनाता है? क्या आपने उन चित्रों को कभी नहीं देखा, जिनमें बलात्कार पीडिताओं को उनके द्वारा पहने हुए कपड़ों में दिखाया जाता है? क्या वे वही कपड़े नहीं पहने होतीं जिनकी आप अनुशंसा कर रहे हैं। बलात्कार का कारण परिधान नहीं हैं, इसका कारण यह नहीं है कि वे क्या पहनती हैं!

वह कहाँ जाती है, कौन से कपड़े पहनी है, वह कैसी दिखती है और उसके हावभाव कैसे हैं, इनमें से किसी भी तर्क के आधार पर आप उसे दोषी नहीं ठहरा सकते। आप यह कभी नहीं कह सकते कि वह ‘यही चाहती थी’! ऐसे अपराधों का कोई तार्किक औचित्य सिद्ध नहीं किया जा सकता और इनमें घूर-घूरकर देखना और छूने की कोशिश करना भी शामिल हैं!

वाकई, बलात्कार से बचने के लिए किसी महिला के लिए अपने शरीर को पूरी तरह ढँककर रखना क्यों ज़रूरी हो? क्या बुर्के वाली महिलाओं पर बलात्कार नहीं होता? शरीर ढँक लिया, फिर प्रताड़ित क्यों हुईं? भारत में अधिकतर बलात्कार गावों में होते हैं, जहाँ कोई महिला पेंट या टीशर्ट नहीं पहनतीं बल्कि परम्परागत भारतीय वस्त्र पहनती हैं, जिसमें उनका सिर, केश और पूरा बदन ‘उचित रूप से ढँका’ होता है! और बच्चों पर, यहाँ तक कि दूध पीते बच्चों पर बलात्कार क्यों होता है? वे किस तरह का अंगप्रदर्शन करते हैं और किस तरह ‘यही चाहते हैं’?

किसी महिला को सिर्फ अपने परिधानों के कारण यौन सुरक्षा के लिए चिंतित क्यों होना पड़े? सिर्फ इसलिए कि पुरुष अपनी यौन पिपासा को काबू में नहीं रख पाते? क्योंकि दरअसल वही अपने उच्छृंखल मस्तिष्क द्वारा परिचालित कमजोर कमजोर लिंगी मनुष्य है!

अगर आप ऊपर दिए गए तर्क पर अडिग हैं तो अंगप्रदर्शक वस्त्रों में किसी महिला को अपने करीब से गुजरते देखकर आपके मन में क्या चल रहा होता होगा, इसे आप स्पष्ट रूप से ज़ाहिर कर रहे हैं। अब मैं आपसे एक प्रश्न करता हूँ: बताइये कि उसे यौन रूप से प्रताड़ित करने से आप कितनी दूर हैं? अखबारों में समाचार बनने वाला बलात्कार करने में आपको और कितना समय लगने वाला है?

स्वाभाविक ही, ज़्यादा दूर नहीं हैं आप! या आपमें इतनी शर्म बाकी है कि ऐसे बेहूदा तर्कों से अपने आपको अलग कर लें?

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