भारत में यात्रा – सभी नकारात्मक पहलुओं के बावजूद देश और लोगों को प्यार करता हूँ – 2 नवम्बर 11

कल जब मैंने परोपकार के काम के बारे में लिखा था तब भारत में दुर्भाग्य वश होने वाली इस तरह की ठगी का जिक्र किया था। इसीलिए भी दूसरे देशों के लोग भारत में दान करने से हिचकते है – वे जानते हैं कि जिस देश में भ्रष्टाचार बहुत ही सामान्य चीज है वहां उनका पैसा कहां जाएगा। लेकिन सिर्फ दानदाता ही नहीं, भारत आने वाले यात्रियों को भी अनुभव होता है कि यहां के सभी लोग उतने ईमानदार नहीं हैं जितना वे दिखाई देते हैं। इस अनुभव से कई लोगों को निराशा होती है।

यह काफी सामान्य है कि आध्यात्मिक लोग योग विज्ञान के मूल देश का पता लगाने के लिए भारत आते हैं, उस देश में जिसके बारे में कहा जाता है कि हर कोने में आध्यात्मिकता वास करती है। जहां के लोगों के दिल जितने बड़े हैं उनमें उतना ही ज्यादा प्यार है। उन्हें भारतीय आध्यात्मिकता से बहुत अधिक उम्मीद होती है।

इसलिए वे यहां आते हैं और बनारस की यात्रा करते हैं, ये मान कर कि इस पवित्र तीर्थ स्थल में उन्हें कई ज्ञानी लोग मिलेंगे, आध्यात्मिकता और प्यार मिलेगा। जबकि बनारस खासतौर से इसलिए भी प्रसिद्ध है कि यहां के ज्यादातर लोग कपटी होते हैं, झूठ बोलते हैं और अपने फायदे के लिए दूसरों को ठगते हैं।

हालांकि ऐसा सिर्फ बनारस के साथ ही नहीं है। यात्री के तौर पर आपको पूरे भारत में हर कहीं सचेत रहना होगा क्योंकि यहां कई घोटाले सामने आते रहते हैं। सभी जानते हैं कि दुकानदार पर्यटकों से ज्यादा पैसे लेते हैं, कभी-कभी तो स्थानीय लोगों से लेने वाली रकम से कई गुना ज्यादा। ट्रैवल एजेंट भी ऐसे लोगों से बहुत ज्यादा रुपये ऐंठ लेते हैं, ये बता कर कि अब किसी ट्रेन या हवाई जहाज में टिकट उपलब्ध नहीं है और अगर टिकट चाहिए तो उन्हें उनके नेटवर्क का इस्तेमाल करना पड़ेगा। आपका टूर गाइड आपको महंगी दुकानों पर ले जाएगा और वहां से खरीदारी की सलाह देगा क्योंकि वहां आप जो कुछ भी खरीदेंगे, उस पर उन्हें कमीशन मिलेगा। नकली जौहरी नकली रत्न बेचते हैं, पंडित लोग समारोहों का दिखावा कर रहे होते हैं और एक भविष्य वक्ता आपको भविष्य बताता है। दवा बेचने वाले अपने ज्यादा फायदे के लिए डॉक्टर की लिखी दवा देने के बजाए आपको दूसरी दवाएं दे देंगे। और डॉक्टर ऐसे इलाज और जांच की सिफारिश कर देंगे जिनकी जरूरत नहीं होगी। लोग वादा करके नहीं निभाएंगे, टैक्सी और रिक्शे वाले सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए आपको शहर में घुमाते रहेंगे। खाने का सामान बेचने वाले आपको एक्सपायर्ड सामान देंगे और आप मिनरल वाटर की बोतल में सामान्य टंकी से भरा हुआ पानी खरीद सकते हैं।

क्या इसमें कोई आश्चर्य की बात है कि लोगों को भारत से निराशा हो जाती है? वे बहुत ज्यादा आध्यात्मिकता की उम्मीद करते हैं, भरपूर ईमानदारी, सहानुभूति और प्यार की उम्मीद करते हैं… लेकिन बदले में धोखा खाते हैं, ठगे जाते हैं, उनसे झूठ बोला जाता है और लगातार उन्हें परेशान किया जाता है। ऐसे में कौन निराश नहीं होगा?

हाल ही में हमें अनुभव हुआ, दो व्यक्ति जो कि भारत घूमना चाहते थे और आश्रम भी आना चाहते थे। भारत में उतरने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा की शुरूआत बनारस जाने से की। तीन दिन बाद उन्होंने हमें एक ईमेल भेजा, जिसमें लिखा था कि वे नहीं आ सकते। उन्होंने जो अनुभव किया था, वह बहुत ज्यादा निराश करने वाला था और उन्होंने वापस अपने देश जाने का फैसला कर लिया था।

इसीलिए भारत आने वाले यात्रियों को मेरी पहली सलाह यही है कि वे भारत में यात्रा के बारे में पढ़ लें ताकि आपको अंदाजा लग सके कि आप जितनी उम्मीद कर रहे हैं उसमें से कितना मिल सकता है। आपके योग शिक्षक ने क्या कहा या जो भी कुछ आपने किसी धार्मिक पुस्तक में पढ़ा है सिर्फ इसकी वजह से बहुत ज्यादा उम्मीदें मत रखें। भारतीय लोग धार्मिक होते हैं, आपने जो कुछ सुना है उसमें से बहुत कुछ यहां देखने को मिलेगा लेकिन ये कोई धरती पर गुलाबी बादलों वाला स्वर्ग नहीं है, ऐसा नहीं है कि भारत में हर कोई पूर्ण आनन्द में रहता है और सड़क पर चलने वाले हर किसी को गले लगा लेता है, जो भी ऐसा सोच कर यहां आएगा उसे निराशा ही हाथ लगेगी।

भारत में बहुत गरीबी है और ये भी एक वजह है कि पर्यटकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब आप कुछ तैयारी करके और खुले दिमाग से आयेंगे तो पायेंगे कि पूरा देश ठगों से भरा हुआ नहीं है। यहां कई बहुत अच्छे लोग भी हैं, जो ईमानदार और आध्यात्मिक हैं, जो एक-दूसरे से प्यार करते हैं और जो आपके बारे में जानने को इच्छुक हैं और आपकी मदद करना चाहते हैं। आप पायेंगे कि लोग रास्ता खोजने में आपकी मदद करते हैं। और ऐसे समय में आपको सहायता मिलती है जब आपको उसकी जरा भी उम्मीद ना हो। आपको ठगों से सावधान रहने की जरूरत है लेकिन मदद करने वालों और प्यार करने वालों के लिए अपने दरवाजे खुले रखें। वैसी चीजें होती रहती हैं लेकिन उनसे बहुत ज्यादा निराश और हताश ना हों। अपनी यात्रा रोक कर एक दिन में ही वापस मत जाइये। भारत को एक मौका दीजिए। हम आपको यहां आमंत्रित करना चाहते हैं और आपको यहां की और यहां के लोगों की खूबसूरती और संस्कृति से रूबरू कराना चाहते हैं।

मैं आपको सिर्फ अपने घर और परिवार की गारंटी दे सकता हूं और मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि यात्रा शुरू करने से पहले अगर आप ठहरने के लिए आश्रम का चुनाव करते हैं तो आप सुंदर संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। भारत आपको परिजनों के बीच स्नेह के बारे में, एक-दूसरे की मदद करने, आजादी और शांति से साथ रहने के बारे में सीखने का मौका देता है। आप पायेंगे कि कैसे दोस्त एक-दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं और कैसे आप दूसरों को अपने परिवार का सदस्य बना लेते हैं जबकि उनके बीच खून का रिश्ता नहीं होता। भारत को इसके सभी कोणों से जानने के लिए तैयार रहें।

Related posts

parenting

क्यों भारतीय युवा अपने माता-पिता से झूठ बोलते हुए ज़रा सा भी नहीं झिझकते? 18 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु भारतीय युवक-युवतियों की, विशेषकर महानगरों में रहने वाली युवतियों की एक परिस्थितिजन्य आदत के बारे में लिख रहे ...
working woman

भारत में महिलाओं के जीवनों में तब्दीली आ रही है लेकिन वहाँ नहीं, जहाँ कि सबसे अधिक ज़रूरत है – 14 जनवरी 2016

स्वामी बालेन्दु भारत के महानगरों के बारे में लिख रहे हैं जहाँ, कोई सोच सकता है कि, लोगों के विचारों ...
क्या आप भी सोचते हैं कि 'शादी से पहले सेक्स नहीं' - 13 जनवरी 2016

क्या आप भी सोचते हैं कि ‘शादी से पहले सेक्स नहीं’ – 13 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे बहुत से नैतिक मूल्यों की जड़ में पुरानी, दक़ियानूसी परंपराएँ हैं, जिन्हें अब ...
pregnency test

महिलाओं पर बच्चा पैदा करने के दबाव के भयंकर परिणाम – 12 जन 2016

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि भारत में महिलाओं पर शादी के बाद बच्चे पैदा करने के कैसे-कैसे दबाव डाले ...
आपके विवाह के बाद जब आपकी सास आपकी माहवारी का हिसाब रखने लगती है - 11 जनवरी 2016

आपके विवाह के बाद जब आपकी सास आपकी माहवारी का हिसाब रखने लगती है – 11 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु भारतीय समाज, भारतीय परिवार और सास-ससुर द्वारा डाले जाने वाले दबाव के बारे में लिख रहे हैं, जो ...
भारतीय क्यों सोचते हैं कि बच्चों को अपने अभिभावकों से डरना चाहिए? 8 दिसंबर 2015

भारतीय क्यों सोचते हैं कि बच्चों को अपने अभिभावकों से डरना चाहिए? 8 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे स्कूली किताबें डरा-धमकाकर बच्चों का लालन-पालन करने की भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित करती ...
चिल्लाएँ नहीं - बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें! 10 नवम्बर 2015

चिल्लाएँ नहीं – बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें! 10 नवम्बर 2015

स्वामी बालेंदु एक खूबसूरत शाम के बारे में बता रहे हैं, जो एक व्यक्ति द्वारा अपनी पुत्री पर की गयी ...
सेक्स, सेक्स और सेक्स - पश्चिम के विषय में भारत का विकृत नजरिया - 2 सितंबर 2015

सेक्स, सेक्स और सेक्स – पश्चिम के विषय में भारत का विकृत नजरिया – 2 सितंबर 2015

बहुत से भारतीय पुरुष और महिलाएँ यह विश्वास करते हैं कि पश्चिम में जो कुछ भी है, सिर्फ सेक्स है! ...
भूखे रह सकते हैं मगर झाड़ू-पोछा नहीं करेंगे - भारतीय समाज में व्याप्त झूठी प्रतिष्ठा की धारणा - 16 जुलाई 2015

भूखे रह सकते हैं मगर झाड़ू-पोछा नहीं करेंगे – भारतीय समाज में व्याप्त झूठी प्रतिष्ठा की धारणा – 16 जुलाई 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनके स्कूली बच्चों के कुछ परिवार घरेलू काम वाली नौकरी नहीं करना चाहते ...

Leave a Reply