ईमानदारी से जवाब दें, चाहे किसी को बुरा लगे या भला – 23 मार्च 13

ईमानदारी

पिछले दो दिनों में मैंने किसी प्रश्न का उत्तर देने लिए दो विकल्पों का विश्लेषण किया। आज मैं अपने मनपसंद विकल्प के बारे में बात करूंगाः

तीसरा विकल्पः ईमानदारी से जवाब दें

निश्चय ही लोग इस विकल्प के बारे में इतना असहज महसूस करते हैं कि वे इस बारे में सोचना भी पसंद नहीं करते। लेकिन मैं आपको गारंटी देता हूं कि इस विकल्प को आजमाने के बाद आपको बहुत अच्छा लगेगा।

अपनी राय ज़ाहिर करने के मामले में मैं थोड़ा मुंहफट हूं क्योंकि मैं मानता हूं कि हमारी राय स्पष्ट होनी चाहिए। यदि आप अपने बारे में लोगों को साफ – साफ बता दें तो उन्हें आपके बारे में पूरी जानकारी रहेगी और भविष्य में आपको असहज स्थितियों का सामना कम करना पड़ेगा। यदि लोगों के बीच आपकी छवि स्पष्ट नहीं होगी तो लोग जानकारी के अभाव में यह नहीं समझ पाएंगें कि किसी विशेष मुद्दे पर आपकी राय क्या होगी।

इसी वजह से मैं हमेशा हर प्रश्न का ईमानदारी से जवाब देता हूं यह पता होते हुए भी कि मेरा उत्तर प्रश्नकर्ता को पसंद नहीं आएगा। सामने वाला चाहे तो इसे स्वीकार करे या न करे। वह मेरे जवाब को पसंद करता है या नहीं, इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम सबको अपनी अलग राय रखने का अधिकार है तो फिर दूसरों को खुश करने के लिए इसे क्यों छिपाएं?

इस विकल्प का सबसे अहम पहलू है इसका प्रस्तुतिकरण। मैं जब किसी के साथ बात करता हूं तो सामान्यतया इस बात का ध्यान रखता हूं कि मेरी बात स्पष्ट हो लेकिन तीखी नहीं। आप अपनी बात स्पष्ट शब्दों में अभिव्यक्त करें ताकि किसी प्रकार के संदेह की कोई गुंजाइश न रहे। इस बात को सुनिश्चित कर लें आपकी बात सामने वाले को अच्छी तरह समझ आ गई है ताकि इस तरह की स्थिति भविष्य में पैदा न हो। अग़र आप किसी को कोई ऐसी वस्तु देने जा रहे हैं जो उसे पसंद नहीं है तो आप इसे सुंदर से कवर में लपेटकर दें।

अपनी बात को सुंदरता से रखने के लिए आपको एक से ज्यादा वाक्यों का प्रयोग करना पड़ेगा। मान लीजिए कि कोई ऐसा व्यक्ति आपसे किसी दार्शनिक विषय पर सलाह मांगता है जिसकी जीवनशैली, धार्मिक विश्वास और दर्शन से आप बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं तो ऐसे में आपको पहले से पता है कि आपका ईमानदार जवाब उसे रास नहीं आएगा। "देखो भई, मेरे विचार में तुम्हारा धर्म और दर्शन बक़वास है" ऐसा कहना के बजाए आप उसे अपने धार्मिक विश्वास के बारे में बताने से शुरु करें, मतभेदों और उनके कारणों के बारे में बताएं।

आप सीधे यह भी कह सकते हैः "मैं जानता हूं कि इस विषय में मेरे विचार आपके विचारों से कतई मेल नहीं खाते हैं" या फिर इसी प्रकार की अन्य कोई बात जो शुरु में ही सामने वाले को आगाह कर दे ताकि वह यह उम्मीद न रक्खे कि आप उसकी बात से सहमत हो जाएंगें। इससे सबसे बड़ा फायदा होगा कि आपके शब्दों का आघात सहनीय होगा और प्रभाव कम नकारात्मक।

और आखिर में यदि आपको लगे कि सामने वाला आपके जवाब से नाखुश है या बुरा मान रहा है, तो चिंता न करें। प्रश्नकर्ता को भी यह समझ में आना चाहिए कि अलग अलग लोगों के अलग अलग विचार होते हैं। थोड़ा समय अवश्य लगेगा लेकिन अंत में लोगों को आपकी बात समझ में आ जाएगी।

मेरे विचार से तीनों विकल्पों में से ईमानदार जवाब ही सर्वोत्तम विकल्प है।

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