मुझे ऑपरेशन क्यों कराना पड़ रहा है! 24 अप्रैल 2014

आज मुझे एक बुरी खबर देनी है: कल मुझे एक ऑपरेशन कराना पड़ेगा।

कुछ दिन से मेरे बाएँ पैर के घुटने में काफी दर्द महसूस हो रहा है। दर्द लगातार नहीं रहता बल्कि कभी भी उठता है, कभी भी चला जाता है, चाहे घुटने को हिलाऊँ-डुलाऊँ नहीं, स्थिर बैठा रहूँ, तब भी। मैं अब भी चल सकता हूँ, चलने में दर्द नहीं होता लेकिन मेरे पैर डगमगाते हैं, हर वक़्त गिरने का डर लगा रहता है।

वे लोग, जो नियमित रूप से मेरे आत्मकथात्मक ब्लॉग पढ़ते रहते हैं, जानते होंगे कि कैसे सन 2004 में मैं अपनी गुफा की सीढियां उतरते हुए अपने बाएँ पैर का लिगामेंट तुड़वा बैठा था। तो, उस वक़्त के दर्द को याद करके और पैर की अस्थिरता देखकर मुझे शक था कि कहीं इस बार का दर्द भी उसी लिगामेंट के पुनः टूट जाने के कारण तो नहीं है। हालाँकि इस बार मैं किसी दुर्घटना का शिकार नहीं हुआ था, कहीं गिरा-विरा नहीं था, न मैंने कोई अतिरिक्त व्यायाम किए थे और न ही कहीं चढ़ना-उतरना या नाचना या कूदना-फांदना किया था कि जिसके कारण मुझे यह चोट लग सकती थी! इसलिए मैंने कुछ दिन आराम किया कि शायद आराम करने से दर्द ठीक हो जाएगा। मगर नहीं, उससे कोई आराम नहीं मिला।

इसलिए, कल हम विस्तृत जाँच के लिए अस्पताल गए। जितना मैंने सोचा था उतना लम्बा-चौड़ा चेकअप नहीं था यह। डॉक्टर ने मुझे लिटाया, मेरे घुटने को हाथ में लेकर एक बार इधर और एक बार उधर खींचा-खांचा और कहा, 'हाँ, पिछला ऑपरेशन असफल हो गया है, अब फिर से ऑपरेशन कराना पड़ेगा।'

ओह, अब क्या किया जाए? छः दिन बाद मुझे जर्मनी के लिए रवाना होना है, जिसके टिकिट वगैरह भी खरीद लिए गए हैं। तीन महीने यूरोप रहकर जर्मनी के अलावा स्पेन में भी मेरे कार्यक्रम हैं, जहाँ मुझे काफी सफ़र करना होगा! वास्तव में, तुरंत ऑपरेशन कराना आवश्यक भी नहीं था, मैं भारत वापसी तक उतना दर्द सहन कर सकता था। आवश्यकता पड़ने पर कुछ दर्द-निवारक ले सकता था और जितना संभव था, ज़्यादा से ज़्यादा आराम कर सकता था। अगर मैंने पिछली बार ऑपरेशन से पहले ऐसा नहीं किया होता तो शायद इस बार मैं यह विकल्प चुन सकता था! अपनी चोट के साथ 2004 में मैंने सफ़र किया था और जानता था कि यह दर्द इतना तकलीफदेह होता है कि अपना सूटकेस खुद उठाना भी दूभर हो जाता है।

तो इस तरह हमने तुरत-फुरत यह निर्णय लिया: जर्मनी जाने से पहले ही मैं अपना ऑपरेशन करवा लूँगा। अपने कुछ कार्यक्रमों को हमें पुनर्नियोजित करना होगा, उड़ानों की टिकटें बदलना होंगी, कुछ ट्रेनों की भी और लोगों को बताना होगा कि अब हम कुछ दिन बाद आएँगे। डॉक्टरों के अनुसार, इस ऑपरेशन की एक निर्धारित प्रक्रिया है: एक छोटा सा चीरा यहाँ, दूसरा वहाँ, मेरे दाहिने पैर के लिगामेंट का एक टुकड़ा निकालना और उसे बाएँ पैर के घुटने में ठीक जगह पर जड़ देना। बस, उसके बाद अस्पताल में एक दिन के आराम के बाद घर और फिर घर पर दस दिन का आराम और। उसके बाद मैं जर्मनी जा सकता था।

काफी आसान लगता है न? मैं जानता हूँ कि बाद में काफी दर्द होता है, यह भी जानता हूँ कि फिजिओथेरपी और कुछ व्यायाम कितने ज़रूरी होंगे लेकिन मैं चाहता हूँ कि सफ़र के दौरान मैं चोट ठीक होने के उस दर्द को महसूस करूँ, जिससे मुझे अपने टूटे हुए घुटने की याद आती रहे कि उसका ऑपरेशन हुआ है और वह ठीक हो रहा है।

तो, कल जब मेरा ऑपरेशन हो रहा होगा, आप मेरे विषय में सोचते हुए मुझे शुभकामनाएं भेज सकते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक हो और मैं जल्द ही दौड़-भाग सकूं।

रमोना ने कल के ब्लॉग की योजना आज ही बना ली है क्योंकि कल शुक्रवार होने के कारण अपने स्कूल के किसी बच्चे से आपका परिचय करवाने का दिन है और शनिवार और रविवार को क्रमशः खाने की कोई डिश और मेरा आत्मकथात्मक संस्मरण होगा। सोमवार को ही मैं इस लायक हो पाऊंगा कि आपको अपना हाल-चाल और अपनी विदेश-यात्रा के कार्यक्रम के बारे में ठीक-ठीक बता सकूँ कि कब जा पाऊँगा।

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