आधुनिक दवाएं, व्यायाम, सतत प्रयास और प्रेम का स्पर्श – 1 मई 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

कल मैंने अपने ब्लॉग में 2004 में और अभी, पिछले सप्ताह हुई, अपनी शल्यक्रिया की तुलना की थी। आज मैं उन कारणों के बारे में, डॉक्टरों, दवाइयों, भाइयों, दोस्तों और पत्नी की परिचर्या के बारे कुछ अधिक विस्तार से लिखना चाहता हूँ!

मुख्य रूप से चिकित्सा विज्ञान में पिछले दस सालों में हुई प्रगति के कारण मेरी शल्यक्रिया इतनी आसान और कष्टरहित रही। दस साल भी नहीं! यशेंदु की भी इसी तरह की शल्यक्रिया हो चुकी है, बल्कि 2008 में दूसरी बार हुई है, वह भी जर्मनी में। तो इन छह सालों में भी बहुत परिवर्तन हुआ है और यशेंदु की तुलना में अभी से मैं काफी तेज़ी के साथ स्वास्थ्य-लाभ कर रहा हूँ!

स्पष्ट है कि दुनिया भर के हजारों शोधकर्ता हर दिन नई-नई प्रविधियों की खोज में लगे हुए हैं, जिन्हें डॉक्टर अपने मरीजों पर इस्तेमाल करते हैं। दुर्भाग्य से, इन नई खोजों का लाभ सभी मरीजों को नहीं मिल पाता! एक साल पहले मेरा मित्र, गोविन्द एक दुर्घटना का शिकार हो गया था और उसे डॉक्टरों की सलाह पर महीनों बिस्तर पर पड़ा रहना पड़ा था। किसी तरह के व्यायाम की भी उसे मनाही थी। अब जाकर वह सामान्य रूप से चलने-फिरने लगा है मगर उसे पूरी तरह ठीक होने में बहुत ज़्यादा वक़्त लगा। मैंने अपने फिजियोथेरपिस्ट से पूछा कि दोनों में इतना अंतर क्यों रहा।

उसका जवाब बहुत तर्कसंगत था: यह शल्यक्रिया करने वाले डॉक्टर और उसके विचार और नज़रिए पर निर्भर करता है। अब यह विचार पुराना पड़ गया है कि मरीज़ को, उसकी मांसपेशियों को और उस हिस्से को, जहाँ अभी शल्यक्रिया की गई है, पहले काफी आराम की ज़रूरत होती है इसलिए उन्हें कम से कम हिलाना-डुलाना चाहिए। इसके विपरीत, आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार पहले दिन से ही फिजियोथेरपी लेना अधिक लाभदायक माना जाता है-कम से कम, ज़्यादातर पैर सम्बन्धी शल्यक्रियाओं में। शरीर में स्वतः स्वस्थ होने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है और यहाँ तक माना जाता है कि बिना कुछ किए भी आप 80% स्वस्थ तो हो ही सकते हैं, जैसा कि मेरे मित्र के साथ हुआ। किसी जानकार के साथ, उचित व्यायाम और शारीरिक क्रियाओं की मदद से आप 95% या उससे अधिक लाभ पा सकते हैं और वह भी काफी जल्दी! और यह 15% अंतर व्यावहारिक रूप से बहुत बड़ा अंतर होता है!

पिछले सालों में चिकित्सा विज्ञान के कई पहलुओं में हुई प्रगति के अलावा मुझे लगता है कि एक और बात है, जिसके चलते मैं अपने स्वास्थ्य-लाभ की इस प्रक्रिया का भरपूर आनंद ले पा रहा हूँ: मुझे अपनी पत्नी की प्रेममय परिचर्या उपलब्ध हो रही है।

ऐसा नहीं कि पिछली बार मेरी देखभाल करनेवाला कोई नहीं था! मेरे भाई थे, मेरी बहन और माँ थीं, जो बड़े प्रेम से मेरे लिए रोज़ खाना पकाती थीं, मेरे पिताजी बीच-बीच में आकर देख जाते थे, जैसा कि इस बार भी वे करते हैं लेकिन फिर भी अपनी प्रेमिका के प्रेम की बात ही कुछ और होती है। इस बार हम लोग वास्तव में एक अलग और बहुत खुशनुमा एहसास में डूबे हुए हैं।

जब वह फिजियोथेरपी सत्र के दौरान मुझे उठाकर बिठाती है, मेरे पैरों को पकड़कर उठाती है, या हवा में थामे रखती है, व्यायाम कराती है, मांसपेशियों की मालिश करती है और नहलाती है तब वह अनुभव बहुत सुखद होता है। गलत मत समझिए, वह खुद भी इस एहसास का उतना ही मज़ा ले रही होती है! और हाँ, अपरा भी दिन भर में कई बार मेरे पास आकर मेरे साथ खेलने लगती है, मेरे बिस्तर पर बैठकर पढ़ती है और चित्रकारी करती है।

तो इस तरह बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, पिछली बार से कम पीड़ा, कम समय में जख्म का भरना और स्नेहासिक्त देखभाल के कारण मैं अच्छे मूड में हूँ और इस समय का और इस स्थिति का पूरा आनंद उठा रहा हूँ।