अपने लिगामेंट की दोबारा शल्यक्रिया करवाना! 28 अप्रैल 2014

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज सोमवार है और, जैसा कि मैंने गुरुवार को वादा किया था, आज मैं आपको शुक्रवार को हुई मेरे घुटने की शल्यक्रिया के बारे में और अब मेरे क्या हाल चाल है, सब कुछ बताऊँगा। सबसे पहले तो यही कि मैं सकुशल और प्रसन्न हूँ।

बुधवार को मैं डॉक्टर के पास गया था और उसी वक़्त यह निर्णय ले लिया था कि शल्यक्रिया कराने के बाद ही जर्मनी जाऊंगा। गुरुवार को मैंने वोट दिया और शुक्रवार को सबेरे 8 बजे मैं अस्पताल में भर्ती हो गया। अस्पताल में कमरा लेने के बाद डॉक्टरों ने मेरी जाँच की और कुछ और तैयारियों के बाद बारह बजे दोपहर मेरी शल्यक्रिया शुरू हुई और लगभग एक घंटे बाद मैं बाहर भी आ चुका था। सब कुछ सुचारु रूप से संपन्न हो गया।

भर्ती होने हम उसी अस्पताल में आए थे, जहाँ अपरा का जन्म हुआ था। यह गुडगाँव का एक बड़ा और बहुत अच्छा अस्पताल है और दिल्ली विमानतल के पास ही है। वहाँ के डॉक्टर काफी अनुभवी हैं और मुझे बताया गया कि जिस डॉक्टर ने मेरी शल्यक्रिया की थी, वह खेलों से सम्बंधित चोटों का दुनिया भर में माना हुआ शल्यक्रिया-विशेषज्ञ है। हमें भी अस्पताल पसंद आया, नर्सें भी विनीत और दक्ष हैं और मेरी देखभाल करने वाली यहाँ की पूरी टीम पर मैं पूरा विश्वास कर सकता था-और शल्यक्रिया के दौरान यह विश्वास महत्वपूर्ण सिद्ध होता है!

हाँ, शल्यक्रिया के दौरान मैं पूरे समय होश में था क्योंकि मुझे एपीडुरल अनीस्थीशिया देकर मेरे शरीर के सिर्फ निचले हिस्से को सुन्न किया गया था और इसलिए कुछ घंटे मुझे कुछ महसूस ही नहीं हुआ मगर बाद में पंजों से होता हुआ दर्द का अहसास घुटनों तक आते-आते बड़ी शिद्दत के साथ महसूस होने लगा। वह काफी दर्दभरी रात सिद्ध हुई और सबेरे जाकर ही दर्दनिवारकों ने असर दिखाना शुरू किया और फिर आधुनिक दवाओं के चलते मैं शनिवार को सबेरे तक बैठने भी लगा। कुल मिलाकर शल्यक्रिया के बाद फिजिओथैरपी शुरू करने में मुझे कुल 24 घंटों का समय लगा।

यह सुखद आश्चर्य था कि शल्यक्रिया के एक दिन के भीतर मैं अपने चोटिल घुटने के व्यायाम कर पा रहा था और बाद में कुछ देर उसे इधर-उधर धुमाने के बाद आखिर मैं धीरे-धीरे उठा और चलने भी लगा। उसके कुछ घंटे बाद हम घर के लिए रवाना हो चुके थे।

अब मैं आराम कर रहा हूँ। हर तीन घंटे बाद थोड़े से व्यायाम करता हूँ और बहुत ज़रूरी हुआ तो ही चलता हूँ। मैं पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ। हालाँकि अभी दर्द बना हुआ है, लेकिन जब वह असहनीय हो जाता है, कुछ दवाइयां ले लेता हूँ। मुख्य बात यह है कि अब जो दर्द हो रहा है, वह ज़ख्म भरने का दर्द है और वह हर दिन कमतर होता जा रहा है।

परसों हम पुनः जाँच के लिए अस्पताल जाएंगे और उसके बाद टाँके खुलवाने एक बार और जाना पड़ेगा। जर्मनी वाले अपने कार्यक्रम को हम पहले ही पुनर्नियोजित कर चुके हैं, टिकिट बदले जा चुके हैं और अब हम 15 मई को यहाँ से रवाना होंगे। तो, हमारे कार्यक्रम में कुल मिलाकर सिर्फ दो हफ्तों का विलम्ब हुआ। अब मेरा पैर तेज़ी के साथ ठीक हो रहा है और जब हम भारत वापस लौटेंगे तब तक मैं अच्छी तरह चलने-फिरने लगूंगा!