प्रिय मरीजों, यह आपका शरीर है, अपने अधिकारों को जानिए और अपनी जिम्मेदारियों को वहन कीजिए-8 अगस्त 2013

कल मैंने भारतीय डॉक्टरों के गैर पेशेवराना व्यवहार के बारे में लिखा था लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि यदि डॉक्टर मरीजों के साथ बात नहीं करते, न उन्हें क्या हुआ है, बताते हैं, न ही उपचार के बारे में कोई जानकारी देते हैं, तो इसके कुछ जायज़ कारण भी हो सकते हैं। मैं इन गैर पेशेवर डॉक्टरों के बचाव में कुछ नहीं कहना चाहता मगर उन मरीजों से भी उनके व्यवहार के बारे में कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूँ।

मैंने बताया था कि सुदूर इलाकों से आने वाले ग्रामीण मरीज पेट जानते हैं, पेटदर्द जानते हैं, मगर पेट की अंदरूनी संरचना से उनका कोई सरोकार नहीं होता। तो अगर कोई डॉक्टर यह कहे कि उनकी आंतों में संक्रमण हो गया है तो वे उस पर कोई कान नहीं देते। इसीलिए डॉक्टर उनसे बीमारी के बारे में कुछ बताना छोड़ देते हैं। लेकिन मैंने देखा है कि अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग भी इस बात की परवाह नहीं करते कि डॉक्टर उन्हें उनकी बीमारी और उसके इलाज की जानकारी देता है या नहीं। क्या आप अपना इलाज इसी तरह से कराने के आदी हैं? क्या यह आदत ही इसका कारण है या आपको अपने शरीर और होने वाली बीमारियों के बारे में जानने में कोई रुचि ही नहीं है?

मैंने यह भी लिखा था कि अपने मरीजों के प्रति डॉक्टरों की कुछ जिम्मेदारियाँ होती हैं। इसी तरह मरीजों की भी अपने खुद के शरीर को लेकर कुछ जिम्मेदारियाँ होनी ही चाहिए! आप पढ़े-लिखे हैं, आप जानते हैं कि आपके कौन से अंग किस जगह स्थित हैं और उनका क्या अंतरसंबंध है और वे आपस में किस तरह से आपस में जुड़े हुए हैं या वे किस तरह संक्रमित हो सकते हैं। लेकिन आप डॉक्टर के क्लीनिक से लौटने के बाद भी उतना ही जानते हैं, जितना उसके यहाँ प्रवेश करते वक्त जानते थे! और आप बिना कुछ जाने-समझे कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाइयाँ आपके शरीर पर क्या असर करेंगी, दवाइयाँ खरीद लेते हैं, उन दवाइयों को खाते हैं और ठीक हो जाते हैं और सोचते हैं कि: “चलिये, सब कुछ जानकर क्या करना है। उसने मुझे ठीक तो कर ही दिया!”

क्या आप खुद से यह सवाल कभी नहीं पूछते कि आखिर वे सारी गोलियां, जो डॉक्टर के भरोसे पर आप निगलते जा रहे हैं, आखिर किस बीमारी के लिए दी गई हैं? भारत में तो दवा विक्रेता दवाइयों के साथ उनकी जानकारी वाला पर्चा (पैकेज इन्सर्ट) भी नहीं देते कि आप उनके बारे में बाद में जानकारी प्राप्त कर सकें। नहीं, आप उन दवाइयों के रासायनिक योग या आपके शरीर पर उनके असर के बारे में तो छोड़िए, उन दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट्स के बारे में भी जाने बिना उन्हें निगलते चले जाते हैं।

मज़ेदार बात यह है कि अगर आप अपने डॉक्टर से कहें कि जब तक बहुत आवश्यक न हो, आप एंटी बायोटिक लेना पसंद नहीं करते, तो वह उसकी कोई वैकल्पिक दवा भी लिख सकता है। लेकिन आप उससे कुछ नहीं कहते, इस बारे में कोई बात ही नहीं करते; बस बच्चों की तरह गुमसुम बैठे रहते हैं और वह सब स्वीकार कर लेते हैं जो डॉक्टर लिख देता है। आखिर वह कैसे जानेगा कि आप क्या चाहते हैं? वह तो आपको आम भारतीय मरीजों जैसा ही मानेगा, जो कहते हैं: “डॉक्टर, मुझे जल्द से जल्द ठीक करना आपका काम है। यह मैं नहीं जानता कि कैसे। मुझे तो हर हाल में सोमवार को काम पर हाजिर होना है!” स्वाभाविक ही वह आपको वैसी ही दवा देगा जैसी आप चाहते हैं, भले ही उसके बहुत प्रतिकूल असर होते हों, जो तुरंत तो नहीं, लेकिन कुछ साल बाद अपना असर दिखाएँगे और तब आप किसी दूसरी बीमारी के हत्थे चढ़ जाएंगे!

आप बात नहीं करते, आप पूछते नहीं, आप शिकायत नहीं करते। मैं जानता हूँ कि कुछ डॉक्टर होते हैं जो अपनी विशिष्ट शिक्षा के गुमान में अपने आपको किसी ऊंचे स्थान पर रखकर आपसे बात करते हैं और कई बार नाराजी से या काफी अपमानजनक तरीके से जवाब देते हैं। लेकिन अगर आप उनके इस कटु व्यवहार की शिकायत नहीं करते तो वे कभी इन दोषों से मुक्त नहीं हो सकते, बल्कि तब वे अपने व्यवहार को उचित ही समझते रहेंगे और कभी कोई बदलाव नहीं हो सकेगा। यह गलत बात है; आपको मजबूती के साथ अपनी बात रखनी चाहिए, क्योंकि आपकी बात गलत नहीं है। अपने अधिकारों को समझिए और उनके लिए लड़िए। शरीर आपका है और वह डॉक्टरों की तवज्जो का हकदार है और आपको जानना चाहिए कि उसके साथ क्या किया जा रहा है। इसी बात के लिए आप डॉक्टर के पास आते हैं और इसी बात की आप उन्हें फीस अदा करते हैं।

एक बार ऐसा करके देखिए और आप ऊपर वर्णित डॉक्टर और एक वाकई अच्छे डॉक्टर, जो आपकी बात सुनता है, जो आपकी फिक्र करता है और स्वाभाविक ही वह सब कुछ करता है जिससे न सिर्फ आपका इलाज हो बल्कि उस इलाज की चिकित्सकीय बारीकियाँ, जैसे इलाज की विधियाँ, वैकल्पिक दवाइयाँ आदि का भी आपको पता चले, के बीच के अंतर को पहचान पाएंगे। ऐसे डॉक्टर हैं, लेकिन आपको भी एक अच्छे मरीज की तरह व्यवहार करना सीखना होगा, तभी आप अपना अच्छा इलाज करा पाएंगे।

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