भारत जैसे अत्यधिक जनसंख्या वाले देश में स्त्री-रोग विशेषज्ञ का शर्मनाक रवैया- 30 अक्तूबर 2013

स्वास्थ्य

कल मैंने बताया था कि मेरी पत्नी हमारी एक महिला कर्मचारी को लेकर स्त्री-रोग विशेषज्ञ के पास गई थी। मैंने यह भी बताया था कि वह महिला गर्भवती थी मगर अभी बच्चा नहीं चाहती थी। डॉक्टर के क्लीनिक में क्या हुआ, मैं आपको आज बताता हूँ।

डॉक्टर ने (स्त्री-रोग विशेषज्ञ ने) उस महिला की पूरी बात सुनी, समस्या से संबन्धित सारे विवरण नोट किए और आखिर कहा कि गर्भाधान का दिन और गर्भ की स्थिति जानने के लिए महिला का अल्ट्रासाउंड कराना होगा। वे लोग यही अपेक्षा कर रहे थे। जैसी की उम्मीद थी, गर्भ का दूसरा महीना शुरू हो चुका था, यह सातवाँ सप्ताह था।

परामर्श कक्ष में वापस आने पर डॉक्टर ने परामर्श शुरू किया और रमोना ने देखा कि उसकी उम्मीद से वह बिल्कुल अलग था। मरीज़ ने पहले ही डॉक्टर को बता दिया था कि उसे दूसरा बच्चा नहीं चाहिए और उसका एक बच्चा अभी दो साल का है और यह भी कि अभी एक ही बच्चा काफी है। लेकिन डॉक्टर कह रही थी: ‘अगर मुझसे पूछो तो मैं यही कहूँगी कि तुम इस बच्चे को पैदा हो जाने दो!‘ रमोना यह सुनकर हैरान रह गई-वह इतने गंभीर और व्यक्तिगत मसले पर ऐसी स्पष्ट राय कैसे दे सकती है? डॉक्टर ने हमारी कर्मचारी को अपनी बात स्पष्ट करने का मौका ही नहीं दिया:

बच्चा हो जाने दो। कुछ बातें हमें ईश्वर पर छोड़ देनी चाहिए। तुम्हारा अभी एक ही बच्चा है। अगर दो होते तो मैं इतनी बात नहीं करती लेकिन तुम्हारा एक ही बच्चा है। समय खराब चल रहा है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है सभी बच्चे स्वस्थ रहेंगे। तुम्हारे पास मौका है कि एक और बच्चा पैदा कर सकती हो-कौन जानता है कि आज से दो या तीन साल बाद क्या होगा! तुम अभी नहीं चाहती हो मगर अभी आठ माह हैं और तुम्हारा पहला बेटा तब तक तीन साल का हो चुका होगा। अगर अभी तुम बच्चा नहीं पैदा करोगी तो बाद में दिक्कत भी हो सकती है। मेरे पास तो दर्जनों औरतें आती हैं, जो बच्चा चाहती हैं लेकिन उन्हें बच्चे पैदा नहीं होते! फिर बिना भाई-बहन के तुम्हारा पहला बच्चा भी अकेलापन अनुभव करेगा।

यह डॉक्टर एक 26 साल की महिला से दरअसल यह कह रही थी कि उसका दो साल का बच्चा सदा-सदा के लिए अकेला और दुखी रह जाएगा या हो सकता है कि वह मर जाए और बाद में वह गर्भवती न हो सकी तो वे लोग बिना बाल-बच्चों के रह जाएंगे!

डॉक्टर की यह बात सुनकर रमोना स्तब्ध रह गई और आपत्ति जताते हुए उसने कहा: देखिए, इस महिला को गर्भवती न हो पाने की कोई समस्या नहीं है-वह कई बार गर्भवती हो चुकी है लेकिन वह जानती है कि अगर वह दूसरा बच्चा पैदा करना चाहेगी तो होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य की खातिर उसे दवा-दारू पर बहुत सा रुपया खर्च करना होगा! वह नहीं चाहती कि अभी इस मद में इतना रुपया खर्च करे, न ही यह कि एक और सीजेरियन के चक्कर में पड़े। और सबसे मुख्य बात, अभी वह बच्चा ही नहीं चाहती। डॉक्टर ने जवाब दिया: हम सारा इलाज कम से कम रुपयों में कर देंगे!

तब रमोना ने साफ-साफ कहा कि यह उस महिला की मर्ज़ी की बात है कि वह क्या करना चाहती है: दूसरा बच्चा चाहती है या गर्भपात कराना चाहती है-वह बालिग है और कानूनी रूप से गर्भपात कराने का निर्णय ले सकती है! तब उसे मानना तो पड़ा मगर इसके बावजूद वह ज़िद करने लगी कि वह उसके पति से भी पूछना चाहेगी कि क्या वह भी बच्चा नहीं चाहता। आवश्यक तो नहीं था मगर इस मामले में ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं थी-उसे बुलाया गया और उसने भी वही बात दोहरा दी कि वह भी अभी बच्चा नहीं चाहता।

इस दंपति के अपने इरादे को अंजाम देने की प्रक्रिया में डॉक्टर ने बहुत रोड़े अटकाए! बात वहीं खत्म नहीं हुई-जब डॉक्टर आगे कुछ न कह सकी तो वह दवाई की पर्ची तक लिखकर देने में आनाकानी करती रही! उसने कहा कि उसकी क्लीनिक में अभी दवाइयाँ नहीं हैं। फिर उनसे दूसरे दिन आने के लिए कहा। अगले दिन पर्ची लिखी तो कहा कि बड़े शहर जाकर दवाइयाँ लेनी होंगी, जोकि एक मूर्खतापूर्ण बात थी। किसी भी दुकान में डॉक्टर की पर्ची दिखाकर दवाइयाँ मिल सकती हैं, खासकर भारत में तो बिना डॉक्टर की पर्ची के भी दवाइयाँ मिल जाती हैं, हालांकि हम ऐसा नहीं करने वाले थे। आखिर किसी तरह वे दवाइयाँ लेकर आए, महिला का गर्भपात कराया गया और अब महिला स्वस्थ है और दंपति की परेशानी दूर हो चुकी है। लेकिन यह सोचकर कि वह उस डॉक्टर के यहाँ गई थी, उसका मन कड़ुवाहट से भर जाता है।

वह डॉक्टर उस महिला को बच्चा पैदा करने के लिए सहमत करने का प्रयास क्यों कर रही थी? क्यों वह उस महिला को बच्चे की मौत का डर दिखा रही थी? भारत जैसे देश में, जो आबादी की अधिकता से पहले ही बजबजा रहा है, वह डॉक्टर उस महिला को ऐसी सलाह क्यों दे रही थी? जब कि एक तरफ हमारे देश में परिवार नियोजन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें यह बात बताई जाती है कि एक या दो बच्चे सुखी परिवार के लिए पर्याप्त हैं। आजकल जिस परिवार में पहले की तरह पाँच या छह बच्चे हों तो उसे बुरी नज़र से देखा जाता है। ऐसी स्थिति में उस महिला द्वारा दिखायी जा रही ज़िम्मेदारी और साहस प्रशंसा योग्य थे। वह यह समझ रही थी कि पहले से एक छोटा बच्चा होते हुए दूसरा बच्चा पैदा करने पर वह दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का उचित निर्वाह नहीं कर पाएगी। उस डॉक्टर का कर्तव्य था कि उस महिला को परिवार नियोजन के तरीकों की जानकारी देती मगर इसके उलट वह उसे एक और बच्चा पैदा करने की सलाह दे रही थी, बल्कि उस पर इस बात के लिए दबाव डाल रही थी।

क्या उस गर्भवती महिला से नौ माह तक पैसा उगाहते रहने की आशा में वह डॉक्टर ऐसा कर रही थी या वह अंतरतम से यह मानती थी कि गर्भपात कराना एक अनैतिक कृत्य है? यह जानने का हमारे पास कोई जरिया नहीं है लेकिन मुझे लगता है कि दोनों ही कारणों से किसी भी डॉक्टर को ऐसा नहीं करना चाहिए-यह किसी भी सूरत में एक व्यावसायिक (professional) व्यवहार नहीं है। होना यह चाहिए कि वह जांच के आधार पर अपनी तटस्थ चिकित्सकीय राय व्यक्त करे और सामने वाले को अपना व्यक्तिगत निर्णय लेने के लिए आज़ाद छोड़ दे। नहीं, किसी भी इलाज के लिए इस डॉक्टर की हम अनुशंसा नहीं कर सकते।

Leave a Comment