अपने माता-पिता को दोष देना बंद कीजिए – अपने जीवन की ज़िम्मेदारी खुद वहन कीजिए! 19 नवंबर 2014

प्रसन्नता

मैंने अपने जीवन में अनेकानेक लोगों के साथ अपने व्यक्तिगत सत्र किए हैं। उनमें हम जीवन की समस्याओं, आपसी विवादों और जीवन के दूसरे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर बातचीत करते हैं। एक बात मैंने अक्सर देखी है कि अधिकांश लोगों को अपने अभिभावकों से बहुत शिकायत होती है और वे उनके प्रति विद्वेष से भरे होते हैं। मैंने उन्हें हमेशा समझाया है कि यह एक व्यर्थ का बोझ है, जिसे अपने कन्धों पर से उतार फेंकना चाहिए!

अक्सर मैंने लोगों को कहते सुना है कि जैसा व्यवहार हमारे अभिभावकों ने हमारे साथ किया था वैसा हम अपने बच्चों के साथ कभी नहीं करेंगे। अगर आप उनसे पूछें तो वे आपको अपने अभिभावकों के दुर्व्यवहार के कई उदाहरण दे देंगे और कहेंगे कि वे अपने बच्चों के साथ ऐसा नहीं करेंगे। वे दिल से मानते हैं कि अभिभावकों का ऐसा व्यवहार गलत है और इसका उन पर बुरा असर हुआ है या इससे उन्हें स्थाई क्षति पहुँची है।

कुछ लोग इतना स्पष्ट नहीं कहते और कुछ लोग कह देते हैं मगर अधिकतर लोग बताते हैं कि आज की उनकी कुंठाएँ, डर और असुरक्षा की भावना दरअसल कई साल पहले किए गए उनके अभिभावकों के दुर्व्यवहार का नतीजा हैं। कि वास्तव में यह उनके अभिभावकों का दोष है कि आज वे अपने काम में या जीवन में सफल नहीं हैं बल्कि भावनात्मक रूप से अस्थिर और असंतुष्ट हैं; खुद तो किसी से प्रेम नहीं कर पा रहे हैं और कोई दूसरा उनसे प्रेम करे तो भी उन्हें घबराहट और शंका होती है।

यह सही है कि आपका बचपन जिस तरह बीता और उन्होंने आपको जो सिखाया-समझाया, शिक्षा प्रदान की उसी के चलते आज आप जो भी हैं, वैसे है-मगर उन सालों में आपने क्या किया जब आप अपने अभिभावकों का घर छोड़कर बाहर निकल चुके थे? या उन सालों में, जब आप वयस्क हो चुके थे, अपनी खुद की ज़िम्मेदारी संभाल चुके थे, अपने निर्णय खुद लेने लगे थे?

आप एक वयस्क हैं! अपने जीवन के अच्छे-बुरे के लिए आप खुद ज़िम्मेदार हैं!

बचपन में लगातार कोई बात सीखने पर उसी तरह ढल जाना स्वाभाविक है लेकिन उसमें परिवर्तन लाया जा सकता है! स्पष्ट है कि अब आप समस्या की तह तक पहुँच गए हैं-अब आप यह बदलाव कर सकते हैं! आखिर आज अपने जीवन के निर्णय तो आप खुद ही लेते हैं!

अगर आप ऐसे किसी क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं जो आपको पसंद नहीं है तो उसमें परिवर्तन कर लें। आपके बचपन में माता-पिता ने आपकी भलाई के लिए ही सोचा था कि यह क्षेत्र भविष्य में आपके लिए आर्थिक रूप से उचित और सुरक्षित होगा लेकिन अगर आपको उस पेशे से घृणा है तो उसे छोड़कर किसी दूसरे मनपसंद विकल्प की तलाश करें। दूसरे क्षेत्रों में उपलब्ध शाम की कक्षाओं में पढ़ाई करें, समय बचाकर कोई दूसरी ट्रेनिंग ले लें, किसी दूसरे क्षेत्र में पार्ट-टाइम काम करें,…ऐसी बहुत सी संभावनाएँ हमेशा मौजूद रहती हैं जो आपको अपने जीवन में परिवर्तन लाने में मदद कर सकती हैं और आप अपना पसंदीदा क्षेत्र चुनकर खुशी-खुशी जीवन गुज़ार सकते हैं!

केवल आप स्वयं ही अपने आपको खुश रख सकते हैं! आप जो भी हैं, उसके लिए अपने माता-पिता को जीवन भर दोष देते नहीं रह सकते! किशोरावस्था में किसी समय आपने अपनी जिम्मेदारियाँ अपने हाथ में लेना शुरू कर दिया था और यह प्रक्रिया आगे आपके वयस्क होने तक जारी रही होगी। उसके बाद तो आपने अपनी सारी ज़िम्मेदारी संभाल ही ली थी! आप अभी भी यही रोना रो रहे हैं कि माता-पिता के निर्णयों के कारण आप दुखी हैं तो इसका अर्थ यही है कि आप आज भी अपने जीवन की कुछ जिम्मेदारियाँ उन्हीं पर छोड़े हुए हैं! क्या आप समझते हैं कि यह उचित विचार है?

बदलाव लाइए और जब आप अपनी ज़िम्मेदारी अपने हाथों में लेंगे तभी खुशी भी आपके हाथों में होगी!

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