कृपया इसे अवश्य पढ़ें यदि आप रोजमर्रा की जिन्दगी से बचने के लिए छुट्टियाँ मनाने जाते हैं! 2 फरवरी 2015

कल मैंने आपको सारांश में बताया था कि जब मैं छुट्टियाँ बिताने कहीं बाहर जाता हूँ तो मैं क्या महसूस करता हूँ। मैं जानता हूँ कि छुट्टियों के बारे में मैं दूसरों से कुछ अलग विचार रखता हूँ। और मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि कई लोग जब अपनी छुट्टियों के बारे में बताते हैं तो लगता है जैसे वे कुछ गलत काम कर रहे हों। अपनी छुट्टियों को लेकर नहीं बल्कि अपने दिनचर्या को लेकर!

मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि मुझे छुट्टियाँ पसंद हैं। मुझे पत्नी के साथ किसी दूसरे शहर जाकर छुट्टियाँ मनाना पसंद है, वहाँ जाकर बिना किसी निश्चित कार्यक्रम के अपनी मर्ज़ी से कुछ दिन गुज़ारना पसंद है, यह सोचकर ही मुझे बड़ा अच्छा लगता है कि अगर हम चाहेंगे तो किसी होटल में सारा दिन अकेले रहकर गुज़ार सकते हैं और अपने मनपसंद रेस्तराँ में रात का खाना खा सकते हैं। मैं ये सब बातें पसंद करता हूँ-लेकिन यह मेरे जीवन के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। मैं अपनी छुट्टियों के अधीन नहीं हूँ। मेरा पूरा साल मेरी छुट्टियों पर केन्द्रित नहीं है। जब हम वापस लौटते हैं तो हम बात करते हैं कि छुट्टियाँ कितनी अच्छी रहीं और अपने काम पर लग जाते हैं।

मैंने कुछ दिन पहले ही आपको बताया था कि मैं अपने काम से प्यार करता हूँ। सिर्फ काम से ही नहीं, अपने जीवन से, अपने आश्रम से, अपने स्कूल से, अपने चैरिटी के काम से, अपने व्यवसाय से, अपने परिवार, दोस्तों, मिलने-जुलने वालों, बच्चों और अपने मेहमानों से। और मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जो ऐसा महसूस नहीं करते। जो अपने सामान्य जीवन में अपने रूटीन से खुश नहीं हैं।

आश्रम से बिदा लेते समय अकसर लोगों की आँखें भर आती हैं। स्वाभाविक ही हम यह जानकर खुश होते हैं कि आश्रम में उनका समय बहुत अच्छा रहा और दुनिया के इस कोने में बने अपने मित्रों को छोड़कर जाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है और इस कारण उनकी आँखों में आँसू आ गए! लेकिन कभी-कभी ये आँसू निश्चित रूप से यह नहीं बताते कि यहाँ उनका समय अच्छा रहा बल्कि यह बताते हैं कि आगे आने वाला समय अच्छा नहीं होगा! घर जाना उन्हें अच्छा नहीं लग रहा होता और उन्हें दुख होता है कि अब उन्हें वहीं वापस जाना होगा।

चाहे वह उनका काम हो, व्यवसाय हो, उनकी पारिवारिक स्थिति हों या सामान्य अकेलापन या जीवन से असंतोष हो-उनकी छुट्टियाँ उनके लिए खुशियाँ लेकर आती हैं जब कि सामान्य रूप से अपने जीवन में वे खुश नहीं होते। छुट्टियों को सामान्य जीवन से ‘पलायन’ नहीं होना चाहिए जबकि उन्हें आजकल इसी तरह विज्ञापित किया जा रहा है! जी हाँ, छुट्टियों में आप अपने भीतर ऊर्जा का पुनर्संचार करते हैं और कुछ अलग, नया देखते हैं, कुछ अलग करते हैं और नए लोगों से मिलते-जुलते हैं। लेकिन अपने सामान्य जीवन, अपने रूटीन से भागकर आपको छुट्टियों का कार्यक्रम नहीं बनाना चाहिए!

इस तरह अपने सामान्य जीवन को आपकी ऊर्जा पूरी तरह निचोड़ लेने की इजाज़त मत दीजिए! अगर आपको लगे कि आप सिर्फ इसलिए जीवित हैं कि कुछ महीनों बाद कहीं बाहर जाकर छुट्टियाँ बिता सकें, अगर आप अपनी छुट्टियों का इंतजार कर रहे हैं और उनसे पलायन की कल्पना कर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपना जीवन नहीं जी रहे हैं। तब शायद साल में आप सिर्फ चार सप्ताह की ज़िंदगी जी रहे हैं!

अपने जीवन को बरबाद न होने दें। उसमें परिवर्तन लाने की कोशिश करें और अभी, इसी समय से यह कोशिश शुरू कर दें!

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