अनुभवों ने मुझे बार बार इस बात का एहसास कराया है कि कुछ लोग हर वक़्त गलतियाँ ढूँढ़ने में ही लगे रहते हैं। अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो आप उनकी फ़िक्र करना छोड़ दें। प्रमाणिकता और ईमानदारी के साथ जिएँ और अपने व्यवहार, कामों और निर्णयों पर पूरा आत्मविश्वास रखें। उसके पश्चात् बिना किसी हिचकिचाहट या सन्देह के और ऐसे लोगों के शब्दों को महत्वहीन समझते हुए उनकी उपेक्षा कीजिए।
पिछले पूरे सप्ताह मैं लोगो के ऐसे व्यवहार के उदाहरण देता रहा हूँ। खुशमिजाज़ बच्चों के पुराने एल्बम में से छाँटकर मैंने अपने ब्लॉग में एक फोटो लगाया। मैंने तय किया कि वह फोटो लगाऊँगा जिसमें बच्चे कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे हैं। नतीजा क्या होता है?: एक व्यक्ति हमारे यहाँ बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर और सख्ती के साथ लागू बराबरी के विचार पर शक का इज़हार करता है। मेरा एक मित्र चैरिटी का महती कार्य कर रहा है लेकिन अपनी यौन प्राथमिकताओं के कारण अपमानित किया जाता है- जबकि चैरिटी से इसका कतई कोई सम्बन्ध नहीं है! मैं अपने ब्लॉग में दही बनाने की विधि लिखता हूँ और मुझ पर ताना कसा जाता है कि 'दही बनाना इतना सरल है कि इसे हर कोई जानता है। आप इसके बारे में क्यों लिखते हैं?'
आपको हमेशा ऐसे लोग मिलते रहेंगे। मैंने जीवन में हमेशा इसे महसूस किया है। मैं बहुत खुशमिजाज़ व्यक्ति हूँ और जीवन में हमेशा सफल रहा हूँ। जब आप सफलता प्राप्त करते हैं तो लोग आपसे ईर्ष्या करने लगते हैं। जब आप खुश रहते हैं लोग जलते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह उनकी एहसासे कमतरी के चलते होता है या फिर आपके साथ उनकी कोई व्यक्तिगत समस्या के कारण, वे बस, ईर्ष्या करते हैं क्योंकि आप खुश और सफल हैं और वे नहीं।
वे आपकी सफलता के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते। स्वाभाविक ही वे महसूस करते हैं कि आपकी सफलता के कारण आपसे खुश नहीं हो सकते और न ही आपकी सफलता में सहभागी हो सकते हैं। इसलिए वे आपको नीचा दिखाकर आपसे बराबरी का अनुभव करने की कोशिश करते हैं। कम से कम यह कि वे आपको नीचा दिखाने की कोशिश अवश्य करते हैं।
क्या आप उन्हें ऐसा करने देंगे?
वास्तव में यह आपका निर्णय होगा! आपको ही इस बात का चुनाव करना है कि आप उन्हें इस बात में सफल होने देते हैं या नहीं। लेकिन यह उन्हें खुश नहीं कर पाएगा। इससे सिर्फ आप दुखी भर होंगे कि आपने उन्हें आपको परेशान करने की इजाज़त दे दी! वे यह नहीं मानेंगे कि खुश रहना आपका और सिर्फ आपका निर्णय था। आप सफल इसलिए हैं कि आप उसे उस तरह देखते और महसूस करते हैं। कि वे भी खुश हो सकते हैं अगर वे भी चीजों को उसी तरह लें जिस तरह आप लेते हैं!
यह आपका कर्तव्य नहीं है कि आप उन्हें यह समझाएँ। बल्कि आपका कर्तव्य यह है कि ऐसे लोग कुछ भी कहें, आपको हर हाल में खुश बने रहना होगा।
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